उत्तराखंड पंचायत चुनाव: खर्च में राहत, पर अपराधियों के लिए अब दरवाजे बंद!

Published : Dec 07, 2024, 11:24 AM IST
uttrakhand panchayt election

सार

उत्तराखंड पंचायत चुनाव में खर्च सीमा बढ़कर ₹60,000 हुई। ग्राम पंचायत सदस्य और उप प्रधान को छोड़ सभी पदों पर लागू। अपराधी उम्मीदवारों पर भी सख्ती।

देहरादून। उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव करीब हैं, ऐसे में लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए राहत की खबर है। दरअसल राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने शुक्रवार को पंचायत चुनाव में खर्च सीमा बढ़ाने का आदेश जारी कर दिया है। जिसके बाद अब पंचायत चुनाव में ग्राम पंचायत सदस्य और उप प्रधान को छोड़कर बाकी सभी पदों के लिए खर्च सीमा 25,000 से 60,000 रुपये तक बढ़ा दी गई है।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, नामांकन पत्रों का मूल्य और जमानत राशि पूर्ववत ही रहेगी। लेकिन चुनाव में खर्च सीमा में वृद्धि से उम्मीदवारों को राहत मिलेगी। पंचायत चुनावों की तैयारियों को लेकर यह बड़ा फैसला लिया गया है।

चुनाव की तैयारी में जुटा निर्वाचन आयोग

आपकी जानकारी के लिए बता दें, उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद अब ये पंचायतें प्रशासकों के ज़िम्मे हैं। अगले साल चुनाव प्रस्तावित हैं, जिसके चलते आयोग ने तैयारियां भी तेज कर दी हैं। राज्य निर्वाचन आयुक्त ने सभी जिलाधिकारियों को आदेश दिया है कि नई व्यय सीमा को तत्काल लागू किया जाए।

अपराधियों पर आयोग सख्त

चुनावी पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने राजनीति में अपराधीकरण रोकने के भी निर्देश दिए हैं।

  • अपराधियों के लिए सख्ती: यदि कोई व्यक्ति किसी अपराध में दोषी ठहराया गया है, तो वह पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेगा। भले ही उसे जमानत मिल गई हो या उसकी सजा स्थगित की गई हो।
  • आपराधिक इतिहास का खुलासा अनिवार्य: उम्मीदवारों को नामांकन के साथ शपथ-पत्र दाखिल करना होगा, जिसमें उनके आपराधिक इतिहास का विवरण शामिल होगा।

खर्च सीमा बढ़ाने से क्या फायदा होगा?

उत्तराखंड निर्वाचन आयोग ने इन प्रावधानों को लागू करके चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने का प्रयास किया है।

  • खर्च सीमा बढ़ने से ईमानदार उम्मीदवारों को मदद मिलेगी।
  • आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों पर सख्ती से चुनावी प्रक्रिया साफ़ और पारदर्शी होगी।

अगले साल चुनाव होने की संभावना

उत्तराखंड में पंचायत चुनावों की तारीखें अभी घोषित नहीं हुई हैं, लेकिन आयोग के इन सख्त निर्देशों से साफ है कि चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष और कड़ा बनाया जाएगा।


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