
ट्रेंडिंग डेस्क। अगर ये कहा जाए कि अगले कुछ साल में इंसान पृथ्वी से शिफ्ट चंद्रमा और मंगल पर रहने के लिए चले जाएंगे, तो शायद गलत नहीं होगा। इस बारे में इन दोनों ग्रहों पर जीवन के संकेत खोजे जा रहे हैं और इंसानों की बसाहट पर काम शुरू किया जा रहा है। फिलहाल, वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है, जिसके तहत मंगल ग्रह पर इंसानों को बसाने के रास्ते खुलते दिख रहे हैं।
दरअसल, मार्स यानी मंगल ग्रह को इस योग्य बनाने की कवायद की जा रही है, जिससे वहां इंसानों की बसाहट हो सके। इसी क्रम में कई शोध पहले से चल रहे हैं। वहीं, अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के पर्सवेरेंस रोवर पर वैज्ञानिकों ने टोस्टर की साइज का यंत्र खोज निकाला है, जो मंगल ग्रह पर आक्सीजन बना रहा है। यह यंत्र मंगल के पतले कॉर्बन डाइ ऑक्साइड वाले वातावरण को आक्सीजन में बदल देगा।
वैज्ञानिकों का दावा है कि यह यंत्र एक घंटे में 6 ग्राम आक्सीजन बनाता है, जो कि एक पेड़ के बराबर है। वैज्ञानिकों ने इस यंत्र को मौक्सी नाम दिया है। यह उसका शॉट फॉर्म है, जबकि पूर नाम मार्स आक्सीजन इन सितु रिसोर्स यूटिलाइजेशन एक्सपेरिमेंट है। यह यंत्र मंगल ग्रह पर हर समय और हर मौसम में काम करता है। यही नहीं, चौंकाने वाली बात यह है कि यह यंत्र पिछले साल फरवरी से ही मंगल पर ऑक्सीजन बना रहा है, मगर वैज्ञानिकों ने इसका खुलासा अब किया है।
इंसानों की बसाहट से पहले कुछ ऐसे यंत्र और भेजे जाएंगे
यह तथ्य साइंस एडंवास मैग्जीन में पब्लिश हुई है। वैज्ञानिकों को लग रहा है कि मौक्सी जब एक पेड़ की दर से रोज ऑक्सीजन बना रहा है, तो इंसानों की बसाहट से पहले मंगल ग्रह पर ऐसे ही कुछ यंत्र पहले भेजे जाएं और साथ में एस्ट्रनॉट्स भी। अगर वे वहां के माहौल में रहने के अनुकूल हैं, तो इसके बाद इंसानों को वहां रहने के लिए चुना जाएगा। वैज्ञानिकों का यह भी अनुमान है कि इस यंत्र के जरिए मंगल ग्रह पर जाने वाले रॉकेट को भी ईंधन देने के लिए भी आक्सीजन बनाई जा सकती है।
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