शेख हसीना को फांसी की सजा, बड़ा सवाल- अब क्या होगा बांग्लादेश का भविष्य?

Published : Nov 28, 2025, 11:52 AM IST
sheikh hasina

सार

बांग्लादेश की पूर्व PM शेख हसीना को 1,400 प्रदर्शनकारियों की मौत के मामले में मौत की सज़ा दी गई है। वह भारत में हैं और भारत उन्हें नहीं सौंपेगा, जिससे एक कूटनीतिक मुद्दा खड़ा हो गया है। यह 'बैटल ऑफ़ द बेगम्स' का नया मोड़ है।

बंग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मौत की सज़ा सुनाया जाना कोई चौंकाने वाली बात नहीं है। देश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना की गैर-मौजूदगी में यह फैसला सुनाया। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने खिलाफ सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करवाई, जिसमें 1,400 लोग मारे गए। शेख हसीना इस वक्त भारत में हैं। भारत का मौजूदा रुख यही है कि वह उन्हें नहीं सौंपेगा। भारत और शेख हसीना के बीच का रिश्ता इंदिरा गांधी और शेख हसीना के पिता मुजीबुर रहमान के ज़माने से चला आ रहा है। फिलहाल तो मौत की सज़ा पर अमल नहीं होगा। लेकिन, भारत के लिए यह एक कूटनीतिक मुद्दा है।

हसीना को मौत की सज़ा

देश में आरक्षण के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन बहुत जल्दी सरकार विरोधी हो गया। शेख हसीना सरकार ने इसे बेरहमी से कुचल दिया। पुलिस ने पॉइंट ब्लैंक रेंज से गोलियां चलाईं। 1,400 लोग मारे गए। यही वजह है कि यूएन ने इस फैसले को पीड़ितों के लिए मिला न्याय बताया। लेकिन, यूएन भी मौत की सज़ा का समर्थन नहीं करता। हसीना के फोन कॉल्स को अदालत में सबूत के तौर पर पेश किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, फोन कॉल्स से पता चलता है कि हसीना ने घातक हथियारों के इस्तेमाल की इजाज़त दी थी। शेख हसीना के वकीलों ने निष्पक्ष सुनवाई के लिए अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में अपील की थी। शेख हसीना ने चुनौती दी है कि हेग की अदालत में केस दायर किया जाएगा।

बैटल ऑफ़ द बेगम्स

बांग्लादेश की राजनीति की पहचान एक शब्द से होती रही है - बैटल ऑफ़ द बेगम्स (Battle of Begums)। इसके मुख्य किरदार खालिदा ज़िया और शेख हसीना हैं। दोनों ही जाने-माने परिवारों से हैं। शेख हसीना, बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के नेता और देश के संस्थापक कहे जाने वाले पूर्व राष्ट्रपति मुजीबुर रहमान की बेटी हैं। वहीं, खालिदा ज़िया सैन्य तानाशाह रहे ज़िया-उर-रहमान की पत्नी हैं। मुजीबुर रहमान और ज़िया-उर-रहमान, दोनों की ही हत्या कर दी गई थी। खालिदा ज़िया और शेख हसीना पहले एक साथ थीं। ज़िया-उर-रहमान के बाद सत्ता संभालने वाले इरशाद को हटाने के लिए दोनों एकजुट हो गईं। लेकिन, जब देश पर शासन करने की बात आई, तो दोनों दुश्मन बन गईं।

पूरब और पश्चिम

उस समय के पाक सैन्य प्रमुख याह्या खान ने मुजीबुर रहमान को सत्ता सौंपने से इनकार कर दिया। इसके बाद पूरब, यानी आज का बांग्लादेश, उबल पड़ा। पाक सेना ने सैन्य कार्रवाई से उनका सामना किया। भारत ने भी दखल दिया। युद्ध में भारत की जीत हुई। पाक सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया। बांग्लादेश आज़ाद हो गया। बंगबंधु के नाम से मशहूर मुजीबुर रहमान पहले राष्ट्रपति बने। लेकिन, 75 में उनकी हत्या कर दी गई, वह भी परिवार के सदस्यों के साथ। सिर्फ शेख हसीना और उनकी बहन शेख रेहाना ही बच पाईं, जो उस वक्त जर्मनी में थीं।

यह समझते हुए कि उनकी जान भी खतरे में है, वह उस समय भी इंदिरा गांधी शासित भारत में आ गईं। उन्हें शरण मिली। इस बीच, जनरल ज़िया ने बांग्लादेश की सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया था। मुजीबुर रहमान के हत्यारों को माफ करने वाले ज़िया ने कट्टरपंथी धार्मिक संगठनों को भी देश में वापस आने की इजाज़त दी। आरोप है कि मुजीबुर रहमान की हत्या में ज़िया का हाथ था और यह नरसंहार पाक जासूसी एजेंसी आईएसआई की मदद से हुआ था। लेकिन, जनरल ज़िया भी मारे गए। इरशाद ने सत्ता संभाली। इरशाद को हटाने के लिए खालिदा ज़िया और तब तक वापस लौट चुकीं शेख हसीना ने हाथ मिलाया। वे इसमें कामयाब भी हुईं। लेकिन, इसके बाद दुश्मनी फिर लौट आई।

पिता और बेटियां

ज़िया की विचारधारा मुजीबुर रहमान के धर्मनिरपेक्ष, राष्ट्रवादी विचारों जैसी नहीं थी। बेटियों ने भी अपने पिताओं के विचारों का ही पालन किया। 1991 के चुनाव में ज़िया जीतीं। 96 में हसीना। 2001 में फिर से ज़िया। इसी लड़ाई को 'बैटल ऑफ़ द बेगम्स' कहा गया। लेकिन, 2009 में सत्ता वापस पाने के बाद हसीना ने इसे फिर हाथ से जाने नहीं दिया। ज़िया भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में बंद हो गईं। ज़िया की रिहाई हसीना के देश छोड़कर भाग जाने के बाद ही हुई। यह राष्ट्रपति मोहम्मद यूनुस के पहले आदेशों में से एक था।

बांग्लादेश का वर्तमान और भविष्य

बैटल ऑफ़ द बेगम्स अभी खत्म नहीं हुआ है। हसीना को मिली मौत की सज़ा इसी का सबसे नया मोड़ है। खालिदा ज़िया की सेहत खराब है। लेकिन, पाक का प्रभाव अब भी मज़बूत है। मोहम्मद यूनुस सरकार भी उसी के दायरे में है। भारत का रुख है कि वह हसीना को नहीं सौंपेगा। चुनाव नज़दीक आने पर 'अम्मा वापस आएंगी', हसीना के बेटे का यह वादा अब पूरा नहीं हो पाएगा। खासकर मौत की सज़ा सुनाए जाने के बाद। देश का वर्तमान 'बैटल ऑफ़ द बेगम्स' के साये में ही है। और भविष्य भी कुछ समय तक इसी साये में रहेगा।

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