शनि की तीसरी दृष्टि के कारण लाइफ में बनी रहती हैं परेशानियां, करें ये आसान उपाय

Published : Mar 15, 2021, 01:24 PM IST
शनि की तीसरी दृष्टि के कारण लाइफ में बनी रहती हैं परेशानियां, करें ये आसान उपाय

सार

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, प्रत्येक ग्रह कुंडली में अपने से सातवें घर में मौजूद ग्रह को पूर्ण दृष्टि से देखता है। आज हम बात करते हैं शनि की दृष्टि की। शनि की तीन दृष्टियों 3,7,10 में से तीसरी दृष्टि को सबसे शक्तिशाली और खतरनाक माना गया है।

उज्जैन. किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में शनि की तीसरी दृष्टि जिस भी भाव पर होती है, व्यक्ति को उस भाव से संबंधित परिणाम प्राप्त करने में कड़ा संघर्ष और मेहनत करना पड़ती है। ऐसे व्यक्ति को अपनी 32 वर्ष की आयु तक तो तीसरी दृष्टि वाले भाव से संबंधित फल पाने के लिए एड़ी-चोटी तक का जोर लगाना पड़ता है। 32 की आयु के बाद से संघर्ष कुछ कम जरूर होता है, लेकिन मेहनत फिर भी जबर्दस्त करना पड़ती है।

शनि की तीसरी दृष्टि के प्रभाव
1.
किसी जन्म कुंडली में यदि शनि पहले भाव में बैठा है तो उसकी दृष्टि तीसरे, सातवें और दसवें घर पर होती है। तीसरा घर भाई-बहन, परिजनों का होता है। सातवां घर वैवाहिक जीवन का और दसवां घर आजीविका का होता है। यानी इन तीनों से संबंधित शुभ फल पाने के लिए व्यक्ति को बहुत संघर्ष करना होता है।
2. पहले भाव के शनि की दृष्टि तीसरे भाव पर सबसे ज्यादा शक्तिशाली तरीके से होती है। यानी व्यक्ति को भाई-बहनों का सुख, परिजनों का सुख नहीं मिल पाता है।
3. शनि की तीसरी दृष्टि जिस भाव पर पड़ती है, उस भाव का स्वामी यदि कुंडली में नीच राशि का है, कमजोर है तो उस भाव से संबंधित चीजों के लिए व्यक्ति को जीवनभर मेहनत करना होती है।
4. शनि की तीसरी दृष्टि जिस भाव पर पड़ रही है, उस भाव का स्वामी यदि कुंडली में उच्च का है, बलवान है तो तीसरी दृष्टि राहत भी दे सकती है। इस अवस्था में संघर्ष कम करना पड़ता है, लेकिन मेहनत तो फिर भी खूब करवाता है। और मेहनत के अनुसार ही परिणाम भी देता है।
5. शनि की तीसरी दृष्टि यदि दूसरे भाव पर पड़ रही है तो जातक को धन की प्राप्ति के लिए दिन-रात दौड़ लगाना पड़ती है।

तीसरी दृष्टि से राहत के उपाय
1.
शनिदेव की नियमित सेवा, गरीबों की सेवा, भिखारियों की सेवा, कौढ़ियों की सेवा करने से शनि की तीसरी दृष्टि से कुछ राहत मिलती है।
2. घर आए अतिथियों का कभी अपमान, तिरस्कार ना करें। अपनी सामर्थ्य के अनुसार जो उनके लिए कर सकें अवश्य करें।
3. शनिवार को लाल कंबल का आसन बिछाकर, लाल धोती या शोला पहनकर हनुमानजी की मूर्ति के सामने तेल का दीपक लगाकर हनुमान चालीसा के 21 पाठ करने से शनि की तीसरी दृष्टि से राहत मिलती है।
4. शनिवार को काले घोड़े को सवा किलो भिगोए हुए चने खिलाने से शनि की दृष्टि से राहत मिलती है।

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