ज्ञानवापी केस: मुस्लिम पक्ष ने मांगा समय तो कोर्ट ने ठोंका जुर्माना, 2 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

Published : Oct 21, 2022, 05:17 PM ISTUpdated : Oct 28, 2022, 10:14 AM IST
ज्ञानवापी केस: मुस्लिम पक्ष ने मांगा समय तो कोर्ट ने ठोंका जुर्माना, 2 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

सार

वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद मामले में जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में श्रृंगार गौरी प्रकरण मामले में बंद तहखानों को खुलवाकर उनका सर्वे करवाने और पक्षकार बनाने के मामले पर सुनवाई की है। सर्वे कराए जाने की मांग पर 2 नवंबर को सुनवाई की जाएगी।

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले की शुक्रवार यानि की आज सुनवाई की गई। मामले की सुनवाई जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में हुई। बता दें कि अदालत ने मां श्रृंगार गौरी मामले में पक्षकार बनने के लिए दिए गए सभी आवेदनों को खारिज कर दिया है। इसके अलावा अदालत ने ज्ञानवापी परिसर में बंद तहखाने का फिर से सर्वे कराए जाने की मांग पर भी सुनवाई की है। वहीं मुस्लिम पक्ष ने इस मामले पर आपत्ति दाखिल करने के लिए समय मांगा है। इस पर अदालत ने मुस्लिम पक्ष पर 100 रुपए का हर्जाना लगाया है। 

16 लोगों ने पक्षकार बनने के लिए किया था आवेदन
अदालत ने ज्ञानवापी परिसर में बंद तहखाने का फिर से सर्वे कराए जाने की मांग पर सुनवाई करने के लिए 2 नवंबर की अगली तारीख दी है। साथ ही कारमाइकल लाइब्रेरी में मिली गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति सुरक्षित व संरक्षित करने के राखी सिंह के आवेदन पर भी 2 नवंबर को सुनवाई की जाएगी। इसके अलावा उसी दिन वाद बिंदु भी तय होना है। बता दें कि ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले पक्षकार बनने के लिए 16 लोगों ने आवेदन किया था। जिसमें से अदालत ने 18 अक्टूबर को हुई सुनवाई में 5 लोगों के आवेदन को खारिज कर दिया था। वहीं 8 लोगों के अनुपस्थित होने के काऱण उनका आवेदन पहले ही खारिज हो गया था। 

वादी महिलाओं ने पक्षकार बनाने से किया इंकार
इसके अलावा अन्य तीन आवेदन पर सुनवाई के लिए अदालत ने अपना फैसला शुक्रवार यानि की आज के लिए सुरक्षित रख लिया था। हिंदू पक्ष के अधिवक्ता सुभाष नंदन चतुर्वेदी व सुधीर त्रिपाठी ने पिछली सुनवाई के दौरान बताया था कि अदालत ने उनकी मांगे मान ली हैं। पिछली सुनवाई में वादी पक्ष की सहमति के बगैर पक्षकार बनाए जाने का विरोध किया गया था। श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा और दर्शन की इजाजत के लिए जिन महिलाओं ने याचिका डाली थी, उन्होंने किसी को भी पक्षकार बनाने से इनकार कर दिया था। याचिका डालने वाली वादी महिलाओं ने कहा था कि उन्हें किसी को पक्षकार बनाने की आवश्यकता नहीं है।

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