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मोहन से मोहभंग क्यों? जिसका इंतजार भाजपा 32 साल से कर रही थी.. कांग्रेस ने उसे यूं ही छोड़ दिया 

Gujarat Assembly Election 2022: दस बार विधायक रहे कद्दावर आदिवासी और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मोहन सिंह राठवा ने बेटे संग भाजपा ज्वाइन कर ली। दावा किया जा रहा है कि भाजपा उन्हें पार्टी में शामिल कराने के लिए 32 साल से फील्डिंग जमा रही थी और इस बार वे अचानक ही उसकी झोली में आ गिरे। 

Gujarat Assembly Election 2022 mohan singh rathwa resigned congress and joined bjp apa
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First Published Nov 9, 2022, 10:11 AM IST

गांधीनगर। Gujarat Assembly Election 2022: गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है। पार्टी  के एक ऐसे सीनियर और कद्दावर नेता भाजपा की झोली में यूं ही आ गिरे। भाजपा से जुड़े सूत्रों की मानें तो पार्टी इनका 32 साल से इंतजार कर रही थी। ये नेता आदिवासी हैं और कांग्रेस आदिवासी तथा दलित वोटों के दम पर कई सीट वर्षों से जीतती आ रही थी। माना जा रहा है कि इनके जाने से कांग्रेस को इस चुनाव में आदिवासी वोटरों का बड़ा  नुकसान होने वाला है। 

हम बात कर रहे हैं मोहन सिंह राठवा की, जो गुजरात के कद्दावर आदिवासी नेता माने जाते हैं। वे दस बार विधायक रह चुके हैं। 1972 से अब तक सिर्फ एक बार हारे वो भी 2002 के विधानसभा चुनाव में। ये जिस सीट से खड़े हो जाते, जीते जाते। कांग्रेस के लिए हमेशा से ये जिताऊ प्रत्याशी रहे, मगर इस बार कांग्रेस ने इनकी एक बात नहीं मानी और मोहन का कांग्रेस से मोहभंग हो गया। अब मोहन सिंह राठवा ने भाजपा का दामन थाम लिया है। 

'टिकट के लिए कांग्रेस को उलझन में देखा तो पार्टी छोड़ दी'
50 साल से कांग्रेस से जुड़े रहे मोहन सिंह ने विधायक पद से भी इस्तीफा देकर इसे गुजरात विधानसभा की अध्यक्ष निमाबेन आचार्य को सौंप दिया है। मोहन सिंह मध्य गुजरात के कद्दावर नेता माने जाते रहे हैं। वे अक्सर छोटा उदयपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते और जीतते रहे हैं। इसके अलावा भी उन्होंने एक-दो बार सीट बदली और जीत दर्ज की। दरअसल, इस बार मोहन सिंह चाहते थे कि छोटा उदयपुर सीट से टिकट उनके बेटे राजेंद्र सिंह को दिया जाए, मगर कांग्रेस इसके लिए तैयार नहीं थी, क्योंकि इस बार छोटा उदयपुर विधानसभा सीट से कुछ और कांग्रेस नेता दावेदारी जता रही थी और पार्टी असमंजस की स्थिति में थी कि टिकट किसे दिया जाए। पार्टी को उलझन में देखकर मोहन सिंह ने खुद ही इसे छोड़ने का फैसला लिया और एक झटके में निकल गए। 

'मेरे बेटे की भी यही इच्छा थी कि भाजपा के साथ काम करूं' 
मोहन सिंह के मुताबिक वे भाजपा में इसी शर्त पर शामिल हुए हैं कि पार्टी इस बार छोटा उदयपुर सीट से उनके बेटे राजेंद्र को टिकट देगी। राठवा ने भाजपा  में शामिल होने के बाद कहा, मैं 50 साल तक जिस पार्टी में रहा, उसे छोड़कर यहां आया हूं। मेरे बेटे की भी यही इच्छा थी। माना जा रहा है कि मोहन सिंह को भाजपा में लाने के लिए पार्टी 32 साल से प्रयास कर रही थी। इसके लिए कई नेताओं को काम पर लगाया गया था, मगर वे इस चुनाव में मोहन सिंह बेटे समेत खुद ही उसकी झोली में आ गिरे। 

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