मानसून से पहले पुष्कर सिंह धामी सरकार की मेगा तैयारी, उत्तराखंड के 13 जिलों में होगी बड़ी मॉक ड्रिल

Published : Jun 19, 2026, 06:20 PM IST
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सार

Uttarakhand News: क्या उत्तराखंड मानसून आपदाओं से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है? 13 जिलों में होने वाली मॉक ड्रिल में क्या होगा? क्या भूस्खलन, बाढ़ और हेली रेस्क्यू जैसे हालातों का अभ्यास किया जाएगा? राहत शिविरों की व्यवस्था कितनी मजबूत है? क्या स्थानीय समुदाय भी इस बड़े अभियान का हिस्सा बनेगा?

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के तहत आगामी 2 जुलाई को उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इस अभ्यास का उद्देश्य मानसून के दौरान संभावित आपदाओं की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी, तेज और समन्वित बनाना है।

मॉक ड्रिल की तैयारियों को लेकर शुक्रवार को सचिवालय में आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन की अध्यक्षता में ओरिएंटेशन एवं समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी जिलों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

CM Dhami Disaster Preparedness Plan: मुख्यमंत्री के निर्देश पर अंतिम चरण में तैयारियां

सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में मानसून पूर्व तैयारियों की समीक्षा के दौरान विभागों के बीच बेहतर समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता विकसित करने के लिए राज्यव्यापी मॉक ड्रिल आयोजित करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने बताया कि यह अभ्यास राज्य के करीब 70 नए स्थानों पर आयोजित किया जाएगा। जिन स्थानों पर पहले मॉक ड्रिल हो चुकी है, वहां इस बार अभ्यास नहीं कराया जाएगा।

Table Top Exercise: 30 जून को होगी तैयारी की समीक्षा

मॉक ड्रिल से पहले 30 जून को टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित की जाएगी। इस दौरान सभी जिलों द्वारा उपलब्ध संसाधनों, आपदा प्रतिक्रिया योजनाओं, उपकरणों की उपलब्धता और तैनाती की जानकारी प्रस्तुत की जाएगी। यह पूरा अभ्यास घटना प्रतिक्रिया प्रणाली (IRS) के तहत संचालित किया जाएगा, जिससे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।

Disaster Response Capacity Test: विभागों की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता का होगा परीक्षण

बैठक के दौरान अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन प्रकाश चंद्र ने निर्देश दिए कि एटीआई नैनीताल से आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके कर्मचारियों का अलग डेटाबेस तैयार किया जाए और उन्हें प्रथम प्रतिक्रियादाता (First Responder) के रूप में विकसित किया जाए। वहीं अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) एवं डीआईजी राजकुमार नेगी ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि मॉक ड्रिल के जरिए विभिन्न विभागों की आपदा प्रबंधन क्षमता और राहत-बचाव कार्यों में आपसी तालमेल की जांच की जाएगी।

Relief Camp Management: राहत शिविरों की व्यवस्थाओं का होगा वास्तविक परीक्षण

मॉक अभ्यास के दौरान राहत शिविर स्थापित कर वहां उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं की भी जांच की जाएगी। इन शिविरों में बिजली, स्वच्छ पेयजल, भोजन, प्राथमिक उपचार, शिशु आहार तथा गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सुविधाओं की व्यवस्था का परीक्षण किया जाएगा। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस और होमगार्ड जवानों की तैनाती भी सुनिश्चित की जाएगी।

Community Participation in Disaster Management: स्थानीय समुदाय की होगी अहम भूमिका

सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि किसी भी आपदा की स्थिति में सबसे पहले स्थानीय समुदाय ही प्रतिक्रिया देता है। इसलिए समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत बनाना बेहद जरूरी है। मॉक ड्रिल में पूर्व सैनिकों, पूर्व अर्द्धसैनिक बलों (CAPF) के जवानों, आपदा मित्रों, स्वयंसेवी संस्थाओं, एनसीसी, एनएसएस, रेड क्रॉस और अन्य सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

Disaster Management Equipment Exhibition: आधुनिक उपकरणों का होगा प्रदर्शन

मॉक ड्रिल से पहले आयोजित टेबल टॉप एक्सरसाइज के दौरान विभिन्न एजेंसियों द्वारा आपदा प्रबंधन उपकरणों और संसाधनों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, अग्निशमन सेवा, स्वास्थ्य विभाग और अन्य एजेंसियां आधुनिक खोज एवं बचाव उपकरण, संचार प्रणाली, राहत सामग्री और आपदा प्रतिक्रिया वाहनों का प्रदर्शन करेंगी। साथ ही इनके संचालन का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया जाएगा।

Monsoon Disaster Scenarios: इन आपदा परिस्थितियों पर होगा अभ्यास

मॉक ड्रिल के दौरान मानसून से जुड़ी विभिन्न आपदा स्थितियों का अभ्यास किया जाएगा। इनमें रिहायशी क्षेत्रों में जलभराव, तटबंधों को खतरा, स्कूलों से बच्चों की सुरक्षित निकासी, भूस्खलन के कारण मार्ग अवरुद्ध होना, कटे हुए क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाना, जल विद्युत परियोजनाओं से पानी छोड़े जाने पर अलर्ट जारी करना तथा इमारतों और छतों पर फंसे लोगों का हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू जैसे परिदृश्य शामिल रहेंगे।

राज्य सरकार का उद्देश्य इस अभ्यास के माध्यम से आपदा प्रबंधन तंत्र को और अधिक सक्षम, समन्वित और प्रभावी बनाना है, ताकि मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति से तेजी और दक्षता के साथ निपटा जा सके।

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