
ट्रेंडिंग डेस्क। Youngest Mother of History: मां बनना किसी भी महिला के सबसे सुखद पल होता है। हालांकि, यह सुख तब ही अनुभव होता है, जब महिला हर तरह से तैयार हो। चाहे वह मानसिक हो या फिर शारिरिक। यह इसलिए भी जरूरी है कि महिला उस जिम्मेदारी को संभालने लायक पूरी तरह तैयार हो चुकी होगी। इसके सामाजिक के साथ-साथ वैज्ञानिक कारण भी हैं और शायद इसी लिए हर देश में महिलाओं के मां बनने की एक उम्र भी निर्धारित कर दी गई है।
वैसे आज हम जिसके बारे में बताने जा रहे हैं, वो एक ऐसी लड़की की रियल स्टोरी जो बेहद कम उम्र में मां बन गई और यही किसी भी महिला के लिए दर्दनाक पहलू होता है, जब लड़कियों को प्रताड़ना झेलते हुए इन सब चीजों के लिए मजबूर किया जाता है, फिर चाहे वह शारिरिक हो फिर मानसिक। हम बात कर रहे हैं लीना मेडिना की। पेरू की रहने वाली इस लड़की की कहानी हैरान करने वाली है, उसके साथ जो भी हुआ वह दुखद था। तब उसके साथ क्या हुआ और क्यों हुआ यह सटीक पता नहीं लग सका, क्योंकि सबूत किसी के खिलाफ नहीं मिले।
पांच साल की बच्ची का मां बनना डॉक्टर्स को भी हैरान करने के लिए काफी था
यह मामला आज से करीब 82 साल पहले का है। जी हां, 1939 में यह घटना काफी सुर्खियों में रही और लंबे समय तक बहस का हिस्सा रही। लीना मेडिना नाम की लड़की का जन्म पेरू में 27 सितंबर 1933 को हुआ था। यह लड़की जब सिर्फ पांच साल की छोटी बच्ची थी, तब मां बन गई। जी हां, आपने सही पढ़ा। लीना सिर्फ पांच साल की उम्र में एक बच्चे की मां बनी और उसने जिस बच्चे को जन्म दिया वह बिल्कुल स्वस्थ्य था। ऐसे में यह केस डॉक्टर्स और तमाम दूसरे एक्सपर्ट के लिए भी चौंकाने वाला था। डॉक्टरों का सोचना था कि ऐसी उम्र में जब बच्ची का शरीर पूरी तरह विकसित भी नहीं हुआ, तब वो संतान को कैसे जन्म दे सकती है, वो भी बिल्कुल स्वस्थ्य और नन्हें शिशु को।
डॉक्टर गर्भ में पल रहे बच्चे को पेट का ट्यूमर समझते रहे
दरअसल, लीना को प्रीकॉशियस प्यूबर्टी नाम की दुर्लभ बीमारी थी। डॉक्टरों की मानें तो इस बीमारी की वजह से लीना को कम उम्र में ही पीरियड आने लगे थे। डॉक्टर्स के अनुसार, लीना को चार साल की उम्र में ही यानी 1938 में पीरियड आना शुरू हो चुके थे। बात 1939 के शुरुआती महीनों की थी, जब लीना का पेट उभरने लगा। किसी को कुछ समझ नहीं आया कि ऐसा क्यों हो रहा है। परिजनों ने डॉक्टरों को दिखाया, तो उन्होंने इसे ट्यूमर समझा। यह लगातार बढ़ने लगा, तो डॉक्टरों ने इसे घोषित कर दिया कि यह ट्यूमर ही है और पूर्ण रूप से विकसित हो गया है। मगर यह किसी को अंदाजा नहीं था कि लीना गर्भवती है। मार्च 1939 में लीना जब सातवे महीने की गर्भवती थी, तब डॉक्टरों ने उसके पेट की जांच की तो रिजल्ट जानने के बाद वे शॉक्ड रह गए। दरअसल अब तक डॉक्टरों को समझ में आ चुका था कि लीना के पेट में यह ट्यूमर नहीं बल्कि, उसके गर्भ में बच्चा पल रहा है।
40 साल की उम्र में बेटे की मौत हो गई
इसके बाद डॉक्टरों ने लीना के बच्चे को ऑपरेशन करके बाहर निकालने का फैसला किया, क्योंकि तब लीना की उम्र महज पांच साल थी और उसका शरीर लेबर पेन यानी प्रसव पीड़ा सहन करने की स्थिति में नहीं था। 14 मई 1939 को ऑपरेशन के जरिए लीना ने स्वस्थ्य बच्चे को जन्म दिया। बच्चे का नाम गेराडो रखा गया। वैसे, ये कभी पता नहीं लग सका कि इस बच्चे का बाप कौन था, क्योंकि पुलिस सबूत नहीं जुटा पाई। पुलिस ने शुरुआत में लीना के पिता को शक के आधार पर गिरफ्तार जरूर किया, मगर सबूत नहीं मिलने पर छोड़ना पड़ा। हालांकि, बच्चे की 40 साल की उम्र में मौत हो गई। 1979 में जब गेरोडो की मौत हुई, तब वह हड्डियों से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। लीना की मौत भी 89 वर्ष की अवस्था में हो गई थी।
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