जेप्टो के सीईओ आदित पालीचा के वर्क-लाइफ बैलेंस वाले पोस्ट पर विवाद छिड़ा है। रेडिट पर कंपनी के टॉक्सिक वर्क कल्चर का आरोप लगाया गया, जिसमें रात 2 बजे मीटिंग और 14 घंटे काम करने की बात कही गई।

बिजनेस डेस्क। जेप्टो के सीईओ आदित पालीचा के "वर्क-लाइफ बैलेंस" पर पोस्ट कर एक्स पर एक नई बहस छेड़ दी है। नई लोगों ने माना है कि यह रेडिट पर वायरल हुए एक पोस्ट का जवाब है। इसमें जेप्टो कंपनी में "टॉक्सिक वर्क कल्चर" होने का आरोप लगाया गया था। कहा गया था कि इस कंपनी में रात के 2 बजे मीटिंग होती है।

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रेडिट पोस्ट को एक अनाम उपयोगकर्ता द्वारा r/StartUpIndia पेज पर शेयर किया गया है। इसका टाइटल है “टॉक्सिक वर्क कल्चर ft. जेप्टो”। पोस्ट में एक व्यक्ति ने दावा किया है कि वह एक साल से जेप्टो के साथ काम कर रहे हैं। यहां सबसे जहरीली कार्य संस्कृति है। उन्होंने दावा किया कि आदित दोपहर 2 बजे काम शुरू करते हैं। वह जल्दी उठ नहीं सकते। इसके चलते रात के 2 बजे बैठकें होती हैं। सभी मीटिंग में देरी होती है। कोई भी मीटिंग समय पर नहीं होती। जेप्टो द्वारा युवा कर्मचारियों को इसलिए काम पर रखा जाता है क्योंकि सीनियर लोग ऐसे वर्क कल्चर में काम नहीं करना चाहते हैं। यहां दिन में कम से कम 14 घंटे काम करवाया जाता है।

30 हजार से अधिक कीमत का फोन हो तो ज्यादा पैसे लेती है जेप्टो

कर्मचारी ने आरोप लगाया कि जेप्टो के काम करने के तरीके में कई रहस्य हैं। यह ग्राहकों से कई तरीकों से पैसे निकालती है। 30,000 रुपए से अधिक कीमत वाले फोन वाले ग्राहकों से अधिक पैसे लिए जाते हैं। उसने कहा कि जूनियर लोगों को यहां इसलिए काम पर रखा जाता है ताकि वेतन कम देना पड़े। इस कंपनी में मार्च में बड़े पैमाने पर छंटनी होगी। अधिकांश विभागों में लोगों को काम पर रखने पर रोक लग चुकी है। अधिकांश कर्मचारी काम करने की ऐसी गलत प्रथाओं के बात भी यहां काम कर रहे हैं। क्योंकि 2 साल में आईपीओ आ सकता है। उम्मीद है कि हम उसके कारण पैसा कमा सकते हैं।"

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पोस्ट के वायरल होने के बाद आदित ने एक एक्स पोस्ट में कहा, "मुझे काम और जीवन में संतुलन से कोई आपत्ति नहीं है। मैं अपने सभी प्रतिस्पर्धियों को इसे अपनाने की सलाह देता हूं।" इसके बाद X पर नई बहस शुरू हो गई। लोगों ने जेप्टो के वर्क कल्चर को लेकर अपने विचार शेयर किए हैं।