
नई दिल्ली. कोरोना वायरस को लेकर रिसर्च का काम जारी है। इस बीच सीएसआईआर ने दावा किया है कि हवा में कोरोना वायरस को पकड़ना एक कमरे में कोविड-पॉजिटिव व्यक्तियों की संख्या पर निर्भर करता है, क्योंकि कोविड के वायरस बंद जगहों पर दूर तक यात्रा कर सकते हैं।
10 मीटर तक यात्रा कर सकता है
कोरोना वायरस को लेकर हाल ही में बताया गया था कि वायरस एरोसोल पर सवार होकर 10 मीटर तक यात्रा कर सकता है। वायरस संक्रमित व्यक्ति के मुंह या नाक से निकलती हैं। इसके सबूत सबसे पहले भारत में सीएसआईआर के वैज्ञानिकों ने इकट्ठा किया था।
कैसे की गई थी स्टडी
शोधकर्ताओं ने हैदराबाद और मोहाली के अस्पतालों में कई कोविड और गैर-कोविड और आईसीयू और नॉन-आईसीयू से इकट्ठा किए गए हवा के सैंपल का विश्लेषण किया। इसके बाद कोवि -19 पॉजिटिव व्यक्तियों के साथ बंद कमरे में इसका प्रयोग किया।
स्टडी में कहा गया, रिजल्ट बताते हैं कि SARS-CoV-2 का हवा के जरिए फैलना कमरे में कोविड के मरीजों की संख्या, उनका सिम्टोमेटिक स्टेटस पर निर्भर करता है। स्टडी रिपोर्ट में कहा गया कि नेचुरल एनवायरमेंट कंडीशन में वायरस दूर तक नहीं फैलता है।
संक्रमण के खतरे को कैसे कम कर सकते हैं?
एक बार फिर इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि अगर वेंटिलेशन में सुधार किया जाए तो कोविड-19 संक्रमण के इनडोर ट्रांसमिशन को कम किया जा सकता है। केवल खिड़कियां और दरवाजे खोलने से संक्रमण का खतरा कम हो सकता है। डॉक्टर शेखर सी मंडे ने कहा कि बेहतर वेंटिलेशन सिर्फ कोविड-19 ही नहीं, बल्कि दूसरे हवा में फैलने वाले संक्रमणों के जोखिम को कम कर सकता है।
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