
विशाखापत्तनम। नवरात्रि और दुर्गा पूजा के बीच देशभर में मंदिर सजाए जा रहे हैं। मां के अलग-अलग स्वरूप की अलग-अलग पूजा हो रही है। मां का श्रंगार हो रहा है। इस बीच आंध्र प्रदेश में करीब 135 साल पुराने वासवी कन्यका परमेश्वरी मंदिर जबरदस्त सुर्खियों में है। यहां मां के श्रंगार में करीब आठ करोड़ खर्च हुए, जिसमें 6 करोड़ रुपए नगद, 6 किलो सोना और तीन किलो चांदी का इस्तेमाल हुआ।
रकम इतनी अधिक है कि उन्हें इस मंदिर की दीवारों और फर्श पर भी चिपकाना पड़ा। मंदिर की सजावट और मां के श्रंगार के लिए जो नोट इस्तेमाल हुए उनमें 500 रुपए, 200 रुपए 100 रुपए, 50 रुपए, 20 रुपए और दस रुपए के नोट शामिल हैं। श्रंगार के बाद इस मंदिर की फोटो सोशल मीडिया पर डाल दी गई, जो वायरल हो रही है। मंदिर की सजावट और मां के श्रंगार को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं।
20 साल से चली आ रही परंपरा, कैश और सोने-चांदी से होती है सजावट
मंदिर आने वाले भक्तों के लिए सजावट अनोखी है और शायद पहली बार भी, क्योंकि एक साथ इतने सारे नोट उन्होंने अपने जीवन में शायद कभी नहीं देखे होंगे। वो भी किसी मंदिर में। हालांकि, यह पहली बार नहीं है, जब मंदिर को इस भव्य तरीके से इतने सारे नोट से चिपकाया गया है। मंदिर को इस तरह करेंसी और जेवरात से सजाने की परंपरा करीब 20 साल से चली आ रही है। हर साल यहां नगद रकम और सोने-चांदी से मंदिर की सजावट होती है, इसलिए जो लोग इसे जानते हैं, उनके लिए इसमें आश्चर्य जैसी कोई बात नहीं है।
पिछले साल 5 करोड़ 16 लाख की हुई थी सजावट
हालांकि, पिछले साल इस मंदिर की सजावट में 5 करोड़ 16 लाख रुपए खर्च हुए थे। तब सजावट में दस रुपए के नोट से लेकर दो हजार रुपए तक के नोट इस्तेमाल किए गए थे। यहां नवरात्रि के अवसर पर दशहरा मेले का आयोजन होता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और मां के दर्शन के साथ-साथ मंदिर की भव्य सजावट भी देखते हैं। ऐसी मान्यता है कि देवी मां नवरात्रि उस्तावलु के अवसर पर जो लोग पूरी श्रद्धा से उनकी पूजा करते हैं और चढ़ावा चढ़ाते हैं, उनके सारे कष्टों को दूर कर हर कार्य में मदद करती हैं।
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