लगातार हार के बाद अब निकाय चुनाव में भविष्य तलाश रही बसपा, मायावती ने बैठक में नेताओं को दिया ये मंत्र

Published : Oct 22, 2022, 05:22 PM ISTUpdated : Oct 23, 2022, 04:44 PM IST
लगातार हार के बाद अब निकाय चुनाव में भविष्य तलाश रही बसपा, मायावती ने बैठक में नेताओं को दिया ये मंत्र

सार

यूपी की पूर्व सीएम और बसपा प्रमुख मायावती पार्टी कार्यालय में पदाधिकारयों के साथ बैठक कर रही हैं। लोकसभा चुनाव में बसपा मुस्लिम वोटरों को साधने की कोशिश कर रही हैं। बसपा निकाय चुनाव में अपने भविष्य की संभावनाओं को देख रही है।

आशीष पाण्डेय
लखनऊ
: उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा प्रमुख मायावती ने आज यानि की शनिवार को लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में पदाधिकारयों के साथ बैठक कर रही हैं। इस दौरान निकाय चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा की जा रही है। मायावती ने पार्टी के सभी मंडल प्रभारियों की बैठक बुलाई है। इस बैठक में बामसेफ और पार्टी के जिलाध्यक्ष भी शामिल हैं। बता दें कि सभी दल निकाय चुनाव की तैयारियों में जुटे हुए हैं। पार्टी मुख्यालय पर मायावती भी अपने सिपहसालारों के साथ इस पर मंथन करेंगी। निकाय चुनाव को लोकसभा चुनाव 2024 का सेमीफाइनल माना जा रहा है। 

भविष्य की संभावनाओं को तलाश रही बसपा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, निकाय चुनाव के अलावा 2024 के लोकसभा चुनाव पर भी चर्चा की गई है। इस बैठक में पिछले 5 चुनावों में बसपा की लगातार हार और पार्टी के घटते जनाधार पर भी चर्चा हुई। ऐसे में बसपा होने वाले निकाय चुनाव में अपने भविष्य की संभावनाओं को देख रही है। इससे पहले मायावती को यह कहते हुए सुना गया था कि निकाय चुनाव का परिणाम भविष्य के द्वार खोल सकता है। इस बार बसपा का पूरा ध्यान मुस्लिम मतदाताओं पर है। बसपा पार्टी इस बार निकाय चुनाव में दलित-मुस्लिम समीकरण को साधने की कोशिश कर रही है। 

मुस्लिम वोटरों को साधने की कोशिश
विधानसभा चुनाव में तमाम कोशिशों के बाद भी समाजवादी पार्टी की नैया पार नहीं लग पाई थी। जबकि मुस्लिमों ने पूरी ताकत के साथ समाजवादी पार्टी का समर्थन किया था। ऐसे में बसपा मुस्लिमों को विकल्प देकर यह जताना चाह रही है कि दलितों का बड़ा वोट बैंक उसके पास है। अगर मुस्लिम भी उनके साथ आ जाएं तो भाजपा को सत्ता में आने से रोका जा सकता है। फिलहाल निकाय चुनाव का परिणाम ही यह तय करेगा बसपा का यह फॉर्मूला कितना कारगर होगा। बता दें कि इससे पहले बसपा ने सदस्यता अभियान भी शुरू किया था। लेकिन उम्मीद के हिसाब से परिणाम नहीं मिलने पर इसे बीच में ही बंद कर दिया गया था।

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