
उत्तराखंड में आगामी चुनावों को देखते हुए मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने गुरुवार को सचिवालय में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर अभियान की प्रगति की समीक्षा की और सहयोग का आह्वान किया।
बैठक में मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राजनीतिक दलों से फील्ड स्तर पर बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) का सहयोग करने और पात्र मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करने की अपील की।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि राज्य में गणना फॉर्म वितरण का कार्य लगभग 99 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। इसके साथ ही अब तक करीब 20 प्रतिशत गणना फॉर्म का डिजिटाइजेशन भी किया जा चुका है। उन्होंने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को निर्देश दिए हैं कि तय समय सीमा के भीतर प्रतिदिन निर्धारित लक्ष्य के अनुसार डिजिटाइजेशन कार्य पूरा किया जाए, ताकि मतदाता सूची अपडेट करने की प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।
डॉ. पुरुषोत्तम ने जानकारी दी कि 8 जून से शुरू हुए विशेष अभियान के दौरान बीएलओ के फील्ड सत्यापन में अब तक 76,754 मतदाताओं को ASDD श्रेणी में चिन्हित किया गया है। उन्होंने राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि उनके बूथ लेवल एजेंट (BLA) आगामी 7 जुलाई से पहले बीएलओ के साथ मिलकर इन मतदाताओं की पहचान और सत्यापन में सहयोग करें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता अनजाने में मतदाता सूची से बाहर न हो जाए।
निर्वाचन विभाग के अनुसार, 1 जुलाई 2026 को अर्हता तिथि मानते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद 14 जुलाई 2026 को मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशित किया जाएगा। 14 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। वहीं, 14 जुलाई से 11 सितंबर 2026 के बीच सभी दावों और आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 15 सितंबर 2026 को किया जाएगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि राज्य में 11,733 मतदान केंद्रों के मुकाबले विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा 22,900 से अधिक बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी से पुनरीक्षण अभियान अधिक प्रभावी और पारदर्शी बन सकेगा। बैठक में निर्वाचन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भाजपा, कांग्रेस, बसपा, आम आदमी पार्टी और सीपीआई (एम) के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
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