Asianet News Hindi

इस मंदिर में स्थापित है 7 फीट से भी बड़ा शिवलिंग, इसे कहते हैं उत्तर का सोमनाथ

First Published Mar 11, 2021, 10:06 AM IST
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp

उज्जैन. वैसे तो भगवान शिव के अनेक मंदिर हमारे देश में है, लेकिन इनमें से कुछ बहुत ही विशेष हैं। ऐसा ही एक मंदिर मध्य प्रदेश के भोजपुर में स्थित है। इस मंदिर को भोजेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाना जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण परमार वंश के राजा भोज ने करवाया था। आगे जानिए इस मंदिर से जुड़ी खास बातें...

इसे कहते हैं उत्तर का सोमनाथ
भोजेश्वर मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है यहां का विशाल शिवलिंग है। इसके आकार के कारण ही इस मंदिर को उत्तर भारत का सोमनाथ भी कहा जाता है। चिकने लाल बलुआ पत्थर के बने इस शिवलिंग को एक ही पत्थर से बनाया गया है और यह विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग माना जाता है। शिवलिंग की लंबाई लगभग 7.5 फीट तथा व्यास 5.8 फीट है। यह शिवलिंग एक 21.5 फीट (6.6 मी॰) चौड़े वर्गाकार आधार (जलहरी) पर स्थापित है।

इसे कहते हैं उत्तर का सोमनाथ
भोजेश्वर मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है यहां का विशाल शिवलिंग है। इसके आकार के कारण ही इस मंदिर को उत्तर भारत का सोमनाथ भी कहा जाता है। चिकने लाल बलुआ पत्थर के बने इस शिवलिंग को एक ही पत्थर से बनाया गया है और यह विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग माना जाता है। शिवलिंग की लंबाई लगभग 7.5 फीट तथा व्यास 5.8 फीट है। यह शिवलिंग एक 21.5 फीट (6.6 मी॰) चौड़े वर्गाकार आधार (जलहरी) पर स्थापित है।

ऐसा है मंदिर का परिसर
मंदिर से प्रवेश के लिए पश्चिम दिशा में सीढ़ियां हैं। गर्भगृह के दरवाजों के दोनों ओर गंगा और यमुना की मूर्तियां लगी हुई हैं। इसके साथ ही गर्भगृह के विशाल शीर्ष स्तंभ पर भगवानों के जोड़े –शिव-पार्वती, ब्रह्मा-सरस्वती, राम-सीता एवं विष्णु-लक्ष्मी की मूर्तियां स्थापित हैं। मंदिर के बाहरी दीवार पर यक्षों की मूर्तियां भी स्थापित हैं। इस मंदिर की छत गुम्बदाकार हैं।

 

ऐसा है मंदिर का परिसर
मंदिर से प्रवेश के लिए पश्चिम दिशा में सीढ़ियां हैं। गर्भगृह के दरवाजों के दोनों ओर गंगा और यमुना की मूर्तियां लगी हुई हैं। इसके साथ ही गर्भगृह के विशाल शीर्ष स्तंभ पर भगवानों के जोड़े –शिव-पार्वती, ब्रह्मा-सरस्वती, राम-सीता एवं विष्णु-लक्ष्मी की मूर्तियां स्थापित हैं। मंदिर के बाहरी दीवार पर यक्षों की मूर्तियां भी स्थापित हैं। इस मंदिर की छत गुम्बदाकार हैं।

 

साल में 2 बार लगता है मेला
भोजेश्वर मंदिर में साल में दो बार वार्षिक मेले का आयोजन किया जाता है। पहला मेला मकर संक्रांति पर और दूसरा महाशिवरात्रि के समय लगता है। इस धार्मिक उत्सव में भाग लेने के लिए दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं। भोजेश्वर मंदिर के अलावा यहां स्थित पार्वती गुफा का भी खास महत्व है।

साल में 2 बार लगता है मेला
भोजेश्वर मंदिर में साल में दो बार वार्षिक मेले का आयोजन किया जाता है। पहला मेला मकर संक्रांति पर और दूसरा महाशिवरात्रि के समय लगता है। इस धार्मिक उत्सव में भाग लेने के लिए दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं। भोजेश्वर मंदिर के अलावा यहां स्थित पार्वती गुफा का भी खास महत्व है।

Follow Us:
Download App:
  • android
  • ios