मंदिर में जलाया गया झारखंड की महिला का शव, अब यह बातें आ रही सामने

Published : Apr 01, 2020, 09:33 AM ISTUpdated : Apr 01, 2020, 09:34 AM IST
मंदिर में जलाया गया झारखंड की महिला का शव, अब यह बातें आ रही सामने

सार

सीएमओ के अनुसार कोरोना से पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका अंतिम संस्कार जलाकर ही किया जाएगा। वहीं स्‍थानीय प्रशासन ने यह भी दावा किया कि स्‍थानीय लोगों को अब कोई आपत्ति नहीं है। मंदिर प्रशासन का कहना था कि जैन साधुओं का कोई ठिकाना नहीं होता। उनका दाह-संस्कार मंदिर के परिसर में ही किया जाता है।

अयोध्या (Uttar Pradesh) । कोरोना का खौफ लोगों की सिर पर चढ़कर बोल रहा है। 14 अप्रैल तक लागू लॉक डाउन के कारण अयोध्या में रायगंज स्थित जैन मंदिर में झारखंड से आया 27 लोगों का जत्था फंसा हुआ है। ये सभी जैन धर्म के हैं, इनमें शामिल एक 73 साल की महिला की मौत हो गई। जिसके बाद जैन धर्म के लोग अपने परंपरागत तरीके से मंदिर प्रांगण में ही उसका अंतिम संस्कार करने लगे। वहीं, इसकी जानकारी होने पर स्थानीय लोग विरोध करने लगे। दरअसल विरोध करने वालों को शक है कि महिला कोरोना पॉजिटिव थी, जिसके कारण उन्होंने पुलिस प्रशासन से इसकी शिकायत की। लेकिन, अधिकारियों ने मंदिर प्रशासन से बात करने के बाद शव को जलाने की अनुमति दे दी। इस तरह मंदिर में शव जलाए जाने से स्‍थानीय लोगों में खासा रोष है। लोगों के अनुसार यह लापरवाही का मामला है। मृतका का कोरोना टेस्ट होना चाहिए था। 

यह है पूरा मामला
23 मार्च को झारखंड से जैन धर्म के 27 लोग यहां पहुंचे थे। लॉकडाउन के कारण सभी यहीं रुक गए। इन लोगों में शामिल एक बुजुर्ग महिला की तबियत बिगड़ गई और बाद में उसकी मौत हो गई। इसके बाद महिला के अंतिम संस्कार मंदिर के प्रांगण में किए जाने की व्यवस्था मंदिर प्रशासन ने की। इसी बीत महिला के कोरोना संक्रमित होने का शक होने पर लोग विरोध करने लगे। सूचना मजिस्ट्रेट और क्षेत्राधिकारी अयोध्या को दी गई, जिन्होंने मंदिर प्रशासन से वार्ता की। इसके बाद बिना किसी मेडिकल टीम को बुलाए महिला का अंतिम संस्कार मंदिर के प्रांगण में ही करवा दिया।

स्थानीय लोग और प्रशासन ने कही ये बातें
विरोध कर रहे स्‍थानीय लोगों ने कहा कि मंदिर के आस पास घनी आबादी क्षेत्र है। ऐसे में लोगों को संक्रमण का खतरा है। वहीं मौके पर पहुंचे अधिकारी ने कहा कि महिला की उम्र लगभग 73 साल थी। उसे कोई भी कोरोना के लक्षण नहीं थे। महिला और उसके साथ के सभी लोग 23 मार्च से यहां पर मौजूद हैं। यदि किसी को भी कोरोना संक्रमण होता तो अभी तक लक्षण सामने आ जाते। साथ ही उन्होंने कहा कि पूरे जनपद में अभी तक कोई भी कोरोना पॉजिटिव मरीज नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि सीएमओ से बात करने के बाद ही अंतिम संस्कार की मंजूरी दी गई। 

सीएमओ और मंदिर प्रशासन का दावा
सीएमओ के अनुसार कोरोना से पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका अंतिम संस्कार जलाकर ही किया जाएगा। वहीं स्‍थानीय प्रशासन ने यह भी दावा किया कि स्‍थानीय लोगों को अब कोई आपत्ति नहीं है। मंदिर प्रशासन का कहना था कि जैन साधुओं का कोई ठिकाना नहीं होता। उनका दाह-संस्कार मंदिर के परिसर में ही किया जाता है।

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