पाकिस्तान की नेशनल असेंबली भंग करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सभी आदेश होंगे अदालत के अधीन

Published : Apr 03, 2022, 10:03 PM ISTUpdated : Apr 03, 2022, 10:08 PM IST
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली भंग करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सभी आदेश होंगे अदालत के अधीन

सार

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश उमर अता बंदियाल ने कहा है कि नेशनल असेंबली को भंग करने के संबंध में प्रधानमंत्री के सभी काम और राष्ट्रपति द्वारा दिए गए आदेश अदालत के अधीन होंगे।

इस्लामाबाद। अविश्वास प्रस्ताव का सामना कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran khan) ने रविवार को नेशनल असेंबली भंग कर दिया। इस मामले में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश उमर अता बंदियाल ने रविवार को कहा कि नेशनल असेंबली को भंग करने के संबंध में प्रधानमंत्री द्वारा किए गए सभी काम और राष्ट्रपति द्वारा दिए गए आदेश अदालत के अधीन होंगे। 

प्रधान न्यायाधीश ने यह टिप्पणी नेशनल असेंबली (एनए) के उपाध्यक्ष कासिम सूरी द्वारा प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करने और राष्ट्रपति आरिफ द्वारा एनए को भंग किए जाने के बाद देश में मौजूदा स्थिति पर ध्यान देने के बाद की। मुख्य न्यायाधीश अता बंदियाल, न्यायमूर्ति इजाजुल अहसन और न्यायमूर्ति मोहम्मद अली मजहर की शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने रविवार को मामले की सुनवाई की। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के कार्यों के बारे में मुख्य न्यायाधीश के अवलोकन के बाद वकील असद रहीम ने कहा कि जब तक अदालत का आदेश नहीं आता नेशनल असेंबली की स्थिति हवा में है।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को जिम्मेदारी से कार्य करने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि किसी भी राज्य संस्था द्वारा कोई असंवैधानिक कदम नहीं उठाया जाना चाहिए और किसी को भी स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। लोक व्यवस्था बनाए रखी जानी चाहिए।

डिप्टी स्पीकर के कार्यों की समीक्षा करेगी कोर्ट
उन्होंने कहा कि अदालत रमजान के कारण सुनवाई को नहीं खींचना चाहती और सभी राजनीतिक दलों को नोटिस जारी किया जाना चाहिए। जस्टिस बंदियाल ने आंतरिक और रक्षा सचिवों को कानून-व्यवस्था की स्थिति के बारे में अदालत को जानकारी देने का भी आदेश दिया। मुख्य न्यायाधीश ने पीपीपी के अनुरोध को स्वीकार किया और कहा कि अदालत डिप्टी स्पीकर के कार्यों की समीक्षा करेगी। हालांकि अदालत ने डिप्टी स्पीकर के फैसले को निलंबित करने के अनुरोध को खारिज कर दिया और अटॉर्नी जनरल को इसे सोमवार को पेश करने का निर्देश दिया।

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सोमवार को होगी सुनवाई
न्यायमूर्ति बंदियाल ने टिप्पणी की कि राष्ट्रपति अल्वी को मामले में प्रतिवादी बनाया जाना चाहिए क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण मामला है। उन्होंने यह भी आदेश दिया कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और सभी राजनीतिक दलों को स्वत: संज्ञान में प्रतिवादी बनाया जाए। अदालत ने अटॉर्नी जनरल खालिद जावेद खान, स्पीकर, डिप्टी स्पीकर, रक्षा सचिव, आंतरिक सचिव और सभी राजनीतिक दलों को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने मामले की सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी।

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