
Tech Recruiter ChoosesTier3 Ccandidate: भारत में आम धारणा है कि आईआईटी से पास आउट छात्र किसी टियर 3 कॉलेज से पढ़े छात्र से लाख गुना बेहतर होगा। कंपनियां भी बिना किसी संकोच के ऐसे कैंडीडेट को प्राथमिकता देती हैं। इसमें ज्यादा लॉजिक भी नहीं लगाया जाता है। लेकिन हाल ही में एक टेक रिक्रूटर ने चौंकाने वाला फैसला करके मिसाल कायम की है।
लिंक्डइन पर एक पोस्ट में, एक टेक रिक्रूटर ने बताया कि उसने आईआईटी दिल्ली के एक उम्मीदवार को चुनने की बजाय टियर 3 कॉलेज के कैंडीडेट को क्यों चुना। उसने बताया कि उसे जेईई के अंकों से कोई फर्क नहीं पड़ता और वह यह जानने के लिए ज्यादा इंटरेस्टेड है कि उन्होंने क्या "बनाया, क्या तोड़ा या क्या सुधारा"।
“आईआईटी ग्रेजुएट की लीटकोड रेटिंग 1800+ थी। वह यह नहीं बता पा रहा था कि उसका कॉलेज प्रोजेक्ट 100 concurrent users को कैसे संभालता है। टियर 3 ग्रेजुएट ने 50 हज़ार लेनदेन प्रोसेस करने वाला एक पेमेंट सिस्टम बनाया। उसे पॉलो किया। उसे आगे बढ़ाया। उसे ब्रेक किया, फिल उसे ठीक किया” । टेक रिक्रूटर ने बताया कि टियर 3 के एक उम्मीदवार को उसके काम की बेहतर समझ थी।
रिक्रूटर ने बताया कि उसे यह जानने में ज़्यादा दिलचस्पी है कि उम्मीदवार क्या कर सकता है, न कि उसकी रैंक। "मुझे इस बात की परवाह है कि आपने क्या नया क्या बनाया, किस ट्रेडीशन को तोड़ा और और उसमें क्या बेहतर किया। कंपनियां उन एल्गोरिदम के लिए पेमेंट नहीं करतीं जिन्हें आप हल कर सकते हैं। वे उन प्रोसेस के लिए भुगतान करती हैं जिन्हें आप बना सकते हैं।"
इस पोस्ट पर यूजर्स ने मिला जुला रिएक्शन दिया है। जिनमें से कई ने रिक्रूटर पर एक उम्मीदवार को नीचा दिखाने और दूसरे की तारीफ़ सिर्फ़ व्यूज़ पाने के लिए करने का आरोप लगाया। एक शख्स ने लिखा, "मुझे 1800 LC सवालों को हल करने का तर्क समझ नहीं आता। बहुत से लोग अपनी काफ़ी एनर्जी सिर्फ़ इसलिए बर्बाद कर देते हैं क्योंकि appointment committee कोई असरदार रिक्रूटमेंट स्ट्रेटजी नहीं बना पाती।
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