
Apple Logo Design: जब भी आप कोई आईफोन उठाते हैं, मैकबुक खोलते हैं या आईपैड ऑन करते हैं, तो आपकी नजर एक जाने-पहचाने निशान पर जरूर जाती होगी। यह निशान है दाईं तरफ से कटा हुआ एक सेब। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक ने अपनी पहचान के लिए कटे हुए सेब को ही क्यों चुना? इसका जवाब बहुत ही सीधा है और लोगो को लेकर फैलाई गई आम कहानियों से इसका कोई लेना-देना नहीं है।
एप्पल के लोगो का सफर काफी दिलचस्प रहा है। सेब के पेड़ के नीचे बैठे आइजैक न्यूटन की एक जटिल तस्वीर से शुरू होकर यह आज दुनिया भर में पहचाने जाने वाले एक सिंपल सिंबल में बदल चुका है। इसके पीछे आखिरी मिनट में लिया गया डिजाइन का फैसला, स्टीव जॉब्स का एक अजीब क्रिएटिव निर्देश और कंप्यूटर की दुनिया के एक शब्द से अनजाने में जुड़ा कनेक्शन शामिल है।
आज हम जिस कटे हुए सेब वाले निशान को जानते हैं, उससे पहले एप्पल की पहचान बिल्कुल अलग थी। साल 1976 में एप्पल कंप्यूटर की शुरुआत हुई थी। कंपनी का पहला लोगो रोनाल्ड वेन ने डिजाइन किया था, जो स्टीव जॉब्स और स्टीव वोज्नियाक के साथ कंपनी के मूल संस्थापकों में से एक थे।
वेन का पहला डिजाइन ब्लैक एंड व्हाइट था। इसमें सर आइजैक न्यूटन को एक सेब के पेड़ के नीचे बैठा हुआ दिखाया गया था और उनके सिर के ऊपर एक सेब लटक रहा था। यह आज के सिंपल लोगो से बिल्कुल अलग था। इस डिजाइन के चारों ओर एक सजावटी बॉर्डर था, जिसमें अंग्रेजी कवि विलियम वर्ड्सवर्थ का एक कोट भी लिखा था।
यह ग्राफिक ज्ञान और खोज का प्रतीक था, लेकिन इसे हर जगह छापना मुश्किल था। एक टेक स्टार्टअप ब्रांड को जैसी सिंपल अपील चाहिए होती है, वो इसमें नहीं थी। जब एप्पल अपना 'एप्पल II' कंप्यूटर लॉन्च करने की तैयारी कर रहा था, तब स्टीव जॉब्स को कंपनी के लिए एक बिल्कुल नई पहचान चाहिए थी। उनके इसी फैसले ने विज्ञापन के इतिहास में सबसे ज्यादा पहचाने जाने वाले लोगो में से एक को जन्म दिया।
सालों से सेब के इस कटे हुए हिस्से को लेकर कई तरह की कहानियां सुनाई जाती रही हैं। कुछ लोग कहते हैं कि इसका कनेक्शन बाइबिल के एडम और ईव और उस वर्जित सेब से है। वहीं कुछ लोग इसे ब्रिटिश गणितज्ञ एलन ट्यूरिंग से जोड़ते हैं। ट्यूरिंग को आधुनिक कंप्यूटर का जनक माना जाता है और 1954 में साइनाइड के ओवरडोज से उनकी मौत हो गई थी।
एक और आम कहानी यह है कि यह कट कंप्यूटर के शब्द 'बाइट' (byte) से जुड़ा है, जो डिजिटल जानकारी मापने की एक इकाई है। लेकिन इस लोगो को डिजाइन करने वाले रॉब जेनॉफ कई बार कह चुके हैं कि उन्होंने इन बातों को सोचकर यह डिजाइन नहीं बनाया था।
