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मुंबई में नहीं लगता पंकज त्रिपाठी के माता-पिता का मन, बिहार में कुछ ऐसा है 'मिर्जापुर' एक्टर का गांव

First Published Oct 7, 2020, 2:39 PM IST
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पटना (Bihar) । बॉलीवुड के बेहतरीन एक्टर पंकज त्रिपाठी (Actor Pankaj Tripathi) लंबे संघर्ष के बाद बुलंदियों पर पहुंचने वाले कलाकारों में से एक हैं, जो बिहार के निवासी हैं। हालांकि उनके माता-पिता का मन मुंबई ( Mumbai) में नहीं लगा तो वे वापस गांव चले आए हैं। इसके बाद से उन्हें भी गांव की याद आने लगी है और उन्होंने भी रिटायरमेंट का प्लान बनाना शुरू कर दिया है। कुछ दिन पहले एक इंटरव्यू में खुद उन्होंने बताया था कि एक्टिंग की दुनिया को अलविदा कहने के बाद वह खेती-किसानी करेंगे। बताते हैं कि कभी पेड़ के नीचे पढ़ाई करने बाद किसी तरह मुंबई पहुंचने वाले पंकज को एक कमरे में ही पत्नी के साथ जिंदगी गुजारनी पड़ रही थी। इस दौरान उनके जीवन में एक समय ऐसा भी आया था कि उनकी जेब में इतने पैसे नहीं थे कि वह अपनी पत्नी का जन्मदिन मना सके। लेकिन, अपने संघर्ष के बदौलत आज उन्होंने अलग पहचान बना ली और वे इस समय बिहार में खादी के ब्रांड अम्बेसडर भी है। आइये जानते हैं फिल्म 'मिर्जापुर' में बेहतरीन एक्टिंग करने वाले बिहार के इस लाल के संघर्ष से लेकर सफलता तक की पूरी कहानी।

बॉलीवुड एक्टर पंकज त्रिपाठी का जन्म गोपालगंज जिले के बेलसांद गांव में हुआ था। बताते हैं कि उन्होंने शुरुआती पढ़ाई पेड़ के नीचे ही की थी। हर साल गांव में होने वाले छठ पूजा नाटक में वह हिस्सा भी लिया करते थे। अक्सर उन्हें लड़की का रोल मिलता था। (फाइल फोटो)

बॉलीवुड एक्टर पंकज त्रिपाठी का जन्म गोपालगंज जिले के बेलसांद गांव में हुआ था। बताते हैं कि उन्होंने शुरुआती पढ़ाई पेड़ के नीचे ही की थी। हर साल गांव में होने वाले छठ पूजा नाटक में वह हिस्सा भी लिया करते थे। अक्सर उन्हें लड़की का रोल मिलता था। (फाइल फोटो)

10वीं क्लास तक वहीं पढ़ने करने के बाद पिता ने उनको पटना भेज दिया था। वो साल भर केवल दाल चावल या खिचड़ी ही खाते थे। एक कमरे में वो रहते थे, जिसमें ऊपर टिन पड़ी रहती थी। उन्होंने यहीं से 12वीं पास की और घरवालों, मित्रों के कहने पर एक होटल मैनेजमेंट के छोटे कोर्स में एडमीशन ले लिया। लेकिन, वो राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संपर्क में आ गए थे। (फाइल फोटो)
 

10वीं क्लास तक वहीं पढ़ने करने के बाद पिता ने उनको पटना भेज दिया था। वो साल भर केवल दाल चावल या खिचड़ी ही खाते थे। एक कमरे में वो रहते थे, जिसमें ऊपर टिन पड़ी रहती थी। उन्होंने यहीं से 12वीं पास की और घरवालों, मित्रों के कहने पर एक होटल मैनेजमेंट के छोटे कोर्स में एडमीशन ले लिया। लेकिन, वो राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संपर्क में आ गए थे। (फाइल फोटो)
 

साल 1993 में लालू सरकार की छात्र विरोधी नीतियों के विरुद्ध आंदोलन चल रहा था। इस दौरान विधानसभा घेराव करने वो भी निकल गए। जिसके चलते पकड़े जाने पर सात दिन की जेल हुई थी। जहां जेल की लाइब्रेरी में तमाम साहित्यकारों की किताबें पढ़ने लगे और उन्हें साहित्य से लगाव हुआ।  (फाइल फोटो)

