
हटके डेस्क। जब भी किसी देश में कोई छोटा या बड़ा संकट आता है, सबसे पहले सेना के जवान ही वहां लोगों की रक्षा करने के लिए पहुंचते हैं। वे जहां अनाथालयों में रह रहे भूखे बच्चों को खाना खिलाते हैं और उनकी देख-रेख करते हैं, वहीं खूंखार आतंकवादियों के चंगुल से भी लोगों को छुड़ाते हैं। कहने का मतलब है कि चाहे जैसा भी संकट हो, सेना के जवान और अधिकारी ही मौके पर पहुंच कर लोगों की जान बचाने की कोशिश करते हैं। मलेशिया के लाबुआन प्रांत में अभी हाल ही में ऐसा ही हुआ। वहां काम्पुंग गांव के पास नदी में एक पैसेंजर बोट मछली पकड़ने वाली नाव से टकरा कर क्रैश हो गया। तब उस बोट में सवार सभी पैसेंजर्स की जान सेना के एक अफसर ने बचा ली, लेकिन इस कोशिश में उसकी खुद की जान चली गई।
रेस्क्यू के दौरान बह गया पानी में
बोट के क्रैश होने की जानकारी जैसे ही मलेशिया के 15वें सन्दाकन बटालियन को मिली, सेना के जवान रेस्क्यू करने के लिए चल पड़े। उनका नेतृत्व ऑन्गकुल नाम का एक सैन्य अधिकारी कर रहा था। मौके पर पहुंचते ही उसने तेजी से रेस्क्यू का काम शुरू किया और सैनिकों के सहयोग से 27 स्टूडेंट्स की जान बचा ली, जो उस बोट में सवार थे। लेकिन रेस्क्यू के दौरान वह अधिकारी खुद पानी में बह गया।
एक किलोमीटर दूर मिली बॉडी
पानी में डूबने के बाद वह अधिकारी बहता हुआ वहां से करीब एक किलोमीटर दूर चला गया। जब तक सेना के जवान उसकी तलाश करते हुए वहां पहुंचे, उसकी जान जा चुकी थी। उसकी मौत की खबर सुन कर लोग बहुत दुखी हो गए। लोगों का कहना था कि ऐसे लोग कम ही होते हैं जो अपनी जान देकर दूसरों की जान बचाते हैं। लोग उसे अब रियल हीरो बता रहे हैं।
हॉस्पिटल में भर्ती हैं कई पैसेंजर
लोकल मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, इस दुर्घटना में बोट पर सवार सभी लोगों को बचा लिया गया। दुर्घटना के शिकार करीब 15 लोगों को डचेज ऑफ केंट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, वहीं 19 लोगों की देख-रेख पैरा मेडिकल स्टाफ कर रहे हैं। दो लोगों की हालत अच्छी नहीं है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें भी बचा लिया जाएगा। बहरहाल, सभी उस सेना अधिकारी की बहादुरी की चर्चा कर रहे हैं, जिसके साहस से लोगों की जान बचाई जा सकी।
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