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धर्म ग्रंथों में बताई गई हैं डेली लाइफ से जुड़ी ये 6 परंपराएं, इनमें छिपा है अच्छी सेहत का राज

First Published Jan 21, 2021, 1:36 PM IST
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उज्जैन. महाभारत आदि अनेक धर्म ग्रंथों में हिंदू धर्म से जुड़े कई नियमों के बारे में बताया गया है। इनमें से कुछ नियम हमारे दैनिक जीवन से भी जुड़े हैं, जैसे रोज सुबह उठना और स्नान करना आदि। ये नियम सिर्फ धर्म के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है। जानिए ऐसे ही कुछ नियम और परंपराओं के बारे में… 

1. सुबह जल्दी स्नान करना
कहते हैं कि सुबह जल्दी उठकर स्नान करने से पूरा दिन अच्छा गुजरता है। शरीर में सकारात्मक ऊर्जा अनुभव होती है। कई ग्रंथों में तो ये भी कहा गया है कि सुबह स्नान करने से उम्र लंबी होती है। इसलिए हमारे ऋषि-मुनियों के इस परंपरा पर जोर दिया है और इसे हमारे दैनिक जीवन का अंग बनाया है।
 

1. सुबह जल्दी स्नान करना
कहते हैं कि सुबह जल्दी उठकर स्नान करने से पूरा दिन अच्छा गुजरता है। शरीर में सकारात्मक ऊर्जा अनुभव होती है। कई ग्रंथों में तो ये भी कहा गया है कि सुबह स्नान करने से उम्र लंबी होती है। इसलिए हमारे ऋषि-मुनियों के इस परंपरा पर जोर दिया है और इसे हमारे दैनिक जीवन का अंग बनाया है।
 

2. सूर्य नमस्कार या अर्घ्य देना
ग्रंथों में कहा गया है कि उगते हुए सूरज को नमस्कार कर के अर्घ्य देना चाहिए। ऐसा करने से सेहत अच्छी रहती है। सुबह-सुबह सूर्य की जो किरणें शरीर पर पड़ती है उनसे मानसिक और शारीरिक परेशानियां दूर होती हैं।

2. सूर्य नमस्कार या अर्घ्य देना
ग्रंथों में कहा गया है कि उगते हुए सूरज को नमस्कार कर के अर्घ्य देना चाहिए। ऐसा करने से सेहत अच्छी रहती है। सुबह-सुबह सूर्य की जो किरणें शरीर पर पड़ती है उनसे मानसिक और शारीरिक परेशानियां दूर होती हैं।

3. दान देना भी जरूरी
हर व्यक्ति को अपनी शक्ति के अनुसार दान जरूर देना चाहिए। ये बात अनेक ग्रंथों में कही गई है। दान देने से घर- परिवार में धन- धान्य की कमी नहीं होती और सुख-शांति बनी रहती है। वैज्ञानिक नजरिये से देखा जाए तो दान का साइकोलॉजिकल महत्व भी है।
 

3. दान देना भी जरूरी
हर व्यक्ति को अपनी शक्ति के अनुसार दान जरूर देना चाहिए। ये बात अनेक ग्रंथों में कही गई है। दान देने से घर- परिवार में धन- धान्य की कमी नहीं होती और सुख-शांति बनी रहती है। वैज्ञानिक नजरिये से देखा जाए तो दान का साइकोलॉजिकल महत्व भी है।
 

4. हवन या दीपक लगाना
हवन और यज्ञ वैदिक परंपराएं हैं, जो आज भी चली आ रही हैं। इसका संबंध हमारे आस-पास के वातावरण से है। घर की सुख-शांति के लिए भी हवन करना चाहिए। कुछ वैज्ञानिकों ने बताया है कि औषधीय लकड़ियों के इस्तेमाल से किए गए हवन के धुएं से वातावरण शुद्ध होता है।
 

4. हवन या दीपक लगाना
हवन और यज्ञ वैदिक परंपराएं हैं, जो आज भी चली आ रही हैं। इसका संबंध हमारे आस-पास के वातावरण से है। घर की सुख-शांति के लिए भी हवन करना चाहिए। कुछ वैज्ञानिकों ने बताया है कि औषधीय लकड़ियों के इस्तेमाल से किए गए हवन के धुएं से वातावरण शुद्ध होता है।
 

5. धूप-दीप लगाना
रोज सुबह स्नान आदि करने के बाद भगवान को धूप-दीप दर्शन करवाना चाहिए। संभव न हो तो पीपल या तुलसी को जल चढ़ाना चाहिए। इसके बाद धूप-दीप दर्शन करवाना चाहिए। हमारे ऋषि-मुनियों ने ये परंपरा प्रकृति को बचाने और उसे धन्यवाद देने के लिए बनाई है।
 

5. धूप-दीप लगाना
रोज सुबह स्नान आदि करने के बाद भगवान को धूप-दीप दर्शन करवाना चाहिए। संभव न हो तो पीपल या तुलसी को जल चढ़ाना चाहिए। इसके बाद धूप-दीप दर्शन करवाना चाहिए। हमारे ऋषि-मुनियों ने ये परंपरा प्रकृति को बचाने और उसे धन्यवाद देने के लिए बनाई है।
 

6. जप और ध्यान
किसी मंत्र को बार-बार जपने और मेडिटेशन से कांसन्ट्रेशन बढ़ता है। सनातन परंपराओं में जप और ध्यान को भी बहुत खास माना गया है। इससे डिप्रेशन, नींद की कमी और कई तरह की मानसिक परेशानियों से बचा जा सकता है।
 

6. जप और ध्यान
किसी मंत्र को बार-बार जपने और मेडिटेशन से कांसन्ट्रेशन बढ़ता है। सनातन परंपराओं में जप और ध्यान को भी बहुत खास माना गया है। इससे डिप्रेशन, नींद की कमी और कई तरह की मानसिक परेशानियों से बचा जा सकता है।
 

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