
देश में ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया में बड़े बदलाव होने वाले हैं। केंद्र सरकार के नए नियम 1 मई से लागू हो जाएंगे। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पैसे लगाकर खेले जाने वाले ऑनलाइन गेम्स पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाएगी। हालांकि, सरकार ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेमिंग को बढ़ावा देगी और उन्हें कानूनी सुरक्षा भी देगी। ये नियम 'प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट' का हिस्सा हैं, जिसे अगस्त 2025 में संसद ने पास किया था।
नए कानून के लागू होने के बाद गेमर्स और कंपनियों, दोनों को कुछ खास गाइडलाइंस का पालन करना होगा:
पैसे लगाकर खेलने पर रोक: पूरे देश में ऐसे ऑनलाइन गेम्स पर बैन लग जाएगा, जिनमें पैसा लगाया जाता है। हालांकि, बिना पैसे वाले सोशल गेम्स और ई-स्पोर्ट्स जारी रहेंगे।
सेफ्टी नियम: गेमिंग प्लेटफॉर्म्स को अब उम्र की सीमा तय करनी होगी, खेलने के समय पर लिमिट लगानी होगी और पैरेंटल कंट्रोल जैसे फीचर्स देने होंगे।
शिकायत सुलझाने का सिस्टम: हर गेमिंग प्लेटफॉर्म को अपनी एक शिकायत निवारण सेल (grievance redressal cell) बनानी होगी।
कोई गेम पैसे वाला है या नहीं, यह तय करने के लिए नए कानून में कुछ बातें साफ की गई हैं:
अगर खेलने के लिए कोई फीस देनी पड़े या पैसा जमा करना पड़े।
अगर जीतने पर पैसे या कोई और कीमती इनाम मिलने की उम्मीद हो।
अगर गेम के अंदर की चीज़ों (virtual assets) को बाहर असली पैसे में बदला जा सकता हो।
ऐसे गेम्स की सेवा शर्तों को ग्राहकों को साफ-साफ दिखाना ज़रूरी होगा।
गेमिंग से जुड़ी शिकायतों को सुलझाने के लिए सरकार ने तीन लेवल का एक सिस्टम बनाया है:
पहला लेवल: आप सीधे गेम उपलब्ध कराने वाली कंपनी की शिकायत सेल से संपर्क कर सकते हैं।
दूसरा लेवल: अगर आप कंपनी के जवाब से खुश नहीं हैं, तो 30 दिनों के अंदर 'ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया' में अपील कर सकते हैं। यह अथॉरिटी 30 दिनों में आपकी समस्या सुलझाने की कोशिश करेगी।
तीसरा लेवल: आखिरी अपील आईटी सेक्रेटरी के पास की जा सकती है, जो इस मामले में फाइनल अथॉरिटी होंगे।
ऑनलाइन गेम्स से होने वाली कमाई पर आपको इनकम टैक्स कानून के हिसाब से टैक्स देना होगा:
30% टैक्स: आयकर कानून के सेक्शन 115BBJ के तहत, एक वित्तीय वर्ष में हुई कुल कमाई पर 30% टैक्स लगेगा।
TDS: इसके अलावा, सेक्शन 194BA के तहत यूजर के गेमिंग अकाउंट में मौजूद रकम पर TDS (Tax Deducted at Source) भी कटेगा।
चेतावनी: टैक्स से जुड़े मामलों में किसी एक्सपर्ट से सलाह ज़रूर लें या आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
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