बांग्लादेश के ढाका में खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में EAM जयशंकर और पाकिस्तान के स्पीकर सरदार अयाज सादिक की अचानक मुलाकात, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बातचीत। क्या सिर्फ शिष्टाचार या कोई छुपा संदेश? भारत सरकार ने दिया जवाब।
तस्वीरों ने बढ़ाई हलचल, भारत-पाक संपर्क पर क्या बदलेगा रुख?
Jaishankar Pakistan Speaker Ayaz Sadiq Meeting: ढाका में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार के दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने भारत-पाकिस्तान और दक्षिण एशियाई कूटनीति को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर सरदार अयाज सादिक के बीच हुई संक्षिप्त बातचीत अब सुर्खियों में है। क्या यह सिर्फ शिष्टाचार था या इसके पीछे कोई बड़ा संकेत छुपा है?
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खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में अचानक क्यों चर्चा में आई यह मुलाकात?
जिस कमरे में पड़ोसी देशों के वरिष्ठ मंत्री और गणमान्य व्यक्ति अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए मौजूद थे, वहीं पाकिस्तान के स्पीकर ने जयशंकर से शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाकात इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि यह ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के किसी शीर्ष प्रतिनिधि की पहली आमने-सामने बातचीत थी।
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ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बातचीत, क्या बदला माहौल?
भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी। यह कार्रवाई 22 अप्रैल के पहलगाम हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। ऐसे माहौल में ढाका में हुई यह मुलाकात स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करती है।
इस मुलाकात के बाद भारत सरकार के सूत्रों ने साफ-साफ कहा कि इसे किसी भी तरह की कूटनीतिक पहल या रिश्तों में नरमी के संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार ने इसे केवल औपचारिक और शिष्टाचार आधारित बातचीत बताया। इससे साफ है कि भारत किसी भी गलत संदेश से बचना चाहता था।
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यूनुस के कार्यालय ने तस्वीरें शेयर कर क्या संकेत दिया?
इस मुलाकात की तस्वीरें बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा कीं। तस्वीरों के सामने आते ही यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया। विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश इस मौके पर खुद को क्षेत्रीय कूटनीति के केंद्र के रूप में दिखाना चाहता है।
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जयशंकर की ढाका यात्रा में और क्या रहा खास?
जयशंकर ने इस दौरान BNP नेता तारिक रहमान से भी मुलाकात की और उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शोक संदेश पत्र सौंपा। पत्र में पीएम मोदी ने खालिदा जिया को “दुर्लभ दृढ़ संकल्प और विश्वास वाली नेता” बताया और 2015 की अपनी ढाका यात्रा को याद किया।
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क्या यह मुलाकात भविष्य के संकेत दे रही है?
फिलहाल भारत सरकार ने किसी भी तरह की अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की है। लेकिन कूटनीति में तस्वीरें और मुलाकातें हमेशा संदेश देती हैं। ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि क्या ढाका में हुई यह बातचीत आने वाले दिनों में दक्षिण एशिया की राजनीति में कोई नया मोड़ लाएगी?
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