वृन्दावन श्री प्रियाकान्त जू मंदिर में हाइड्रोलिक पिचकारी से बरसा टेसू का रंग, श्रद्धालुओं ने खेली होली

Published : Mar 17, 2022, 04:56 PM IST
वृन्दावन श्री प्रियाकान्त जू मंदिर में हाइड्रोलिक पिचकारी से बरसा टेसू का रंग, श्रद्धालुओं ने खेली होली

सार

होली महोत्सव में उमड़े हजारों भक्तों पर जब भागवत प्रवक्ता देवकीनंदन महाराज ने हॉइड्रोलिक पिचकारी से रंग बरसाया तो श्रद्धालु झूमकर नृत्य करने लगे। टेसू के फूलो से बने सुगंधित रंग की धार जिस भी श्रद्धालु पर पडी़ वह ब्रज की मस्ती में को खो गया। वृंदावन में होली की कृष्णकालीन परम्परा और गहरी हो गयी।

वृन्दावन: ठाकुर श्री प्रियाकान्त जू मंदिर प्रांगण में ब्रज की सातों प्रकार की होली खेली गयी। श्रद्धालु-भक्तों से खचाखच भरे मंदिर प्रांगण में जब हाइड्रोलिक पिचकारी से टेसू का रंग बरसा तो फाग के गीत जीवन्त हो गये। देवकीनंदन महाराज के साथ श्रद्धालु-शिष्यों ने ब्रज के प्रमुख महोत्सव का आनंद लिया। ब्रजवासियों की रसीले हास-परिहास से शुरू हुई होली लठामार और फूलों की होली में बदल गयी।

गुरूवार को छटीकरा मार्ग स्थित प्रियाकान्त जु मंदिर पर होली महोत्सव में उमड़े हजारों भक्तों पर जब भागवत प्रवक्ता देवकीनंदन महाराज ने हॉइड्रोलिक पिचकारी से रंग बरसाया तो श्रद्धालु झूमकर नृत्य करने लगे। टेसू के फूलो से बने सुगंधित रंग की धार जिस भी श्रद्धालु पर पडी़ वह ब्रज की मस्ती में को खो गया। वृंदावन में होली की कृष्णकालीन परम्परा और गहरी हो गयी। प्रियाकान्त जु विग्रह पर गुलाल लगाकर मंदिर सेवायतों ने होली की शुरूआत की। मंदिर परिसर में ढोल-नगाढ़े बजाकर श्रद्धालुओं में होली मनाने के घोषणा हो गयी। देवकीनंदन महाराज ने ब्रज की यह होरी रसभरी, तोय सौं कन्हैया, मोय रंग मत डारो’ आज ब्रज में होरी रे रसिया जैसे मधुर भजन गाये तो श्रद्धालु नृत्य करने लगे।

मंच पर लोक कलाकारों के मीठी ब्रजभाषा में हास-परिहास का क्रम लठामार होली में परिवर्तित हो गया। इस बीच श्री राधा-कृष्ण स्वरूपों पर भक्तों ने पुष्पों की वर्षा कर फूलों की होली खेली। होली की खुशी में लड्डू और जलेबी लुटायी गयीं भक्तों में लपक-लपक कर प्रसाद पाया। श्रद्धालुओं ने एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर होली की बधाई दी। इसके पश्चात मंदिर अट्टालिका पर लगी हाईड्रोलिक पिचकारी से देवकीनंदन महाराज ने टेसू का रंग बरसाया। इस सुगंधित रंग में भीगने को हर किसी मे ललक दिखायी दी। श्रद्धालु भीगते हुये नृत्य करने लगे और ब्रज की अनूठी होली में खो गए।

देवकीनंदन महाराज ने होली को प्रेम का त्यौहार बताते हुये कहा कि होली सभी राग-द्वैष को भुलाकर एक दूसरे से प्रेम करने का अवसर प्रदान करती है। ब्रज की होली पूरी दुनियां को स्नेह और खुशी बढ़ाने का संदेश देती है।

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