
Justice Delivered To Harassed Girls: भारत में लड़कियों की सुरक्षा के लिए जितने कानून बनाए गए हैं। बावजूद इसके छेड़छाड़ सहित महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कमा नहीं आ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि अपनी बदनामी की वजह से ज्यादातर लड़कियां शिकायत दर्ज नहीं कराती हैं। ऐसे मामलों में घरवाले बी लड़कियों को रिपोर्ट करने से मना करते हैं। उन्हें डर होता है कि मामला आग बढ़ेगा तो लड़की की ही बदनामी होगी । हालांकि अब एनजीओ और सोशल वर्कर भी ऐसे मामलों के खिलाफ लड़कियों को मदद देते हैं।
रैडिट अकाउंट r/CriticalThinkingIndia पर शेयर किए गए एक वीडियो में दो लड़कियों का पीछा करते हुए दो पुरुष दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो सबूत के तौर पर रिकॉर्ड किया गया था, क्योंकि लड़कियों ने स्वीकार किया था कि उन्हें इन पुरुषों से गंभीर धमकियाँ और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ रहा था, जिसमें पुलिस के पास जाने पर जान से मारने की धमकी भी शामिल थी। आखिरकार "जग्गा" नाम के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने इन पुरुषों की पिटाई कर दी। सच कहूँ तो, मुझे लगता है कि ऐसे लोगों पर कड़ी और तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए, खासकर यह देखते हुए कि भारतीय न्यायपालिका ऐसे मामलों में कितनी धीमी और अविश्वसनीय हो सकती है।
फिर भी, इन दोनों को भी आदर्श रूप से सलाखों के पीछे डाल देना चाहिए, हालांकि मुझे आश्चर्य है कि क्या ऐसा होगा। आप सभी इस स्थिति के बारे में क्या सोचते हैं?लड़
भारत में महिलाओ के खिलाफ अपराध जैसे दुष्कर्म, छेड़छाड़, घरेलू हिंसा, स्त्री मृत्यु, और ट्रैफिकिंग गंभीर समस्याएं हैं। इनके खिलाफ कई कानून उपलब्ध हैं, जैसे कि पॉक्सो एक्ट, दहेज विरोधी कानून, घरेलू हिंसा अधिनियम। फिर भी महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सिर्फ कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। समाज में महिलाओं के प्रति सोच बदलना, अपराधियों के खिलाफ निडर होकर आवाज उठाना, सामाजिक समर्थन बढ़ाना और सत्ताधारियों को इस मुद्दे पर संवेदनशील बनाना ज़रूरी है। पीड़ितों के संरक्षण के लिए हेल्पलाइंस और एनजीओ के प्रयास महत्वपूर्ण हैं।
लड़कियों से छेड़छाड़ की तत्काल मिली ऐसी सजा, देखें वीडियो
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