इसके पीछे की असली वजह बहुत ही साधारण थी। सेब में कट का निशान इसलिए बनाया गया था ताकि लोग इसे आसानी से सेब समझ सकें और इसे चेरी या कोई दूसरा गोल फल समझने की गलती न करें। इससे डिजाइन को एक रोजमर्रा वाला फील भी मिला। सेब को काटकर खाने का अहसास ऐसा है जिसे दुनिया में हर कोई समझता है। दिलचस्प बात यह है कि 'बाइट' शब्द के साथ इसका कनेक्शन डिजाइन पूरा होने के बाद ही जुड़ा। शुरुआत में ऐसा कोई इरादा नहीं था, यह बस अनजाने में हो गया।
साल 1977 में आया एप्पल का ओरिजिनल लोगो एक रंग का नहीं था। इसमें इंद्रधनुष के रंगों वाली छह आड़ी पट्टियां थीं। यह फैसला काफी हद तक एप्पल की आने वाली तकनीक को ध्यान में रखकर लिया गया था। 1977 में लॉन्च हुआ 'एप्पल II' कंप्यूटर इसलिए खास था क्योंकि यह स्क्रीन पर रंग दिखा सकता था। इसी बात को बताने के लिए रंगीन लोगो का इस्तेमाल किया गया। इससे कंपनी अपने उन विरोधियों से अलग दिखी, जिनकी ब्रांडिंग पुरानी कंप्यूटर तकनीक तक ही सीमित थी।
उस दौर में जब पर्सनल कंप्यूटर आम लोगों की पहुंच से दूर थे, तब इस इंद्रधनुषी डिजाइन ने एप्पल को एक कलात्मक और फ्रेंडली लुक दिया। जेनॉफ ने बताया कि इन रंगों के पीछे कोई छिपा हुआ संदेश नहीं था। यह बस डिजाइन को अच्छा दिखाने के लिए लिया गया एक फैसला था। दो दशकों से भी ज्यादा समय तक एप्पल की पहचान यही इंद्रधनुषी लोगो रहा।
धीरे-धीरे इंद्रधनुषी पट्टियों की जगह एक रंग वाले, पारदर्शी और मैटेलिक डिजाइन ने ले ली। यह बदलाव एप्पल के साफ-सुथरे और सुंदर प्रोडक्ट डिजाइन पर बढ़ते फोकस को दिखाता था। कई रंगों पर निर्भर रहने के बजाय, कंपनी ने अपनी पहचान बनाने के लिए लोगो के आकार का ही इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। सालों से यह लोगो प्रोडक्ट और ब्रांडिंग की जरूरत के हिसाब से ब्लैक, व्हाइट, सिल्वर और दूसरे फिनिश में नजर आता रहा है।
एप्पल का लोगो इस बात की एक बेहतरीन केस स्टडी है कि कैसे एक साधारण डिजाइन किसी फैंसी तस्वीर से ज्यादा असरदार हो सकता है। इसमें कंपनी का नाम नहीं है, यह नहीं बताता कि इसके प्रोडक्ट क्या करते हैं और न ही कोई भारी-भरकम संदेश देता है। लेकिन इस निशान को देखते ही लोग तुरंत इसे दुनिया की सबसे ताकतवर टेक कंपनियों में से एक से जोड़ लेते हैं।
इसकी सफलता ब्रांडिंग का एक बड़ा सबक भी है। किसी लोगो को याद रखने के लिए उसके पीछे किसी उलझी हुई कहानी का होना जरूरी नहीं है। सेब को चेरी से अलग दिखाने के एक साधारण तरीके के रूप में जो शुरू हुआ था, वह आज तकनीक, डिजाइन और क्रिएटिविटी का ग्लोबल आइकन बन चुका है। और शायद सबसे हैरानी की बात यह है कि जिस कटे हुए हिस्से को अक्सर ज्ञान, कंप्यूटर और एलन ट्यूरिंग से जोड़ा जाता है, उसे असल में सिर्फ एक ही वजह से बनाया गया था: ताकि हर कोई इसे सेब के रूप में पहचान सके।
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