कुलभूषण जाधव की सजा मामले में समीक्षा बिल को पाकिस्तानी संसदीय पैनल ने दी मंजूरी

Published : Oct 22, 2020, 05:00 PM ISTUpdated : Oct 22, 2020, 05:52 PM IST
कुलभूषण जाधव की सजा मामले में समीक्षा बिल को पाकिस्तानी संसदीय पैनल ने दी मंजूरी

सार

पाकिस्तान नेशनल असेंबली के संसदीय पैनल ने गुरूवार को कुलभूषण जाधव को मिली मौत की सजा की समीक्षा करने वाले बिल को मंजूरी दे दी है। सूत्रों के मुताबिक, अंतरर्राष्ट्रीय न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन करते हुए कुलभूषण जाधव की मौत की सजा की समीक्षा के लिए सरकार को इस बिल की मंजूरी दी गई है।

लाहोर. पाकिस्तान नेशनल असेंबली के संसदीय पैनल ने गुरूवार को कुलभूषण जाधव को मिली मौत की सजा की समीक्षा करने वाले बिल को मंजूरी दे दी है। सूत्रों के मुताबिक, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन करते हुए कुलभूषण जाधव की मौत की सजा की समीक्षा के लिए सरकार को इस बिल की मंजूरी दी गई है। बता दें कि पाकिस्तानी जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को पाकिस्तानी मिलिट्री कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई है।

कमेटी ने चर्चा के बाद पास कराया बिल

द इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (रिव्यू एंड रिकंसीडरेशन) शीर्षक वाले इस प्रस्ताव पर विपक्ष के विरोध के बावजूद बुधवार को कमेटी ने चर्चा की और उसे पास कर दिया है। बहस में हिस्सा लेते हुए संघीय कानून और न्याय मंत्री फारग नसीम ने कहा कि बिल को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के निर्देशों के मुताबिक पेश किया गया है। उन्होंने चेताया कि अगर संसद ने इसे मंजूरी नहीं दी तो पाकिस्तान को प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।

वकीलों ने केस लड़ने से किया था इनकार

दरअसल, कुलभूषण जाधव मामले में इस्लामाबाद हाई कोर्ट द्वारा तय किए गए बचाव पक्ष के वकील ने कोर्ट में पेश होने से मना कर दिया था। इसके बाद इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने दो वरिष्ठ वकील- आबिद हसन मिंटो और मखदूम अली खान को बचाव पक्ष का वकील नियुक्त करने को कहा था। लेकिन उन्होंने भी कुलभूषण जाधव का केस लड़ने से मना कर दिया था।

जाधव पर क्या दावा करता है पाकिस्तान?

दरअसल, पाकिस्तान का दावा है कि कुलभूषण जाधव भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के कर्मचारी हैं। जबकि भारत ने जाधव की भारतीय नागरिकता और पूर्व नौसेना अधिकारी होने की ही पुष्टि की है। 10 अप्रैल 2017 में पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने जाधव को जासूसी के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी। इसके बाद भारत ने मौत की सजा के खिलाफ इंटरनेशनल न्यायालय में याचिका दायर की थी जिसपर 10 मई, 2017 को न्यायालय ने जाधव की फांसी पर रोक लगाई थी। 

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