
काबुल. अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद तालिबान का आतंक जारी था, इस बीच ISIS-K ने मौत का तांडव शुरू कर दिया। काबुल एयरपोर्ट पर दो आत्मघाती हमले किए और 170 लोगों को मौत की नींद सुला दिया। इसमें करीब 12 अमेरिकी सैनिक भी थे। इन्हीं में से एक सैनिक का नाम मैक्सटन विलियम सोविएक था। शायद उन्हें उस खतरे का अंदेशा था, जिससे वह लगातार लड़ रहे थे। शायद उन्हें अंदेशा था कि आने वाले वक्त में उनके साथ कुछ भी हो सकता है। यहां तक की उनकी मौत हो सकती है।
10 जून को इंस्टाग्राम पर लिखा- मैं उन्हें मारूंगा या वे मुझे
ओहियो के नेवी कॉर्प्समैन मैक्सटन विलियम सोविएक उस आत्मघाती हमले में मारे गए, जो काबुल एयरपोर्ट पर हुआ। 10 जून को उन्होंने अंतिम इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, मैं उन्हें मारूगा या वे मुझे मार देंगे। इस दौरान उन्होंने अपने साथियों की तस्वीरें भी शेयर की थीं। सोविएक काबुल में ISIS-K के आत्मघाती हमले में मारे गए 13 अमेरिकी सैनिकों में से एक थे।
सोविएक की बहन ने रोते हुए कहा, वह बच्चे जैसा था। हम वहां बच्चों को मरने के लिए भेज रहे हैं। नेवी कॉर्प्समैन अक्सर मरीन के साथ काम करते हैं, जिनके पास खुद के मेडिक्स नहीं होते हैं।
"मेरा भाई तो लोगों की मदद के लिए वहां पर था"
सोविएक की बहन मर्लिन ने इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा कि उनका भाई लोगों की मदद करने के लिए वहां था। मेरा परिवार खत्म हो गया। अब हम कभी भी पहले जैसे नहीं रहेंगे। वह सिर्फ एक बच्चा था। हम वहां बच्चों को मरने के लिए भेज रहे हैं।
सोविएक उन 6000 अमेरिकी सैनिकों में से थे, जो अब काबुल से अमेरिकियों और अफगान शरणार्थियों को निकालने के लिए काम कर रहे हैं। हमले में मारे गए 4 नौसैनिकों के नाम राइली मैककोलम, डेविड ली एस्पिनोजा, करीम निकोई और जेरेड शमित्ज हैं।
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