
जिम्बाम्बे: वैसे तो हाथी अपने बच्चों का काफी अच्छे से ध्यान रखते हैं। अपने बच्चों के प्रति हथिनी से लेकर हाथी तक जिम्मेदार होते हैं। लेकिन जिम्बाम्बे के जंगलों से दो हाथी के बच्चों को रेस्क्यू किया गया। ये दोनों ही अकेले मिले थे और दोनों की हालत काफी बुरी थी। लेकिन इन्हें एक शख्स ने दिन-रात मेहनत कर, देखभाल कर बचा लिया।
इस हाल में मिले थे बच्चे
इनमें से एक कडीकी को जब रेस्क्यू टीम ने बचाया था, तब वो एक दिन की थी। उसपर शेर ने हमला किया था। उसकी सूंड और पूंछ पर गहरे जख्म थे। वहीं एक महीने की बूमि जिम्बाम्बे की गर्मी में चट्टानों के बीच फंस गई थी। उसे सनबर्न हो गया था। जब वो मिली थी, तब उसकी हालत काफी खराब थी।
मसीहा बन आए डॉ रॉक्सी
दोनों ही बच्चों को रेस्क्यू टीम ने बचाया। दोनों को वहां से जिम्बाम्बे एलीफैंट नर्सरी लाया गया। वहां उन्हें डॉ रॉक्सी डंकवेर्ट्स की निगरानी में रखा गया। 53 साल के डॉ रॉक्सी ने ही ये नर्सरी शुरू की है। उन्होंने दोनों ही बच्चों के लिए जी जान लगा दी। दोनों को दवाइयां दी गई और नर्सरी की टीम ने उन्हें काफी प्यार दिया।
आज रॉक्सी को मानते हैं पिता
कडीकी और बूमि ने तेजी से रिकवर किया। आज वो नर्सरी में खेलती नजर आती हैं। साथ ही वो डॉ रॉक्सी और उनकी वाइफ से काफी क्लोज हैं। दोनों ही उन्हें मम्मी पापा मानते हैं। नर्सरी के अन्य सदस्यों के साथ भी कडीकी और बूमि काफी कम्फर्टेबल हैं। इनकी तस्वीरें लोगों को काफी पसंद आ रहा है।
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