अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला: पवित्र पुराण व श्लोकों ने किया ऐतिहासिक फैसले में गवाह का काम

Published : Nov 10, 2019, 12:35 PM ISTUpdated : Nov 10, 2019, 02:01 PM IST
अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला: पवित्र पुराण व श्लोकों ने किया ऐतिहासिक फैसले में गवाह का काम

सार

कोर्ट ने पवित्र प्राचीन पुराणों में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या होने के जिक्र का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि  ‘वाल्मीकि रामायण’ और ‘स्कंद पुराण’ जैसी पवित्र पुस्तकों से श्री राम जन्मभूमि की जानकारी को आधारहीन नहीं माना जा सकता है

लखनऊ( Uttar Pradesh ). सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अयोध्या मामले में फैसला सुनकर सैकड़ों साल पहले से चले आ रहे इस विवाद का पटाक्षेप कर दिया। कोर्ट ने पवित्र प्राचीन पुराणों में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या होने के जिक्र का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि वाल्मीकि रामायण और स्कंद पुराण जैसी पवित्र पुस्तकों से श्री राम जन्मभूमि की जानकारी को आधारहीन नहीं माना जा सकता है। ये श्लोक व पुराण मस्जिद बनने से काफी पहले के हैं। 

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले की रोज सुनवाई कर मामले को 40 दिन में निबटाने का फैसला लिया था। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में दोनों पक्षों के वकीलों ने लगातार 40 दिन तक अपनी दलीलें पेश किया। दोनों पक्षों के वकीलों को सुनने व तमाम साक्ष्यों पर गौर करने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था। जिस पर शनिवार की सुबह साढ़े दस बजे देश के इस सबसे बड़े मुकदमे में फैसला सुनाया गया। जिस में कोर्ट ने ये माना कि विवादित परिसर ही रामलला का जन्मस्थान है। इसलिए वहां ट्रस्ट बनाकर सरकार को मंदिर बनाने का आदेश दिया जबकि मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या में ही 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया। 

कौशल्या के एक पुत्र ने अयोध्या में जन्म लिया है- वाल्मीकि पुराण 
न्यायालय ने कहा कि, वाल्मीकि रामायण के श्लोक, ग्रहों की स्थिति के अनुसार भगवान राम के अयोध्या में जन्म लेने की बात करते हैं। अदालत के अनुसार, वाल्मीकि रामायण का 10वां श्लोक कहता है कि, ‘कौशल्या ने एक पुत्र को जन्म दिया जो कि दुनिया का भगवान है और उनके आने से अयोध्या धन्य हो गई। एक अन्य श्लोक के अनुसार कहा गया है कि ये आम व्यक्ति का जन्म नहीं है। अयोध्या भगवान के आगमन से धन्य हो गई।

धार्मिक पुस्तकें बनी इस ऐतिहासिक फैसले की गवाह 
CJI रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि धार्मिक पुस्तकों के ‘श्लोकों’ को गवाह के रूप में पेश किया गया और हिन्दू पक्षों ने इसे उच्चतम न्यायालय में साक्ष्य के रूप में पेश किया। अपनी दलीलें इसी के आधार पर पेश कीं कि अयोध्या ही भगवान राम की जन्मभूमि है। यह श्लोक और धार्मिक पुस्तकें 1528 के बहुत पहले से मौजूद हैं। ये मुस्लिम पक्ष का कहना है कि 1528 में मीरबाकी द्वारा बाबरी मस्जिद बनवाई गई थी। 

आठवीं शताब्दी की पुस्तक स्कन्द पुराण में है राम के जन्म का जिक्र 
इस केस के बहस के दौरान एक गवाह ने अदालत के समक्ष कहा था की राम जन्म की कथा स्कंद पुराण से भी आयी है और यह पुस्तक आठवीं सदी की है। बहस के दौरान एक गवाह ने यह कहा है कि पांचवां श्लोक ‘राम जन्मभूमि’ शब्द से शुरु होता है, यहां शहर शब्द का अर्थ पूरे शहर से है किसी खास जगह से नहीं है। यही बात 7वें श्लोक और चौथे श्लोक में भी कही गई है, जहां अवधपुरी शब्द आता है। इस पर कोर्ट ने कहा था कि यह कहना गलत होगा कि सभी तीन श्लोकों में ‘पुरी’ शब्द का मतलब जन्मभूमि से है। ’ लेकिन, भगवान राम के जन्म से जुड़ी पुस्तकों और पुराणों में हर जगह यही कहा गया है कि अयोध्या में महाराज दशरथ के महल में कौशल्या ने राम को जन्म दिया था। 

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