बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद ने मुंबई में अपने आवास में कथित अवैध निर्माण के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। इस मामले पर शुक्रवार 5 फरवरी को सुनवाई हुई और कोर्ट की ओर से कहा गया कि 'BMC एक्टर संग बातचीत करके मामले को सुलझा ले और कोई ऐक्शन ना ले।'    

मुंबई. बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद ने मुंबई में अपने आवास में कथित अवैध निर्माण के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। इस मामले पर शुक्रवार 5 फरवरी को सुनवाई हुई और कोर्ट की ओर से कहा गया कि 'BMC एक्टर संग बातचीत करके मामले को सुलझा ले और कोई ऐक्शन ना ले।' इससे पहले सोनू सूद को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली थी। कोर्ट की ओर से उन्हें 10 दिन का मौका मिला था, जिसके बारे में जस्टिस चव्हाण ने कहा था कि 'आप बहुत लेट हैं, आपके पास इसके लिए पर्याप्त अवसर था। कानून उनकी मदद करता है, जो मेहनती हैं।' इसके बाद एक्टर ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 

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एसए बोबडे की बेंच ने की सुनवाई

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे, एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रमण्यम की बेंच द्वारा सोनू सूद की याचिका पर सुनवाई की गई। सोनू सूद और उनकी पत्नी ने अपने वकील वीनीत द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में कहा गया था कि याचिकाकर्ताओं ने पहले ही इंटरनल रेनोवेशन के काम को रोक दिया है, जिसके लिए महाराष्ट्र क्षेत्रीय और नगर नियोजन अधिनियम, 1966 की धारा 43 के प्रावधानों के अनुसार कोई अनुमति की आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही याचिका में यह भी कहा गया है कि जो रेनोवेशन बिल्डिंग में किया गया है उसे बीएमसी द्वारा ध्वस्त किए जाने से रोका जाए।

1992 से मौजूद है इमारत

हाई कोर्ट की सुनवाई के दौरान सोनू सूद के वकील अमोघ सिंह ने दलील रखी थी कि बीएमसी द्वारा भेजे गए नोटिस में ये जिक्र नहीं किया गया है कि किस फ्लोर पर अवैध निर्माण किया गया है, कोई डाइमेंशन मेंशन नहीं किया गया है। वो इमारत वहां पर साल 1992 से मौजूद है। वो पूरी इमारत को नहीं गिरा सकते हैं। उन्होंने ये जिक्र नहीं किया है कि इसमें क्या है, जो अवैध है और इसीलिए हमने ये दलील रखी है कि ये नोटिस आवेग में दिया गया है। एक्टर के वकील का कहना था कि नोटिस बहुत स्पेसिफिक होना चाहिए। ताकि उन्हें पता हो सके कि किस तरह कदम उठाना है।