
जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे को एक हमलावर ने चुनाव प्रचार के दौरान शुक्रवार, 8 जुलाई को गोली मार दी। हालांकि, काफी जद्दोजहद के बार भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। जापान के अधिकारियों ने बताया कि जब उन्हें एयरलिफ्ट किया गया, तब ही शिंजो आबे के दिल की धड़कन बंद थी। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, मगर कुछ देर बात डॉक्टरों ने उनकी मौत की पुष्टि की। उनका जन्म 21 सितंबर 1954 को जापान की राजधानी टोक्यो के शिंजुकु शहर में हुआ था।
जापानी अफसरों ने 41 साल के उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है, जिसने उन पर गोली चलाई। इस शख्स का नाम तेत्सुया यामागामी है और वह नारा शहर का रहने वाला है। बता दें कि जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे पहले से घातक बीमारी अल्सरेटिव कोलाइटिस से जूझ रहे हैं। उन्होंने इस बीमारी के कारण लगातार खराब सेहत को देखते हुए 28 अगस्त 2020 को जापान के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
कौन हैं जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे?
शिंजो आबे का जन्म 21 सितंबर, 1954 को राजधानी टोक्यो में हुआ था। वे 26 सितंबर, 2006 को 52 साल की उम्र में जापान के प्रधानमंत्री बने। 1941 में फुमिमारो कोनो के बाद वो जापान के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री रहे। 68 साल के शिंजो आबे जापान के सबसे लंबे समय तक PM भी रहे। वे 2006-07 और 2012 से 2020 तक, 2 टर्म में करीब 9 साल तक जापान के प्रधानमंत्री रहे। इससे पहले सबसे ज्यादा वक्त तक पीएम रहने का रिकॉर्ड उनके चाचा इसाकु सैतो के नाम था।
बीमारी के चलते छोड़ा था पीएम पद
शिंजो आबे ने 2020 में प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। दरअसल, उनकी तबीयत ठीक नहीं रहती थी, जिसके चलते उन्होंने ऐसा किया था। शिंजो आबे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुत अच्छे मित्र थे। शिंजो आबे जब गुजरात और वाराणसी की यात्रा पर आए थे तब उन्होंने मोदी के साथ गंगा घाट पर आरती की थी। भारत सरकार ने 25 जनवरी, 2021 को उन्हें पद्म विभूषण से नवाजा था। 8 जुलाई, 2022 को नारा शहर में गोली मार उनकी हत्या कर दी गई।
यही नहीं, यह बीमारी आबे को बीते कई साल से परेशान कर रही है। इसी बीमारी की वजह से वर्ष 2007 में भी प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने पद से इस्तीफा दिया था। मगर हालात सुधरने के बाद दोबारा प्रधानमंत्री बने। आइए जानते हैं क्या है इस बीमारी के लक्षण और उपाय तथा कितनी गंभीर है यह अल्सरेटिव कोलाइटिस नाम की बीमारी।
बीमारी का नाम क्या है
दरअसल, अल्सरेटिव कोलाइटिस को सूजन आंत रोग के तौर पर क्लासीफाई किया गया है। पाचन तंत्र में मौजूद बैक्टेरिया के खिलाफ बॉडी का इम्युन सिस्टम ज्यादा एक्टिव हो जाता है। इससे बड़ी आंत की अंदरूनी परत में सूजन आ जाती है और इससे अल्सर बनता है। अल्सरेटिव कोलाइटिस को ही खूनी दस्त भी कहते हैं।
किसे और क्यों होती है यह बीमारी
यह बीमारी क्यों और कैसे होती है, इसका स्पष्ट कारण अभी सामने नहीं आया है, मगर डॉक्टरों का मानना है कि यह ज्यादा तनाव यानी स्ट्रेस की वजह से भी होती है। इसके अलावा, कुछ रिपोर्ट्स में यह बीमारी ऑटो इम्युन की गड़बड़ी के कारण भी होती है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह घातक बीमारी अनुवांशिक भी हो सकती है।
कैसे पता चलेगा कि खूनी दस्त हो गया है
इस बीमारी के शुरुआती लक्षण में मल में खून आने लगता है। पेट में दर्द रहता है और आवाज भी आती रहती है पेट से। हमेशा दस्त आते रहते हैं। बुखार रहता है। भूख नहीं लगती और उल्टी जैसा महसूस होता रहता है। शरीर का वजन लगातार कम होता जाता है। जोड़ों में दर्द रहता है और अक्सर सूजन बनी रहती है। मुंह में छाले होते हैं और त्वचा संबंधी बीमारियां भी होती रहती हैं।
बचाव और इलाज क्या है
बचाव की बात करें तो डॉक्टरों का स्पष्ट जवाब है कि इस बीमारी का अब तक सटीक इलाज नहीं मिला है और न ही इससे बचा सकता है। हां, साइड इफेक्ट्स पर काबू जरूर पा सकते हैं। इससे पीड़ित लोगों को खूब पानी पीना चाहिए। अलग-अलग तरह से मल्टीविटामिन लेते रहें। चूंकि, बीमारी पेट से जुड़ी है, इसलिए डॉक्टरों की सलाह से ही डाइट चार्ट बनाएं।
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