मां ने अपने ही बच्चों से भरी अदालत में रिश्ता तोड़कर कही बड़ी बात, HC ने उठाया ये कदम

Published : May 08, 2022, 12:41 PM ISTUpdated : May 08, 2022, 12:46 PM IST
मां ने अपने ही बच्चों से भरी अदालत में रिश्ता तोड़कर कही बड़ी बात, HC ने उठाया ये कदम

सार

इलाहाबाद हाई कोर्ट में मौजूद मां ने अपने दो मासूम बच्चों से रिश्ता तोड़ दिया और कोर्ट से कहा कि, उसका बच्चों से कोई वास्ता नहीं है। इतना ही नहीं मां आगे कहती है कि उसे बच्चों से न मिलना भी मंजूर है। जिसके बाद कोर्ट ने दाखिल याचिका को खारिज कर दिया।

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश की संगम नगरी प्रयागराज में इलाहाबाद हाई कोर्ट के अंदर एक मां ने ऐसा ऐलान कर दिया कि उसकी रूंह भी नहीं कापी। कोई मां अपने ही बच्चों से रिश्ता नहीं तोड़ सकती लेकिन ऐसा हुआ है प्रयागराज के हाई कोर्ट में जहां पर एक महिला ने अपने ही दो मासूम बच्चों से रिश्ता तोड़ दिया। इतना ही नहीं आगे कहती है कि मुझसे कोई वास्ता नहीं है। इलाहाबाद हाई कोर्ट में फतेहपुर के एक युवक ने अपनी पत्नी के लिए दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी। इसी मामले पर कोर्ट को फैसला सुनाना था लेकिन मां के ऐसा कहने पर कोर्ट ने याचिक खारिज कर दी। पति और बच्चों को छोड़कर गैर मर्द के साथ दिल्ली में रह रही महिला की बरामदगी की मांग को लेकर दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सुनवाई के बाद कोर्ट ने खारिज कर दी।

मां ने बच्चों से न मिलने पर कही बात 
हाईकोर्ट के आदेश पर याचिका की पत्नी को कोर्ट में पेश किया। अदालत में मौजूद मां ने अपने ही दो मासूम बच्चों से रिश्ता तोड़ दिया और कोर्ट से कहा कि उसका बच्चों से कोई वास्ता नहीं है। मां ने कहा कि, उसे बच्चों से न मिलना भी मंजूर है। यह सब याचिका की सुनावाई के दौरान युवक की पत्नी ने कही। महिला की ऐसी बात सुनकर कोर्ट ने कहा कि उसे बच्चों से मिलने नहीं दिया जाएगा। इसपर दोनों बच्चों की मां ने कहा कि उसे यह मंजूर है। आगे कहती है कि उसे किसी ने बंदी नहीं बनाया है। वह दिल्ली में रहकर प्राईवेट नौकरी करती है। पत्नी के ऐसे जवाब से कोर्ट ने पति की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने याचिका को पोषणीय नहीं माना। 

जानिए आखिर क्या था पूरा मामला
यह आदेश जस्टिस राहुल चतुर्वेदी ने प्रमोद कुमार व तीन अन्य की याचिका को खारिज करते हुए दिया। इस मामले में पति प्रमोद कुमार ने अपनी पत्नी क्रांति देवी को बालकेश के बेटे अंकुर के हाथों बंदी बताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी। पति का कहना था कि उसकी पत्नी क्रांति को अंकुर ने दिल्ली में बंदी बनाकर रखा है। उसे छोड़ नहीं रहा है, वह वहीं कैद है। कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया था कि पत्नी को कोर्ट में पेश करे। जब सुनवाई के दौरान पत्नी कोर्ट में उपस्थित हुई तो कोर्ट ने उससे कई सवाल किए। कोर्ट ने पूछा कि क्या उसे किसी ने बंदी बनाया है, तो महिला ने कहा कि उसे किसी ने बंदी नहीं बनाया है। वह दिल्ली में रहकर जॉब कर रही है। उसका अपने पति प्रमोद कुमार से कोई लेना-देना नहीं है। पति उसे परेशान करता है।

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