साल 1993 में लालू सरकार की छात्र विरोधी नीतियों के विरुद्ध आंदोलन चल रहा था। इस दौरान विधानसभा घेराव करने वो भी निकल गए। जिसके चलते पकड़े जाने पर सात दिन की जेल हुई थी। जहां जेल की लाइब्रेरी में तमाम साहित्यकारों की किताबें पढ़ने लगे और उन्हें साहित्य से लगाव हुआ।  (फाइल फोटो)

पटना में एक प्ले 'अंधा कुंआं' देखा, जिससे वो काफी प्रभावित हुए और उनका थिएटर के प्रति लगाव और बढ़ता चला गया। बाद में कालीदास रंगालय से जुड़ गए और उसके बाद बिहार आर्ट थिएटर से दो साल तक जुड़े रहे। इसी दौरान होटल मैनेजममेंट की ट्रेनिंग के लिए पटना के होटल मौर्या में नाइट शिफ्ट में किचन सुपरवाइजर की जॉब भी मिल गई। लेकिन, समय निकालकर बिहार आर्ट थिएटर से जुड़े रहे।  (फाइल फोटो)

पटना में एक प्ले 'अंधा कुंआं' देखा, जिससे वो काफी प्रभावित हुए और उनका थिएटर के प्रति लगाव और बढ़ता चला गया। बाद में कालीदास रंगालय से जुड़ गए और उसके बाद बिहार आर्ट थिएटर से दो साल तक जुड़े रहे। इसी दौरान होटल मैनेजममेंट की ट्रेनिंग के लिए पटना के होटल मौर्या में नाइट शिफ्ट में किचन सुपरवाइजर की जॉब भी मिल गई। लेकिन, समय निकालकर बिहार आर्ट थिएटर से जुड़े रहे।  (फाइल फोटो)

तीसरे प्रयास में एनसडी ने उन्हें सलेक्ट कर लिया। उन्होंने पिता को समझाया कि ड्रामा टीचर या प्रोफेसर की जॉब मिल जाएगी, जिसके बाद फिर होटल की नौकरी छोड़कर दिल्ली रवाना हो गए। हालांकि कोर्स खत्म करने के बाद पैसा न होने की वजह से पटना चले आए। जहां 2004 में उनकी शादी मृदुला से हुई और वे दोनों पटना और फिर मुंबई चले गए। जहां एक वन बीएचके किराए पर ले लिया और चक्कर लगाने शुरू कर दिए। (फाइल फोटो)
 

तीसरे प्रयास में एनसडी ने उन्हें सलेक्ट कर लिया। उन्होंने पिता को समझाया कि ड्रामा टीचर या प्रोफेसर की जॉब मिल जाएगी, जिसके बाद फिर होटल की नौकरी छोड़कर दिल्ली रवाना हो गए। हालांकि कोर्स खत्म करने के बाद पैसा न होने की वजह से पटना चले आए। जहां 2004 में उनकी शादी मृदुला से हुई और वे दोनों पटना और फिर मुंबई चले गए। जहां एक वन बीएचके किराए पर ले लिया और चक्कर लगाने शुरू कर दिए। (फाइल फोटो)
 

पंकज त्रिपाठी ने एक इंटरव्यू में बताया कि कि उनके जीवन में एक समय ऐसा भी आया था जब बीवी का जन्मदिन था और उनकी जेब में केवल 10 रुपए ही बचे थे। क्या गिफ्ट देते और कैसे केक लाते? हालांकि उनकी पत्नी मृदुला बीएड कोर्स कर चुकी थीं, इसलिए उन्हें एक स्कूल में टीचर की जॉब मिल गईं। इसके बाद दोनों ने तय कर लिया था वापस नहीं लौटना है, फिर उन्हें छोटे-छोटे रोल मिलने लगे थे और न सिर्फ खुद का आशियाना बनाया, बल्कि आज स्टार भी बन गए। (फाइल फोटो)

पंकज त्रिपाठी ने एक इंटरव्यू में बताया कि कि उनके जीवन में एक समय ऐसा भी आया था जब बीवी का जन्मदिन था और उनकी जेब में केवल 10 रुपए ही बचे थे। क्या गिफ्ट देते और कैसे केक लाते? हालांकि उनकी पत्नी मृदुला बीएड कोर्स कर चुकी थीं, इसलिए उन्हें एक स्कूल में टीचर की जॉब मिल गईं। इसके बाद दोनों ने तय कर लिया था वापस नहीं लौटना है, फिर उन्हें छोटे-छोटे रोल मिलने लगे थे और न सिर्फ खुद का आशियाना बनाया, बल्कि आज स्टार भी बन गए। (फाइल फोटो)

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