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Budget 2021: क्या इनकम टैक्स सेक्शन 80C के तहत छूट की लिमिट बढ़ेगी, जानें और क्या हैं उम्मीदें

First Published Jan 21, 2021, 12:18 PM IST
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बिजनेस डेस्क। 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2021-22 के लिए केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा। कोरोना महामारी (Covid-19 Pandemic) का संकट झेल रहे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह बजट कैसा होगा, इसके बारे में आम लोगों के साथ ही विशेषज्ञ भी अनुमान लगा रहे हैं। बता दें कि कोरोना महामारी की वजह से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा चुकी है। ऐसे में, इस बजट से विशेषज्ञों को यह उम्मीद है कि सरकार इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत टैक्स में छूट की लिमिट को बढ़ा सकती है। फिलहाल, सेक्शन  80C के तहत टैक्स में छूट की लिमिट 1.5 लाख रुपए है। इसके अलावा, बैंक एफडी (FD) पीपीएफ (PPF) और लाइफ इन्स्योरेंस प्रीमियम (LIC Premium) में भी 1.5 लाख रुपए तक की राशि पर टैक्स का लाभ लिया जा सकता है। जानें, क्या हैं इस बजट से उम्मीदें। (फाइल फोटो)

कई टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बजट में इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत टैक्स में छूट की लिमिट को बढ़ा कर 3 लाख रुपए किया जा सकता है। ए्क्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ऐसा किया जाता है, तो इससे निवेश में बढ़ोत्तरी होगी और अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। (फाइल फोटो)

कई टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बजट में इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत टैक्स में छूट की लिमिट को बढ़ा कर 3 लाख रुपए किया जा सकता है। ए्क्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ऐसा किया जाता है, तो इससे निवेश में बढ़ोत्तरी होगी और अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। (फाइल फोटो)

इस बजट से फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स को यह उम्मीद भी है कि सरकार लंबी अवधि और कम अवधि की बचत योजनाओं को लेकर कुछ खास नियम ला सकती है। फिलहाल ऐसी कोई टैक्स पॉलिसी नहीं है, जिससे लंबी अवधि की बचत योजनाओं को प्रोत्साहन मिल सके। ऐसी योजनाओं में निवेश बढ़ने से अर्थव्यवस्था में मजबूती आती है। (फाइल फोटो)

इस बजट से फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स को यह उम्मीद भी है कि सरकार लंबी अवधि और कम अवधि की बचत योजनाओं को लेकर कुछ खास नियम ला सकती है। फिलहाल ऐसी कोई टैक्स पॉलिसी नहीं है, जिससे लंबी अवधि की बचत योजनाओं को प्रोत्साहन मिल सके। ऐसी योजनाओं में निवेश बढ़ने से अर्थव्यवस्था में मजबूती आती है। (फाइल फोटो)

लाइफ इन्श्योरेंस और पेंशन फंड की योजनाओं में लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट से सरकार को अच्छा-खासा फंड मिलता है। इसमें बढ़ोत्तरी होने पर अर्थव्यवस्था की सुस्ती दूर हो सकती है और उसे नई रफ्तार मिल सकती है। इसलिए सरकार को बजट में कुछ ऐसे प्रावधान करने होंगे, ताकि इन योजनाओं में निवेश बढ़ सके। इसके लिए टैक्स एग्जेम्प्शन लिमिट बढ़ाना एक बढ़िया उपाय है। (फाइल फोटो)

लाइफ इन्श्योरेंस और पेंशन फंड की योजनाओं में लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट से सरकार को अच्छा-खासा फंड मिलता है। इसमें बढ़ोत्तरी होने पर अर्थव्यवस्था की सुस्ती दूर हो सकती है और उसे नई रफ्तार मिल सकती है। इसलिए सरकार को बजट में कुछ ऐसे प्रावधान करने होंगे, ताकि इन योजनाओं में निवेश बढ़ सके। इसके लिए टैक्स एग्जेम्प्शन लिमिट बढ़ाना एक बढ़िया उपाय है। (फाइल फोटो)

कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बजट में सरकार सेक्शन  80C के तहत टैक्स में छूट की लिमिट को बढ़ा कर 2.5 लाख तक कर सकती है। इसके अलावा, रियल एस्टेट में डिमांड को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियां ला सकती है। इसमें होम लोन के प्रिंसिपल रिपेमेंट पर एग्जेम्प्शन लिमिट में छूट शामिल है। अगर ऐसा होता है तो इस सेक्टर में बूस्ट आ सकता है। (फाइल फोटो)

कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बजट में सरकार सेक्शन 80C के तहत टैक्स में छूट की लिमिट को बढ़ा कर 2.5 लाख तक कर सकती है। इसके अलावा, रियल एस्टेट में डिमांड को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियां ला सकती है। इसमें होम लोन के प्रिंसिपल रिपेमेंट पर एग्जेम्प्शन लिमिट में छूट शामिल है। अगर ऐसा होता है तो इस सेक्टर में बूस्ट आ सकता है। (फाइल फोटो)

इस बजट से टैक्सपेयर्स को यह उम्मीद भी है कि पर्सनल टैक्स में उन्हें राहत मिलेगी। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण से यह पता चला है कि करीब 40 फीसदी लोग इस बजट में डायरेक्ट टैक्स प्रपोजल्स में पर्सनल टैक्स में राहत की उम्मीद कर रहे हैं। इसके अलावा, 47 फीसदी लोगों की मांग है कि सरकार प्रत्यक्ष करों के स्लैब को बढ़ाए। (फाइल फोटो)

इस बजट से टैक्सपेयर्स को यह उम्मीद भी है कि पर्सनल टैक्स में उन्हें राहत मिलेगी। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण से यह पता चला है कि करीब 40 फीसदी लोग इस बजट में डायरेक्ट टैक्स प्रपोजल्स में पर्सनल टैक्स में राहत की उम्मीद कर रहे हैं। इसके अलावा, 47 फीसदी लोगों की मांग है कि सरकार प्रत्यक्ष करों के स्लैब को बढ़ाए। (फाइल फोटो)

फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) के सर्वे में लोगों से टैक्सेशन को लेकर पूछा गया था कि फिलहाल उन्हें टैक्सेशन सिस्टम में सबसे ज्यादा किस तरह की समस्या हो रही है और उन्हें सरकार से बजट में कैसी राहत चाहिए। सर्वे के दौरान 52 फीसदी लोगों ने यह बताया कि उन्हें समय पर टैक्स रिफंड मिलने में समस्या आ रही है। वहीं, 49 फीसदी लोगों ने टैक्स कम्प्लायंस और 43 फीसदी लोगों ने टैक्स लिटिगेशन को लेकर समस्या होने की बात कही। (फाइल फोटो)

फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) के सर्वे में लोगों से टैक्सेशन को लेकर पूछा गया था कि फिलहाल उन्हें टैक्सेशन सिस्टम में सबसे ज्यादा किस तरह की समस्या हो रही है और उन्हें सरकार से बजट में कैसी राहत चाहिए। सर्वे के दौरान 52 फीसदी लोगों ने यह बताया कि उन्हें समय पर टैक्स रिफंड मिलने में समस्या आ रही है। वहीं, 49 फीसदी लोगों ने टैक्स कम्प्लायंस और 43 फीसदी लोगों ने टैक्स लिटिगेशन को लेकर समस्या होने की बात कही। (फाइल फोटो)

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