मिडिल ईस्ट में ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान का खर्च तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका हर दिन $1 से $2 बिलियन तक खर्च कर रहा है। बढ़ती लागत के कारण वॉशिंगटन में राजनीतिक बहस तेज हो गई है और टैक्सपेयर्स पर पड़ने वाले बोझ को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
Iran-US War: मिडिल ईस्ट के आसमान में उड़ती मिसाइलें और खाड़ी के ऊपर गूंजते फाइटर जेट्स कहीं न कहीं सवाल खड़ा करते हैं, कि डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के खिलाफ लड़ाई अमेरिका को आर्थिक रूप से आखिरी कितनी भारी पड़ रही है। जैसे-जैसे अमेरिका, इज़राइल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को तेज कर रहा है, पॉलिसी मेकर्स और विश्लेषक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इस युद्ध की असली कीमत क्या है।
Operation Epic Fury: मिडिल ईस्ट में भारी अमेरिकी सैन्य तैनाती
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के 12वें दिन तक अमेरिका ने पूरे मिडिल ईस्ट में बड़ी सैन्य तैनाती कर दी है। ईरान के खिलाफ चल रहे अभियान में अमेरिका ने कई अहम सैन्य संसाधन तैनात किए हैं, जिनमें एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, एडवांस्ड मिसाइल डिफेंस सिस्टम, सैकड़ों लड़ाकू विमान शामिल हैं।
रोजाना कितने अरब डॉलर खर्च कर रहा अमेरिका?
मिलिट्री ऑपरेशन की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि पेंटागन इस युद्ध पर रोजाना 1 से 2 अरब डॉलर यानी (9200 से 18,400 करोड़ रुपए) तक खर्च कर रहा है। ये आंकड़े वॉशिंगटन में चिंता का कारण बन रहे हैं, खासकर तब जब अमेरिका में मिडटर्म चुनाव भी करीब हैं। आलोचकों का कहना है कि सरकार मिडिल ईस्ट में एक और महंगी लड़ाई पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है, जबकि देश के अंदर कई लोग स्वास्थ्य खर्च, घर की कीमतों और महंगाई से जूझ रहे हैं। हालांकि, ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अमेरिका के पास इस सैन्य अभियान को जारी रखने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं।
युद्ध कितने समय तक चलेगा, साफ नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर यह सैन्य अभियान कई हफ्तों तक चल सकता है। लेकिन युद्ध कितने समय तक जारी रहेगा, यह स्पष्ट नहीं है। इसी वजह से कुल खर्च का सही अनुमान लगाना भी फिलहाल मुश्किल है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका के पास हथियारों की लगभग अनलिमिटेड सप्लाई है। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो युद्ध लंबे समय तक लड़ा जा सकता है।
शुरुआती तैनाती में ही $630 मिलियन खर्च
अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट की सीनियर फेलो और पेंटागन की पूर्व बजट अधिकारी एलेन मैककस्कर के अनुसार शुरुआती तैनाती भी बेहद महंगी थी। उन्होंने बताया कि केवल सैनिकों, जहाजों और विमानों को क्षेत्र में तैनात करने में ही करीब $630 मिलियन (5796 करोड़ रुपए) खर्च हो गए थे। हालांकि, यह खर्च कुल युद्ध लागत का केवल एक छोटा हिस्सा है।
रिपोर्ट्स में रोजाना खर्च के अलग-अलग अनुमान
हालांकि पेंटागन ने युद्ध के खर्च का कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है, लेकिन कई रिपोर्ट्स में अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं।
- कांग्रेस के दो सूत्रों ने MSNBC को बताया कि अमेरिका हर दिन लगभग $1 बिलियन खर्च कर रहा है।
- Politico की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ रिपब्लिकन सांसदों को डर है कि यह खर्च $2 बिलियन प्रतिदिन तक पहुंच सकता है।
- थिंक टैंक CSIS के विश्लेषण के अनुसार टैक्सपेयर्स को हर दिन लगभग $891.4 मिलियन खर्च उठाना पड़ रहा है।
- कुल मिलाकर विशेषज्ञों का अनुमान है कि रोज़ाना खर्च की संभावित सीमा $1 से $2 बिलियन के बीच है।
अमेरिका ‘कभी खत्म न होने वाली लड़ाई’ में फंस रहा है?
यूएस हाउस माइनॉरिटी लीडर हकीम जेफ्रीज ने ट्रंप प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि राष्ट्रपति अमेरिका को मिडिल ईस्ट में एक और “कभी खत्म न होने वाली लड़ाई” में धकेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ईरान पर बमबारी के लिए अरबों डॉलर खर्च कर रही है, जबकि आम अमेरिकियों को स्वास्थ्य सेवाओं, घर खरीदने और रोजमर्रा के खर्चों में राहत नहीं मिल रही।
पहले हफ्ते में ही $6 बिलियन खर्च
हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार पेंटागन ने सांसदों को बताया कि युद्ध के पहले हफ्ते में लगभग $6 बिलियन (55,200 करोड़ रुपए) खर्च हो चुके थे। रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि ऑपरेशन की तीव्रता के आधार पर रोजाना खर्च अलग-अलग हो सकता है।
युद्ध इतना महंगा क्यों है?
मिलिट्री एनालिस्ट्स के अनुसार युद्ध का खर्च कई कारणों से बढ़ रहा है। फरवरी की शुरुआत से अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी तेजी से बढ़ाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने इस क्षेत्र में 120 से अधिक सैन्य विमान तैनात किए हैं। यह 2003 के इराक युद्ध के बाद इस क्षेत्र में अमेरिकी वायुशक्ति की सबसे बड़ी तैनाती मानी जा रही है।
मिडिल ईस्ट में तैनात आधुनिक अमेरिकी हथियार
- F-35 स्टील्थ फाइटर
- F-22 एयर सुपीरियोरिटी जेट
- F-15 और F-16 फाइटर जेट
- E-3 Sentry AWACS निगरानी विमान
इसके अलावा ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर भी ऑपरेशन को जारी रखने के लिए तैनात किए गए हैं। आधुनिक युद्ध में इस्तेमाल होने वाले हथियार बेहद महंगे होते हैं, जिससे कुल सैन्य खर्च तेजी से बढ़ जाता है।
प्रमुख हथियार और उनकी कीमत
- Tomahawk Cruise Missile
लगभग $2 मिलियन से $3.6 मिलियन प्रति मिसाइल
- Kamikaze Drone
लगभग $35,000 प्रति ड्रोन
- THAAD Interceptor Missile
लगभग $12.8 मिलियन प्रति मिसाइल
- MQ-9 Reaper Drone
लगभग $30 मिलियन प्रति ड्रोन
- JDAM Guided Bomb Kit
लगभग $80,000 प्रति यूनिट
इन महंगे हथियारों की वजह से युद्ध की कुल लागत लगातार बढ़ती जा रही है।


