
नौकरी पैसे के लिए होती है। जीने के लिए पैसा ज़रूरी है। ज़्यादातर लोग नौकरी चुनते समय सबसे पहले सैलरी देखते हैं। बाकी चीज़ें बाद में आती हैं। लेकिन, आजकल ऐसा नहीं है। लोग अपने वर्क-लाइफ बैलेंस पर भी ध्यान देने लगे हैं। लोग समझ रहे हैं कि नौकरी के अलावा अपने परिवार और अपनी ख़ुशी के लिए भी समय निकालना ज़रूरी है। देव कटारिया की लिंक्डइन पोस्ट इसी बारे में है, जो अब चर्चा में है।
कटारिया लिखते हैं कि उनके एक करीबी दोस्त ने 23 लाख रुपये सालाना की नौकरी छोड़कर 18 लाख रुपये सालाना वाली नौकरी चुनी। पहले मुझे लगा कि मेरे दोस्त ने बहुत बड़ी गलती की है। लेकिन, जब दोस्त ने सारी बात समझाई, तब मुझे असलियत पता चली।
दोस्त ने जिस कंपनी को चुना, वह हाइब्रिड वर्किंग मॉडल देती है। हफ़्ते में पाँच दिन काम करना होता है। साथ ही, वर्क-लाइफ बैलेंस के लिए भी जानी जाती है। दूसरी कंपनी में छह दिन काम करना होता था और रिमोट वर्क की सुविधा नहीं थी। इसलिए दोस्त ने कम सैलरी वाली नौकरी चुनी।
दोस्त की बात सुनकर मुझे एहसास हुआ कि लोगों की प्राथमिकताएँ बदल रही हैं। लोग नौकरी के अलावा खुद के लिए और अपने परिवार के लिए भी समय निकालना चाहते हैं। दोस्त ने बताया कि पिछली नौकरी में ज़्यादा काम के घंटों के कारण उसकी तबियत खराब हो गई थी। अब वह अपने परिवार, दोस्तों और खुद के लिए समय निकालना चाहता है।
कटारिया का मानना है कि आज के कॉर्पोरेट जगत में सैलरी के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली को भी महत्व देना चाहिए। कई लोगों ने कटारिया और उनके दोस्त के विचारों का समर्थन किया है।
वायरल न्यूज(Viral News Updates): Read latest trending news in India and across the world. Get updated with Viral news in Hindi at Asianet Hindi News