Sawan का सोमवार ही नहीं शनिवार भी होता है खास, इस दिन करें इन 3 देवताओं की पूजा, दूर हो सकती हैं परेशानियां

Published : Aug 07, 2021, 10:52 AM ISTUpdated : Aug 07, 2021, 12:08 PM IST
Sawan का सोमवार ही नहीं शनिवार भी होता है खास, इस दिन करें इन 3 देवताओं की पूजा, दूर हो सकती हैं परेशानियां

सार

सावन (Sawan) महीने में सोमवार (Monday) के अलावा शनिवार (Saturday) को भी पुराणों में बहुत खास बताया है। इस दिन हनुमानजी, शनिदेव और भगवान नृसिंह की पूजा का विधान है। स्कंद पुराण (Skand Puran) में कहा है कि सावन (Sawan) शनिवार को इन तीन देवताओं की पूजा से हर तरह की परेशानियां दूर होती हैं। ये तीनों देवता ही सुख-समृद्धि प्रदान करने वाले और संकटों से मुक्ति दिलाने वाले हैं। सावन में इनकी पूजा से विशेष फल मिल सकते हैं।

उज्जैन. सावन (Sawan) शनिवार को तेल से हनुमानजी (Hanumanji) और शनिदेव (Shanidev) का अभिषेक करना चाहिए। साथ ही इस दिन भगवान नृसिंह (nrasing) की विशेष पूजा के बाद ब्राह्मणों को तिल से बना भोजन करवाने से मनोकामना पूरी होती है। स्कंद पुराण में इसके बारे में विस्तार पूर्वक बताया गया है। ये तीनों देवता ही मंगल करने वाले और भक्तों को परेशानियां दूर करने वाले हैं।

हनुमानजी की पूजा से दूर होती हैं परेशानी
पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र के अनुसार, सावन (Sawan) शनिवार को हनुमानजी की आराधना करने से हर तरह की बीमारियां दूर हो जाती है। मानसिक और शरीरिक रुप से मजबूती मिलती है। हनुमानजी की कृपा से कामकाज में आ रही रुकावटें दूर हो जाती हैं। सोचे हुए काम पूरे होने लगते हैं। बुद्धि और वैभव बढ़ता है। शत्रु नष्ट हो जाते हैं और प्रसिद्धि मिलती है।

अशुभता से बचने के लिए करें शनि पूजा
भगवान शिव, शनिदेव के गुरु हैं। शिवजी ने ही शनिदेव (Shanidev) को न्यायाधीश का पद दिया था। जिसके फलस्वरूप शनि देव मनुष्यों को कर्मों के मुताबिक फल देते हैं। इसलिए श्रावण के महीने में भगवान शिव के साथ साथ शनिदेव (Shanidev) की उपासना करने से शुभ फल मिलते हैं। भगवान शिव के अवतार पिप्पलाद, भैरव और रुद्रावतार हनुमान जी की पूजा भी शनि के अशुभ असर से रक्षा करती है।

धन लाभ के लिए नृसिंह पूजा
स्कंद पुराण (Skand Puran) के अनुसार, सावन शनिवार को सुबह तिल का उबटन लगाकर नहाना चाहिए। इसके बाद भगवान नृसिंह की विशेष पूजा करनी चाहिए। उड़द दाल से बनी खिचड़ी का नैवेद्य लगाना चाहिए। फिर ब्राह्मणों को भी प्रसाद का भोजन करवा कर दक्षिण देनी चाहिए। ऐसा करने से भगवान नृसिंह प्रसन्न होते हैं। धन और धान्य बढ़ता है। इसके साथ ही हर तरह का सुख भी मिलता है।

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