Viral News: डिग्रीधारी IT प्रोफेशनल जहां सैलरी के लिए जूझ रहे हैं, वहीं एक ड्राई-क्लीनिंग कपल बिना कॉर्पोरेट जॉब हर महीने ₹2 लाख से ज़्यादा कमा रहा है। क्या पढ़ाई से ज़्यादा कमाई अब स्किल और बिज़नेस में है? या अब IT रेड का डर सच होगा?
Small Business Success Story: सोशल मीडिया पर एक पोस्ट इन दिनों ज़बरदस्त चर्चा में है। इस पोस्ट में दावा किया गया है कि एक साधारण-सी ड्राई क्लीनिंग दुकान चलाने वाला कपल हर महीने ₹2 लाख से ज़्यादा की कमाई करता है। यह बात सुनकर इंटरनेट पर लोग हैरान भी हैं, गुस्से में भी और सोच में भी पड़ गए हैं। क्या पढ़ाई और डिग्री अब कमाई की गारंटी नहीं रहीं?
यह दावा आया कहां से और किसने किया?
यह पोस्ट कंटेंट क्रिएटर नलिनी उनागर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर शेयर की। उन्होंने बताया कि वह अपने घर के पास मौजूद एक ड्राई क्लीनिंग दुकान पर अक्सर जाती हैं। बातचीत के दौरान दुकान के मालिक ने अपनी महीने की कमाई का जो हिसाब बताया, वह चौंकाने वाला था।
क्या वाकई ड्राई क्लीनिंग से इतनी कमाई संभव है?
नलिनी उनागर के अनुसार, यह दुकान एक पति-पत्नी मिलकर चलाते हैं। उनके साथ दो हेल्पर सैलरी पर काम करते हैं। दुकान रोज़ाना लगभग 350 कपड़े प्रेस करती है, जिनसे करीब ₹3,500 की कमाई होती है। इसके अलावा रोज़ 20 भारी कपड़े-जैसे सूट, ब्लाउज और महंगी साड़ियां-₹350 प्रति पीस के हिसाब से ड्राई-क्लीन किए जाते हैं। इससे रोज़ लगभग ₹7,000 और जुड़ जाते हैं।
महीने का गणित क्या कहता है?
अगर रोज़ की कमाई करीब ₹10,500 मानी जाए और दुकान महीने में सिर्फ 3 दिन बंद रहती हो, तो कुल महीने की आमदनी लगभग ₹2.8 लाख बैठती है। खर्च की बात करें तो दुकान उनकी अपनी है, इसलिए किराया नहीं देना पड़ता। बिजली का बिल करीब ₹6,000 और दोनों हेल्परों की सैलरी मिलाकर ₹40,000 के आसपास बताई गई। इस तरह अनुमानित मुनाफ़ा करीब ₹2.3 लाख निकलता है।
सोशल मीडिया पर गुस्सा क्यों फूटा?
यह पोस्ट वायरल होते ही लोगों के रिएक्शन आने लगे। कुछ ने मज़ाक में लिखा कि अब “सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग नहीं, स्टीम इंजीनियरिंग सीखनी चाहिए”। वहीं कई यूज़र्स ने टैक्स को लेकर सवाल उठाए-क्या इतनी कमाई पर टैक्स दिया जा रहा है या नहीं?
क्या यह कहानी कोई बड़ा सबक देती है?
कई लोगों का मानना है कि इस कहानी का मतलब IT जॉब छोड़कर दुकान खोलना नहीं है, बल्कि यह समझना है कि कमाई पढ़ाई से नहीं, वैल्यू और डिमांड से होती है। आज भी समाज में व्हाइट-कॉलर जॉब को ज़्यादा इज़्ज़त दी जाती है, लेकिन यह कहानी दिखाती है कि छोटे बिज़नेस भी न सिर्फ सम्मानजनक बल्कि फायदे का सौदा हो सकते हैं।
