
UPI Transactions New Rule: अगर आप रोजाना Paytm, PhonePe, Google Pay या BHIM UPI से पेमेंट करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। लोकसभा में गुरुवार, 6 अगस्त को एक नया बिल पास हुआ है, जिसके बाद UPI पेमेंट पर चार्ज लगने की चर्चा तेज हो गई है। ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब हर UPI ट्रांजैक्शन पर पैसे देने होंगे? अभी घबराने की जरूरत नहीं है। इस बिल में सीधे तौर पर कोई चार्ज लागू नहीं किया गया है, लेकिन सरकार को आने वाले समय में जरूरत पड़ने पर UPI और दूसरे डिजिटल पेमेंट्स पर चार्ज तय करने का कानूनी अधिकार जरूर मिल सकता है। आइए समझते हैं कि नया कानून क्या कहता है...
लोकसभा ने गुरुवार को Payment and Settlement Systems Act, 2007 में बदलाव से जुड़े बिल को मंजूरी दे दी है। इस बदलाव के बाद सरकार के पास यह अधिकार होगा कि वह नोटिफिकेशन जारी करके तय कर सके कि किन डिजिटल पेमेंट्स पर चार्ज रहेगा और किन पर नहीं। अब तक UPI और RuPay डेबिट कार्ड पेमेंट पर Zero MDR (Merchant Discount Rate) की व्यवस्था लागू थी। यानी इन ट्रांजैक्शन पर बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर कोई MDR चार्ज नहीं ले सकते थे। नए बिल के बाद इस व्यवस्था में बदलाव करने का रास्ता खुल गया है।
अभी पास हुए बिल में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि UPI ट्रांजैक्शन पर तुरंत चार्ज लगेगा। फिलहाल UPI से पेमेंट पहले की तरह ही जारी रहेगा। यह बिल सिर्फ सरकार को भविष्य में जरूरत पड़ने पर नियम बदलने का कानूनी अधिकार देता है।
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (Merchant Discount Rate) वह फीस होती है जो किसी डिजिटल पेमेंट पर बैंक या पेमेंट सिस्टम को मिलती है। अगर आप कार्ड से भुगतान करते हैं, तो कई मामलों में दुकानदार यह चार्ज देता है। लेकिन UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर लंबे समय से Zero MDR लागू है, इसलिए इन पर कोई ऐसा चार्ज नहीं लिया जाता।
सरकार का मानना है कि भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम बहुत तेजी से बढ़ा है। इसे लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने के लिए बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के पास एक टिकाऊ कमाई का मॉडल होना भी जरूरी है। इसी वजह से भविष्य में जरूरत के हिसाब से कुछ ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने का विकल्प रखा गया है।
अभी ऐसा बिल्कुल तय नहीं है। अगर भविष्य में सरकार कोई फैसला लेती भी है, तो वह नोटिफिकेशन जारी करके बताएगी कि कौन-से डिजिटल पेमेंट मुफ्त रहेंगे, किन ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाया जाएगा, चार्ज कौन देगा और चार्ज कितना होगा। यानी फिलहाल किसी भी तरह का शुल्क लागू नहीं हुआ है।
भारत में RTGS और NEFT जैसी कई डिजिटल बैंकिंग सेवाओं पर पहले से सर्विस चार्ज लिया जाता है। लेकिन UPI को अब तक इस तरह के चार्ज से बाहर रखा गया था। यही वजह है कि नया बिल चर्चा का विषय बना हुआ है।
विदेशी निवेशकों के लिए आसानी
सरकार चाहती है कि बाहर के बड़े फंड मैनेजर और कंपनियां अपना काम भारत से चलाएं। इसके लिए टैक्स के नियमों को काफी आसान बना दिया गया है, जिससे भारत में नई नौकरियां और बड़ा निवेश आ सके।
रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर के निवेशकों को राहत
बिजनेस ट्रस्ट (REITs और InvITs) में पैसा लगाने वाले आम निवेशकों के डिविडेंड (लाभांश) को टैक्स-फ्री रखा गया है, ताकि छोटे निवेशकों को नुकसान न हो।
डेटा सेंटर्स के लिए आसान नियम
भारत में बड़े 'AI डेटा शहर' बनाने और विदेशी क्लाउड कंपनियों को आकर्षित करने के लिए डेटा सेंटर से जुड़े पुराने और कठिन अप्रूवल नियमों को खत्म कर दिया गया है। अब इन्हें किराए (Lease) पर चलाना भी आसान होगा।
हीरा कारोबार को बढ़ावा
मुंबई और सूरत के स्पेशल जोन में विदेशी हीरा कारोबारियों और माइनर्स को अगले 15 सालों तक टैक्स में छूट दी गई है, ताकि भारत डायमंड ट्रेड का बड़ा हब बन सके।
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग
देश में मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट बनाने वाली कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए विदेशी सप्लायर्स को टैक्स छूट का दायरा बढ़ाया गया है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी फंड मैनेजर्स से जुड़े इन बदलावों से ग्लोबल कंपनियों को भारत में आकर अपना काम शिफ्ट करने में आसानी होगी। वहीं, नांगिया ग्लोबल के पार्टनर अभीत सचदेवा का मानना है कि इन सुधारों से भारत का मार्केट ग्लोबल निवेशकों के लिए और ज्यादा आकर्षक बनेगा।
क्या अब Paytm या PhonePe से पैसे भेजने पर तुरंत चार्ज लगना शुरू हो गया है?
नहीं, अभी तुरंत कोई चार्ज नहीं लगा है। लोकसभा में केवल सरकार को यह अधिकार देने वाला कानून पास हुआ है कि वह भविष्य में जरूरत पड़ने पर नियम तय कर सकती है।
क्या सभी UPI ट्रांजैक्शन पर पैसे कटेंगे?
बिल्कुल नहीं। अगर सरकार भविष्य में कोई चार्ज लाती भी है, तो वह चुनिंदा या मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर हो सकता है। कौन सी सर्विस फ्री रहेगी, इसकी जानकारी सरकार बाद में नोटिफिकेशन के जरिए देगी।
MDR क्या होता है?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह फीस है जो मर्चेंट (दुकानदार) डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के बदले बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देते हैं। अब तक यूपीआई पूरी तरह जीरो-MDR यानी फ्री था।
यह नया बिल संसद में किस तारीख को पास हुआ?
यह बिल लोकसभा में 6 अगस्त को बिना चर्चा के (विपक्ष के हंगके बीच) वॉयस वोट से पास हुआ।
इस बिल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस बिल का मुख्य उद्देश्य देश में डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना, बैंकों को सपोर्ट देना और भारत में ग्लोबल कैपिटल, मैन्युफैक्चरिंग और विदेशी निवेश को बढ़ावा देना है।
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