ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले में कोर्ट ने दी अगली तारीख, जानिए आखिर क्यों टाली गई सुनवाई

Published : Aug 04, 2022, 04:47 PM IST
ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले में कोर्ट ने दी अगली तारीख, जानिए आखिर क्यों टाली गई सुनवाई

सार

ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी की मामले में दाखिल वाद सुनवाई योग्य है या नहीं इस पर सुनवाई 18 अगस्त तक टाल दी गई है। मुस्लिम पक्ष की ओर से अधिवक्ता के निधन पर की गई अपील के बाद सुनवाई को टाला गया है। 

वाराणसी: ज्ञानवापी स्थित मां श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन को लेकर दाखिल वाद सुनवाई योग्य है या नहीं इस पर सुनवाई 18 अगस्त तक टल गई है। गुरुवार को होने वाली सुनवाई से पहले ही अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से कोर्ट में प्रार्थनापत्र देकर और समय की मांग की गई। 

मुख्य अधिवक्ता के निधन की दी गई जानकारी
इस बीच जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में प्रार्थन पत्र देकर केस के मुख्य अधिवक्ता अभयनाथ यादव के निधन के बारे में भी जानकारी दी गई। उनके निधन की वजह से ही 15 दिन का समय मांगा गया। मामले को लेकर कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 18 अगस्त की तिथि तय की है। गुरुवार 04 अगस्त को सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष अंजुमन इंतजामिया को जवाबी बहस करनी थी। 
मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में ऑर्डर 7 रूल 11 के तहत वाद की पोषणीयता पर 23 मई से लेकर अभी तक कई तारीखों पर सुनवाई हो चुकी है।

'कोर्ट के आदेश का करवाया गया पालन, आगे भी प्रतिबद्ध'
इस बीच हिंदू पक्ष की ओर से दावा किया जा रहा है कि श्रृंगार गौरी का मुकदमा सुनवाई के योग्य है। हालांकि मुस्लिम पक्ष की ओर से दावा किया जा रहा है कि यह मुकदमा सुनवाई के योग्य नहीं है। इस मामले में डीएम, पुलिस आयुक्त, प्रदेश के मुख्य सचिव की तरफ से डीजीसी सिविल महेंद्र प्रसाद पांडेय ने पक्ष रखा। उनकी ओर से कहा गया कि अदालत ने पहले जो भी आदेश दिए उनका सभी का पालन करवाया गया है। आगे भी न्यायालय जो आदेश जारी करेगा उसका अनुपालन करवाया जाएगा। इसके लिए शासन और प्रशासन प्रतिबद्ध है। मुस्लिम पक्ष की दलील में बताया गया कि ज्ञानवापी परिसर में विशेष धर्म उपासना एक्ट 1991 लागू होता है। वक्फ की संपत्ति होने के कारण इस पर कोर्ट को सुनवाई का अधिकार नहीं है। वहीं हिंदू पक्ष का दावा है कि विशेष उपासना स्थल एक्ट 1991 लागू नहीं होता है कि क्योंकि 1993 के पहले यहां पूजा-पाठ होता था। 

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