
नई दिल्ली। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई ने हाल ही में ताजमहल के अंडरग्राउंड और बंद कमरों को लेकर एक न्यूज लेटर जारी किया था, वह अब वायरल हो रहा है। हालांकि, तीन दिन पहले ही इन कमरों को खोलने के मामले में कोर्ट में सुनवाई हुई है। माना जा रहा है कि सुनवाई के बाद एएसआई का यह न्यूज लेटर वायरल हुआ है।
एएसआई ने बीते 9 मई को यह न्यूज लेटर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर पोस्ट किया था। हालांकि, हाईकोर्ट में जिस याचिका पर सुनवाई हो रही थी, उसकी चर्चा बीते 9 मई तक भी थी, जब एएसआई ने न्यूज लेटर जारी किया। बहरहाल, कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी है। इस न्यूज लेटर में देशभर में एएसआई के संरक्षण में किए जा रहे या किए मरम्मत कार्य की जानकारी दी गई है।
इस याचिका में ताजमहल के उन 22 कमरों को खोलने की मांग की गई थी, जिसके बारे में अक्सर कहा जाता है कि इन्हें कुछ वजहों से बंद किया गया है और इनमें हिंदू देवी-देवताओं की मूर्ति रखी गई हैं। याचिका दायर करने वाले का मानना था कि इन कमरों को खोला जाना चाहिए, जिससे लोगों को इसके बारे में ज्यादा से ज्यादा सच्चाई पता चल सके।
कमरे, सीढ़ी और दीवारों की मरम्मत हो रही
इस न्यूज लेटर में ताजमहल के उन कमरों के फोटो जारी करते हुए उनके बारे में बात की गई है। बता दें कि ताजमहल उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में यमुना नदी के किनारे स्थित है। यह विश्व धरोहर स्थल में शामिल है। एएसआई की ओर से जारी न्यूज लेटर के माध्यम से इसके रखरखाव और वहां चल रहे काम के बारे में बात की गई है। इस न्यूज लेटर में चार फोटो जारी किए गए हैं। दो फोटो काम से पहले और दो काम के बाद के। इस न्यूज लेटर पोस्ट में कैप्शन दिया गया है, दीवारों और सीढ़ियों आदि की मरम्मत की जा रही। इसमें पुराने चूने और प्लास्टर को हटा दिया गया है। इसके अलावा, दो फोटो ताजमहल के बाहरी क्षेत्र में किए जा रहे मरम्मत कार्य की हैं। एएसआई ने बताया कि यह जनवरी 2022 से जारी था।
कमरों और दरवाजों की जांच की मांग
बता दें कि आगरा में भाजपा के युवा मीडिया प्रभारी रजनीश सिंह ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के समक्ष एक याचिका दायर की थी। इसमें एएसआई को ताजमहल के 22 बंद दरवाजों की जांच करने का निर्देश देने की मांग की गई थी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां वहां हैं या नहीं। उन्होंने दावा किया कि ताजमहल के बारे में झूठा इतिहास पढ़ाया जा रहा है और इसलिए सच्चाई का पता लगाने के लिए दरवाजे खोले जाने चाहिए। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा था कि इस तरह की बहसें ड्रॉइंग रूम के लिए होती हैं न कि कोर्ट ऑफ लॉ के लिए।
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