Exclusive: राम मंदिर में लगने वाले स्टोन की टेस्टिंग मे लगा कर्नाटक का ये संस्थान, 5 टेस्ट से गुजरता है पत्थर

Published : May 04, 2022, 05:13 PM ISTUpdated : May 05, 2022, 08:37 AM IST
Exclusive: राम मंदिर में लगने वाले स्टोन की टेस्टिंग मे लगा कर्नाटक का ये संस्थान, 5 टेस्ट से गुजरता है पत्थर

सार

अयोध्या स्थित रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है। मंदिर में लगने वाले एक-एक पत्थर को कई टेस्टिंग से गुजरने के बाद सर्टिफाई किया जाता है। इसकी जिम्मेदारी कर्नाटक के NIRM को दी गई है। 

नई दिल्ली/अयोध्या। उत्तर प्रदेश के अयोध्या (Ayodhya) में रामलला (Ramlala) का भव्य मंदिर बन रहा है, जिसका निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है। मंदिर के गर्भगृह को दिसंबर, 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मंदिर में लगने वाले सभी तरह के पत्थर अयोध्या पहुंच चुके है और उनमें नक्काशी का काम भी लगभग पूरा हो चुका है। मंदिर में लगने वाले एक-एक पत्थर की कई चरणों में टेस्टिंग की जा रही है। इस बारे में और ज्यादा जानकारी के लिए एशियानेट न्यूज (Asianet News) के राजेश कालरा ने राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्रा से बातचीत की। उन्होंने बताया कि मंदिर में लगने वाले हर एक पत्थर को 3-4 टेस्टिंग से गुजरने के बाद ही लगाया जा रहा है।  

नृपेन्द्र मिश्रा ने बताया- जो स्टोन बने और जिनकी नक्काशी हुई वो सभी अयोध्या आ चुके हैं। उनका ट्रीटमेंट करने के बाद वेरिफिकेशन भी हो चुका है। सारे स्टोन का टेस्ट हम भारत सरकार के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ रॉक मैकेनिक्स (NIRM) कर्नाटक से कराते हैं और हमने उन्हें इसका कॉन्ट्रैक्ट दे रखा है। NIRM के साइंटिस्ट एक-एक पत्थर को टेस्ट करते हैं और उस पर स्टाम्प लगाते हैं। 

कई टेस्ट से गुजरता है मंदिर में लगने वाला पत्थर : 
नृपेन्द्र मिश्रा के मुताबिक, मंदिर में लगने वाले पत्थरों को कई टेस्ट से गुजरना पड़ता है। बाद में स्टोन के कुछ टुकड़े लैब में ले जाते हैं और वहां बारीकी से कुछ और टेस्टिंग होती है। इसके बाद कहीं जाकर सर्टिफाई किया जाता है कि ये पत्थर अब इस्तेमाल के लिए पूरी तरह फिट है। ये स्टोन टेस्ट कुछ इस तरह हैं।   

1- विजुअल टेस्ट

2- फिजिकल टेस्ट

3- साउंड टेस्ट

4- वॉटर टेस्ट

5- लैब टेस्ट

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क्या है NIRM :
नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ रॉक मैकेनिक्स (NIRM) भारत सरकार के अधीन एक ऑटोनॉमस रिसर्च इंस्टिट्यूळ है। इसका हेडऑफिस बेंगलुरू में, जबकि रजिस्टर्ड ऑफिस कर्नाटक के कोलार गोल्ड फील्ड में स्थित है। यह संस्थान फील्ड और लैब इन्वेस्टिगेशन के अलावा बेसिक एंड एप्लाइड रिसर्च और रॉक इंजीनियरिंग से संबंधित जटिल समस्याओं को हल करने के लिए रिसर्च करता है। 

जानें कब आया राम मंदिर का फैसला और कब बना ट्रस्ट : 
9 नवंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या की विवादित जमीन पर रामलला विराजमान का हक मानते हुए मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 जजों की विशेष बेंच ने राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए अलग से ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया। बाद में 5 फरवरी, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में ट्रस्ट के गठन का ऐलान किया। इस ट्रस्ट का नाम 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' है। 

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कौन हैं नृपेन्द्र मिश्रा : 
नृपेन्द्र मिश्रा यूपी काडर के 1967 बैच के रिटायर्ड आईएएस अफसर हैं। मूलत: यूपी के देवरिया के रहने वाले नृपेन्द्र मिश्रा की छवि ईमानदार और तेज तर्रार अफसर की रही है। नृपेंद्र मिश्रा प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव भी रह चुके हैं। इसके पहले भी वो अलग-अलग मंत्रालयों में कई महत्वपूर्ण पद संभाल चुके हैं। इसके अलावा वो यूपीए सरकार के दौरान ट्राई के चेयरमैन भी थे। जब नृपेंद्र मिश्रा ट्राई के चेयरमैन पद से रिटायर हुए तो पब्लिक इंटरेस्ट फाउंडेशन (PIF) से जुड़ गए। बाद में राम मंदिर का फैसला आने के बाद सरकार ने उन्हे अहम जिम्मेदारी सौंपते हुए राम मंदिर निर्माण समिति का अध्यक्ष बनाया।

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