
कोलकाता, पश्चिम बंगाल. क्या 10 साल पहले 34 साल पुराने वामपंथ का किला ढहाने वालीं ममता बनर्जी की विदाई होने वाली है? यह सवाल सिर्फ बंगाल नहीं, सारे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चुनावी रणनीतिकार(Election strategist) सावर्जनिक हुई एक चैट ने इस बात को और बल दे दिया है। इस चैट से ममता बनर्जी के लिए तनाव की स्थिति है। पिछले दिनों TMC ने एक आंतरिक सर्वे(Internal survey) कराया था। इसमें भाजपा जीतती दिख रही है। भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट किया कि प्रशांत किशोर क्लब हाउस में आपसी बातचीत कर रहे थे, लेकिन उन्हें नहीं मालूम था कि उनकी यह चैट वायरल हो जाएगी। सोशल मीडिया पर क्लब हाउस प्लेटफॉर्म पर प्रशांत किशोर कुछ पत्रकारों को ब्रीफ कर रहे थे।
प्रशांत किशोर की सफाई
ऑडियो वायरल होने के बाद प्रशांत किशोर ने कहा, "मुझे खुशी है कि बीजेपी के लोग अपने नेताओं के बयान से ज्यादा मेरी क्लब हाउस चैट को ज्यादा गंभीरता से ले रहे हैं। मेरी अपील है कि पूरी बातचीत को जारी करें। क्योंकि जो हिस्सा जारी किया गया है, उसमें सिर्फ सवालों का जवाब दिया जा रहा था कि कैसे बीजेपी को 40% वोट मिल रहे हैं और कैसे ये सोच बन गई है कि बीजेपी जीत रही है। भाजपा बंगाल चुनाव में 100 का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी।"
इस चैट में शामिल पत्रकार रोहिणी सिंह और साक्षी जोशी ने ट्वीट कर कहा है कि अमित मालवीय ने सिलेक्टिड ऑडियो ही जारी किया है। प्रशांत किशोर की वो बात जारी नहीं की है, जिसमें वो ममता की जीत का दावा कर रहे हैं।
जानिए पूरी कहानी...
अमित मालवीय ने ट्वीट करके दावा किया है कि क्लब हाउस की एक सार्वजनिक बातचीत में सीएम ममता बनर्जी के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर मान रहे हैं कि टीएमसी के आंतरिक सर्वेक्षणों में भी भाजपा ही जीत रही है। प्रशांत किशोर इसके पीछे टीएमसी के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी है और दलित वोटों का बीजेपी की ओर रुझान है। मालवीय ने कहा कि शायद प्रशांत किशोर का इसकी भनक नहीं होगी कि उनकी चैट सावर्जनिक हो जाएगी। बातचीत में प्रशांत किशोर कहते सुने गए कि वाम दलों, कांग्रेस और टीएमसी ने पिछले 20 सालों में सिर्फ मुस्लिम तुष्टिकरण किया है। इसे लेकर लोग इन पार्टियों से बेहद गुस्से में हैं।
चैट में प्रशांत किशोर स्वीकार रहे हैं कि बंगाल में मोदी की लोकप्रियता बढ़ी है। पूरा देश उन्हें पसंद करता है।
चैट पर बयान
कुछ खास बातें..
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पिछले 20 साल से सबसे बड़ी दिक्कत तुष्टिकरण है। फलसफा यह रहा है कि मुस्लिम जिसे वोट देगा, सरकार उसकी बनेगी। अगर बंगाल की बात करें, तो यहां का पॉलिटिकल ईको सिस्टम रही है, जो लेफ़्ट की रही हो, कांग्रेस की रही है, दीदी कर रही है...सबको मुस्लिमों के वोट को लेकर सोच रही है। पहली बार हिंदुओं को लग रहा है कि उन्हें भी कोई पूछ रहा है।
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सवाल-पश्चिम बंगाल में मोदी इतना पॉपुलर क्यों हैं?
दूसरा सवाल-बंगाल में मोदी के खिलाफ विरोधी लहर (Anti-incumbency) नहीं हैं क्यों?
प्रशांत किशोर-नहीं हैं, 10-15 परसेंट लोगों को मोदी में भगवान दिखता है, चाहे सही दिखे या गलत दिखे, वो अलग मुद्दा है। स्पेशली यहां जो हिंदी भाषी है, वो मोदी के सपोर्ट का कोर बेस है। जबकि विरोधी लहर (Anti-incumbency) है वो स्टेट के खिलाफ है। सेंट्रल के खिलाफ नहीं। यहां मोदी बिग पॉपुलर हैं। ममता और मोदी बराबर पॉपुलर हैं। बंगाल ने बीजेपी का स्वाद अभी चखा नहीं हैं। इसलिए लोग वो लड्डू टेस्ट करना चाहते हैं, जो अभी तक चखा नहीं। लोगों को लगता है कि बीजेपी उनके लिए कुछ ऐसा करेगी, जो अभी तक हुआ नहीं।
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चैट के दौरान प्रशांत किशोर को अहसास हुआ कि शायद चैट ओपन है। यानी उसमें पत्रकारों के अलावा बाहर से भी लोग जुड़े हुए हैं, तब उन्होंने हैरानी जताई और पूछ लिया- क्या यह खुला मंच है?
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