अभी विदेशी विश्वविद्यालयों के ऐसे कार्यक्रम उच्च शिक्षा पाठ्यक्रम या सरकारी नौकरियों में प्रवेश पाने के लिए मान्य नहीं हैं क्योंकि भारत में पीजी दो साल का कोर्स है। 

करियर डेस्क. नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) विदेशी विश्वविद्यालयों से एक साल के स्नातकोत्तर यानी पोस्ट ग्रेजुएशन कार्यक्रमों को वैधता देने की दिशा में काम कर रही है। 

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

अभी विदेशी विश्वविद्यालयों के ऐसे कार्यक्रम उच्च शिक्षा पाठ्यक्रम या सरकारी नौकरियों में प्रवेश पाने के लिए मान्य नहीं हैं क्योंकि भारत में पीजी दो साल का कोर्स है। लेकिन सरकार अब दो साल को क्रेडिट सिस्टम के माध्यम से बदलने के प्रयास में है।

भारत में दो साल के कोर्स के बराबर मान्यता

एक रिपोर्ट में इंडियन यूनिवर्सिटीज एसोसिएशन के सेक्रेटरी पंकज मित्तल के बयान के बारे में लिखा गया है कि अगर एक विदेशी यूनिवर्सिटी के एक साल के पीजी कोर्स के क्रेडिट भारत में दो साल के कोर्स के बराबर है, तो इसे मान्यता दी जाएगी।

जब एक छात्र पाठ्यक्रम की एक निश्चित अवधि पूरी करता है, तो वह निश्चित क्रेडिट अर्जित करता है। कुछ पाठ्यक्रमों के लिए एक सेमेस्टर में 20 क्रेडिट शामिल हो सकते हैं तो दूसरे सेमेस्टर के लिए यह 40 क्रेडिट भी हो सकता है, जिसमें बहुत अधिक पाठ्यक्रम और अध्ययन का समय शामिल है।

इस पर अभी चल रहा है काम

एसोसिएशन ऑफ़ इंडियन यूनिवर्सिटीज एक सरकारी बॉडी है जो भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आती है। इसे यह काम दिया गया है कि वे विदेशी यूनिवर्सिटीज के क्रेडिट को भारतीय यूनिवर्सिटीज के समय के साथ मिलाकर समीकरण बनाएं। इस पर अभी काम चल रहा है।

मित्तल ने द प्रिंट से कहा है कि कैम्ब्रिज और ऑक्सफ़ोर्ड जैसे विश्वविद्यालय एक साल की पीजी डिग्री देते हैं लेकिन भारत में यह मान्य नहीं होती। अब समय की अवधि से क्रेडिट सिस्टम की और आ रहे हैं और इस पर काम जारी है।

इस योजना के पीछे विचार भारतीय विश्वविद्यालयों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तरह बनाना है। इसके अलावा ज्यादा से ज्यादा टाई अप करना, विदेशी फैकल्टी बुलाना, सेमेस्टर और स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम को बढ़ावा देना है।