8 मई को बिहार में हुई बीपीएससी की कंबाइन प्रिलिमनरी कॉम्पिटेटिव एग्जाम में हुई पेपर लीक मामलें में बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU)ने रक्षा लेखा महानियंत्रक के एक कर्मचारी को अरेस्ट किया था। आरोपी की पेपर लीक में अहम भूमिका थी।

पटना (बिहार). बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के 67वीं संयुक्त (प्रारंभिक) प्रतियोगी परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच करने में लगी है। इसी सिलसिले में झारखंड पुलिस की सहायता से रक्षा लेखा महानियंत्रक (सीजीडीए) के एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। ईओयू द्वारा की गई कार्यवाही में गिरफ्तार किए गए लोक सेवक की पहचान उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में सीजीडीए में तैनात लोअर डिवीजन क्लर्क कपिल कुमार के रूप में हुई है। पुलिस उससे पूछताछ करने में लगी है।

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पेपर की स्केन कॉपी बांटने का आरोप
मामले की जांच कर रही आर्थिक अपराध इकाई ने बिहार में हुई बीपीएससी पेपर लीक मामले में कार्यवाही करते हुए 19 अगस्त को एक और आरोपी को अररेस्ट किया है। उन्होंने बताया कि झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम ने बोकारो से अरेस्ट किया है। वह लीक मामले में शामिल मुख्य आरोपी शक्ति कुमार का करीबी सहयोगी था। शक्ति सिंह को 23 जून को एग्जाम शुरू होने से पहले 67वीं संयुक्त प्रतियोगी प्रारंभिक परीक्षा (67th CCE) के पेपर लीक करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। आरोपी शक्ति सिंह गया के डेल्हा क्षेत्र स्थित राम शरण सिंह इवनिंग कॉलेज के केंद्र अधीक्षक के रूप में ड्यूटी पर थे। उन पर आरोप था कि उन्होंने परीक्षा शुरू होने से पहले क्वेश्चन पेपर की कॉपी स्केन करके आरोपी कपिल कुमार के पास भेजी थी। पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपी कपिल कुमार ने ही पेपर की स्केन कॉपी प्राप्त करने के बाद उसे वितरित किया था। 

यह था मामला
08 मई को बिहार में आयोजित बीपीएससी की 67वीं संयुक्त प्रारंभिक प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्न-पत्र लीक हो गए थे। राज्य सरकार ने मामलें को गंभीरता से लेते हुए केस में ईओयू को मामले की जांच करने को कहा था। जिसमें जांच करते हुए अब तक इसमें 18 लोग गिरफ्तार किए गए है, जिसमें सात सरकारी अधिकारी शामिल है। हालाकि इसमें ईओडी की जांच अभी भी जारी है।

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