दिल्ली के मालवीय नगर होटल अग्निकांड में 21 मौतों के बाद क्या हुआ बड़ा खुलासा? क्या बिना Fire NOC और सुरक्षा मानकों के चल रहे B&B में मौतों को रोका जा सकता था? क्या सिर्फ 6 कमरों की अनुमति के बावजूद 25 कमरों वाला अवैध विस्तार प्रशासनिक लापरवाही है? क्या आग के वक्त मालिक का मौके से भागना और मैनेजर का लापता होना जांच को और संदिग्ध बनाता है?
नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में बुधवार सुबह 'फ्लोरिश स्टे B&B' होटल में लगी भीषण आग ने पूरी राजधानी को दहला दिया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 21 मासूम जिंदगियों (भारतीय और विदेशी नागरिकों) की मौत हो चुकी है। दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए होटल मालिक लवकेश बजाज से हुई बुधवार रात की पूछताछ में कई ऐसे चौंकाने वाले और खौफनाक सच सामने आए हैं, जिन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मालिक का चौंकाने वाला कबूलनामा: “डर के मारे भाग गया”
पूछताछ के दौरान लवकेश बजाज ने पुलिस के सामने एक ऐसा बयान दिया जिसे सुनकर जांच अधिकारी भी हैरान रह गए। बजाज ने कबूल किया कि जब बुधवार सुबह होटल में भीषण आग भड़की, तो वह 'फ्लोरिश स्टे B&B' के बिल्कुल पास ही मौजूद था। उसने अपनी आंखों के सामने आग की लपटें और धुएं का गुबार उठते देखा। लेकिन अंदर फंसे बेबस मरीजों के रिश्तेदारों और विदेशी पर्यटकों की जान बचाने या दमकल विभाग को सूचित करने के बजाय, वह डर के मारे चुपचाप घटनास्थल से रफूचक्कर हो गया। बजाज ने बताया कि वह अपने घर भी नहीं गया, बल्कि पुलिस के हत्थे चढ़ने से पहले तक कई घंटों तक दिल्ली की सड़कों पर आवारा बनकर भटकता रहा।
सबसे बड़ा खुलासा: फायर सेफ्टी NOC कभी लिया ही नहीं गया!
इस मामले का सबसे बड़ा और हैरान करने वाला सस्पेंस तब खुला जब बजाज ने माना कि उसने इस इमारत के लिए कभी भी 'फायर सेफ्टी NOC' (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लिया ही नहीं था। अधिकारियों के मुताबिक, इस जर्जर इमारत का ढांचा ऐसा था कि इसे मौजूदा नियमों के तहत कभी फायर एनओसी मिल ही नहीं सकती थी।
मौत का चक्रव्यूह: सेंसर दरवाजों ने रोकी सांसें
जांच में सामने आया है कि पूरी इमारत में आने-जाने और भागने का सिर्फ एक ही संकरा रास्ता था। जब आग ग्राउंड फ्लोर पर बने रेस्टोरेंट के बिजली उपकरणों से भड़की और ऊपर की तरफ फैली, तो होटल की खिड़कियां पूरी तरह बंद थीं और मुख्य दरवाजा सेंसर से चलता था। बिजली कटते ही सेंसर दरवाजे लॉक हो गए, खिड़कियों ने धुएं को बाहर नहीं जाने दिया और पूरा होटल एक गैस चैंबर बन गया, जिससे लोगों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला।
6 कमरों की अनुमति और चला रहे थे 25 कमरे; बेसमेंट में भी बिछा था मौत का जाल
लाइसेंस के नियमों को लेकर जो खेल खेला गया, वह बेहद चौंकाने वाला है। दिल्ली सरकार की 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' (B&B) योजना के तहत इस इमारत को सिर्फ 6 कमरे संचालित करने की कानूनी मंजूरी मिली हुई थी। लेकिन लालच की हद पार करते हुए बजाज इसे 25 कमरों वाले एक बड़े होटल के रूप में चला रहा था। हद तो तब हो गई जब सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर बेसमेंट (तहखाने) में भी कमरे बना दिए गए थे। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि बिना मंजूरी के इमारत पर अवैध रूप से और कितनी मंजिलें तान दी गई थीं।
कौन है जय मिश्रा? कागजों पर 'अकाउंटेंट' के नाम का रहस्यमयी खेल
लवकेश बजाज ने खुद को बचाने के लिए एक और बड़ा पत्ता खेला है। उसने पुलिस को बताया कि वह अकेले ही इस धंधे का मालिक था, लेकिन उसने होटल का रोजमर्रा का पूरा कामकाज अपने अकाउंटेंट 'जय मिश्रा' को सौंप रखा था। सस्पेंस की बात यह है कि होटल के संचालन से जुड़े कई मुख्य और जरूरी सरकारी दस्तावेज लवकेश के बजाय इसी जय मिश्रा के नाम पर रजिस्टर्ड हैं। लाइसेंस भी मिश्रा के नाम पर ही जारी कराए गए थे। पुलिस को अंदेशा है कि मिश्रा को एक मोहरे की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था। फिलहाल जय मिश्रा फरार है और पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है।
कोर्ट में पेशी और दिल्ली सरकार का 'मेगा क्लीन-अप' एक्शन प्लान
आरोपी लवकेश बजाज को आज दोपहर करीब 2 बजे कोर्ट में पेश किया जाएगा। दिल्ली पुलिस कोर्ट से उसकी 3-4 दिनों की रिमांड की मांग करेगी ताकि गायब रिकॉर्ड्स को बरामद किया जा सके और बजाज के मालिकाना हक वाले अन्य तीन होटलों के काले कारनामों की भी पड़ताल की जा सके। इस बीच, इस भयानक लापरवाही से जागी दिल्ली सरकार ने राजधानी भर में चल रहे अवैध होटलों पर हथौड़ा चलाने के लिए जिला प्रशासन, एमसीडी (MCD), दिल्ली पुलिस और बिजली विभाग की एक संयुक्त उच्च-स्तरीय समिति का गठन कर दिया है, जो पूरी दिल्ली में छानबीन करेगी।


