
LineShine Supercomputer: चीन ने सुपरकंप्यूटिंग की दुनिया में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देश के शेन्जेन स्थित नेशनल सुपरकंप्यूटिंग सेंटर में मौजूद LineShine नाम के सुपरकंप्यूटर को हाल ही में जारी हुई TOP500 सूची में दुनिया का सबसे तेज सुपरकंप्यूटर घोषित किया गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि चीन ने इसे Nvidia, AMD या Intel जैसी अमेरिकी कंपनियों की किसी भी चिप के बिना हासिल किया है। LineShine ने अमेरिका के El Capitan सुपरकंप्यूटर को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है।
TOP500 की नई सूची के अनुसार, LineShine की प्रदर्शन क्षमता 2.198 एक्साफ्लॉप्स दर्ज की गई है। इसका मतलब है कि यह हर सेकंड 2 क्विंटिलियन से भी अधिक गणनाएं कर सकता है। यह प्रदर्शन अमेरिका के El Capitan सुपरकंप्यूटर से 20 प्रतिशत से अधिक बेहतर बताया गया है। El Capitan नवंबर 2024 से दुनिया का सबसे तेज सुपरकंप्यूटर माना जा रहा था। El Capitan, लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी में स्थापित है और अमेरिका के परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़े महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कार्यों में इस्तेमाल होता है। नई रैंकिंग में El Capitan दूसरे स्थान पर पहुंच गया है, जबकि तीसरे और चौथे स्थान पर टेनेसी और इलिनोइस स्थित अमेरिकी सुपरकंप्यूटर हैं। जर्मनी का Jupiter सुपरकंप्यूटर पांचवें स्थान पर खिसक गया है। वर्तमान में सार्वजनिक रूप से पुष्टि किए गए दुनिया के केवल पांच एक्सास्केल सुपरकंप्यूटर ही इस सूची में शामिल हैं।
LineShine की सबसे बड़ी खासियत इसका डिज़ाइन है। आज के अधिकांश सुपरकंप्यूटर भारी कंप्यूटिंग कार्यों के लिए GPU का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन LineShine पूरी तरह CPU आधारित सिस्टम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक असामान्य उपलब्धि है क्योंकि पिछले कई वर्षों से सुपरकंप्यूटिंग की दुनिया GPU-केंद्रित होती गई है। LineShine में लगभग 1.4 करोड़ कंप्यूटिंग कोर मौजूद हैं, जो 90 कैबिनेट में लगाए गए हैं। यह सिस्टम लगभग 42.2 मेगावाट बिजली की खपत करता है।
LineShine में इस्तेमाल किए गए LX2 प्रोसेसर चीन में विकसित किए गए हैं। ये प्रोसेसर Arm Holdings के Armv9 आर्किटेक्चर पर आधारित हैं। सिस्टम चीन के Linux आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम KylinOS पर चलता है। इन प्रोसेसरों में मैट्रिक्स और वेक्टर गणनाओं के लिए विशेष सर्किट लगाए गए हैं। ऐसे कार्य आमतौर पर GPU द्वारा किए जाते हैं, लेकिन LineShine इन्हें CPU के माध्यम से ही पूरा करता है। TOP500 के संस्थापकों में शामिल और सुपरकंप्यूटिंग विशेषज्ञ जैक डोंगारा ने मशीन का निरीक्षण करने के बाद कहा कि यह सिस्टम वास्तव में प्रभावशाली है और GPU पर निर्भर नहीं है।
इस उपलब्धि का एक राजनीतिक और रणनीतिक पहलू भी माना जा रहा है। अमेरिका द्वारा लगाए गए एक्सपोर्ट कंट्रोल और तकनीकी प्रतिबंधों के बाद चीन ने 2023 से TOP500 सूची में अपनी मशीनें भेजना लगभग बंद कर दिया था। ऐसे में LineShine को TOP500 में शामिल करना एक सोचा-समझा कदम माना जा रहा है। Intersect360 Research के विश्लेषक एडिसन स्नेल ने कहा कि उन्हें इस बात पर हैरानी नहीं हुई कि यह सिस्टम नंबर-1 बना, लेकिन यह जरूर आश्चर्यजनक है कि चीन ने इसे प्रतियोगिता में शामिल करने का फैसला किया।
रिपोर्टों के अनुसार, जैक डोंगारा को बताया गया कि LineShine का विकास सरकारी फंडिंग के बिना किया गया था। इसी वजह से इसके डेवलपर्स ने इसे सार्वजनिक प्रतियोगिता में शामिल करने का फैसला किया। इसके अलावा, टीम ने प्रतिष्ठित वैज्ञानिक कंप्यूटिंग सम्मान गॉर्डन बेल प्राइज के लिए भी 14 एंट्री भेजी हैं।
LineShine की सफलता ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हाल ही में क्वांटम कंप्यूटिंग और उन्नत तकनीकों में अमेरिका की बढ़त बनाए रखने के लिए नए कदम उठा चुके हैं। ऐसे माहौल में चीन का दुनिया का सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटर पेश करना तकनीकी क्षेत्र में एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल TOP500 में पहला स्थान हासिल कर लेना AI क्षेत्र में पूर्ण बढ़त का संकेत नहीं है। AI-केंद्रित वर्कलोड को मापने वाले कुछ विशेष बेंचमार्क में LineShine चौथे स्थान पर रहा है। यानी पारंपरिक हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग में इसकी ताकत स्पष्ट है, लेकिन AI आधारित कार्यों में कुछ अन्य सिस्टम इससे बेहतर प्रदर्शन करते हैं।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि दुनिया के कई सबसे शक्तिशाली AI सिस्टम TOP500 रैंकिंग में शामिल ही नहीं होते। उदाहरण के तौर पर xAI का Colossus सिस्टम और Microsoft, Amazon तथा Google के विशाल AI क्लस्टर इस सूची में भाग नहीं लेते। एक अध्ययन के अनुसार, Colossus की कुल कंप्यूटिंग क्षमता El Capitan से भी अधिक हो सकती है।
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के इंस्टीट्यूट ऑन ग्लोबल कॉन्फ्लिक्ट एंड कोऑपरेशन से जुड़े विशेषज्ञ जिमी गुडरिच का कहना है कि यदि बड़े हाइपरस्केलर अपने सिस्टम को TOP500 में शामिल करें, तो LineShine संभवतः दुनिया के सबसे तेज़ सिस्टम की सूची में शीर्ष पांच में भी न पहुंचे। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा अमेरिकी एक्सपोर्ट कंट्रोल नियमों में CPU तकनीक एक संभावित खामी है, जिसे भविष्य में वॉशिंगटन बंद करने की कोशिश कर सकता है।
LineShine की सफलता केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि चीन अमेरिकी चिप कंपनियों पर निर्भर हुए बिना भी हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के क्षेत्र में बड़ी प्रगति कर सकता है। हालांकि AI क्षमता और वास्तविक कंप्यूटिंग ताकत को लेकर बहस जारी है, लेकिन इतना तय है कि LineShine ने सुपरकंप्यूटिंग की वैश्विक दौड़ में चीन को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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