
हटके डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 नवंबर को थाईलैंड के दो दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं। वे 2 नवंबर से 4 नवंबर तक थाईलैंड में रहेंगे। वे वहां 16वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस मौके पर जानते हैं क्या है आसियान और भारत से क्या है इसका संबंध। द एसोसिएशन ऑफ साउथ-ईस्ट एशियन नेशन्स (आसियान) की स्थापना साल 1967 में 8 अगस्त को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में हुई थी। इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपीन्स, सिंगापुर और थाईलैंड ने राजनीतिक-आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए इस संगठन की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देना भी था। संगठन का मुख्यालय इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में है। जानते हैं इससे जुड़े 5 फैक्ट।
1. धीरे-धीरे इस संगठन का विस्तार होता गया। साल 1984 में ब्रुनेई इसमें शामिल हुआ। वियतनाम 1995 में और लाओस व म्यांमार 1997 में इसका सदस्य बना।
2. साल 1999 में कंबोडिया भी इसका मेंबर बन गया। 1976 में आसियान की पहली बैठक में बंधुत्व और सहयोग की संधि पर हस्ताक्षर किए गए। इस संगठन की पहचान विश्व स्तर पर बढ़ी।
3. 1994 में आसियान ने एशियन रीजनल फोरम (एआरएफ) की स्थापना की, जिसका मकसद सुरक्षा को बढ़ावा देना था। अमेरिका, रूस, भारत, चीन, जापान और उत्तरी कोरिया सहित एआरएफ के 23 सदस्य हैं। यह इस संगठन की बड़ी उपलब्धि मानी गई।
4. साल 1992 में भारत आसियान का 'क्षेत्रीय संवाद भागीदार' बना और 1996 में इस संगठन का पूर्ण सदस्य बन गया। चीन भी इसका पूर्ण सदस्य बनने की कोशिश में है।
5. साल 2015 में मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में आसियान की एक बैठक में आर्थिक नीति को लेकर एक बड़ा फैसला लिया गया। इस फैसले के तहत सभी सदस्य देशों ने मिल कर एक आर्थिक समुदाय बनाया, जिसमें वे कई आर्थिक समझौते में शामिल हैं। धीरे-धीरे विश्व मंच पर एक शक्तिशाली संगठन के रूप में आसियान की पहचान बनती जा रही है।
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