
हटके डेस्क। अफ्रीकी स्वाइन फ्लू के फैलने के खतरे को देखते हुए दक्षिण कोरिया की सरकार ने 47,000 सूअरों को मारने का आदेश जारी किया था। इतने सूअरों को मारे जाने के बाद जब उन्हें डंप किया गया तो बारिश के चलते उनका खून बह कर दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया की सीमा पर बहने वाली नदी इमिजन में जा मिला और पूरी नदी खून से लाल हो गई। कहा जा रहा है कि इतने बड़े पैमाने पर सूअरों को मारने के बाद उन्हें सही तरीके से ठिकाने नहीं लगाया गया। इसी वजह से पूरी नदी में खून फैल गया। सूअरों को पिछले सप्ताह मारा गया था और उन्हें दफनाने की जगह ट्रकों में भर कर डंपिंग ग्राउंड के पास छोड़ दिया गया था जो दोनों देशों की सीमा पर है।
17 सितंबर को सामने आया था स्वाइन फ्लू का मामला
साउथ कोरिया में अफ्रीकी स्वाइन फ्लू का पहला मामला 17 सितंबर को सामने आया था। इसके बाद 13 और मामले सामने आए। नॉर्थ कोरिया में मई महीने में स्वाइन फ्लू का मामला सामने आया था। इसके बाद दोनों देशों की सीमा पर बाड़ भी लगाई गई थी। स्वाइन फ्लू की यह बीमारी बहुत संक्रामक होती है। इसका अभी तक कोई इलाज भी नहीं ढूंढा जा सका है। वैसे, कुछ लोगों का कहना है कि इससे सूअरों को ही खतरा है। साउथ कोरिया में सूअरों के कुल 6,700 फार्म हैं।
साउथ कोरिया ने बरती लापरवाही
नॉर्थ कोरिया की सरकार ने कहा है कि इतनी बड़ी संख्या में सूअरों को मारने के बाद उन्हें ठिकाने लगाने में साउथ कोरिया ने लापरवाही बरती। मृत सूअरों को प्लास्टिक के कंटेनरों में बंद कर दफनाना चाहिए था, लेकिन उन्हें ट्रकों में छोड़ दिया गया। वहीं, साउथ कोरिया के अधिकारियों ने कहा है कि इससे संक्रमण फैलने का कोई खतरा नहीं है, क्योंकि मारने के पहले ही सूअरों का इलाज कर दिया गया था।
चीन में मारे गए हैं 12 लाख सूअर
स्वाइन फ्लू से सिर्फ साउथ और नॉर्थ कोरिया ही नहीं, बल्कि वियतनाम, फिलीपीन्स और चीन भी प्रभावित हुए हैं। दूसरे कई एशियाई देशों में भी इसके फैलने की आशंका जताई गई है। चीन में इस संक्रमण से बचाव के लिए 12 लाख सूअरों को मारा गया है।
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