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इस दीपावली पर घर बैठे खरीद सकते हैं गाय के गोबर से बनी ये चीजें, जानें क्या होगा फायदा

First Published Oct 20, 2020, 10:47 AM IST
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बिजनेस डेस्क। इस दीपावली पर चीन के बने सामानों का बहिष्कार करने और उन्हें टक्कर देने के लिए 'कामधेनु दीपावली अभियान' शुरू किया गया है। यह अभियान राष्ट्रीय कामधेनु आयोग (RKA) ने शुरू किया है। इस अभियान के तहत दीपावाली से जुड़े 12 सामान गाय के गोबर से बनाए गए हैं। कोई भी इन चीजों को घर बैठे त्योहार के मौके पर इस्तेमाल के लिए मंगा सकता है। ये चीजें परंपरागत दीयों, रोशनी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली बिजली की लड़ियों और सजावट की दूसरी चीजों की तुलना में कहीं ज्यादा अच्छी और सस्ती हैं। इनसे पर्यावरण भी बेहतर हो सकता है। इसके अलावा भी गाय के गोबर से बनी इन चीजों के और भी फायदे बताए जा रहे हैं।
(फाइल फोटो)
 

कैसे बनाए गए ये सामान
त्योहार के मौके पर इस्तेमाल के लिए  गाय के गोबर से सामान तैयार करने के लिए  सबसे महिला समूहों को इस अभियान से जोड़ा गया।  इसके बाद उन्हें सामान बनाने की ट्रेनिंग दी गई। फिर इन महिला समूहों को शहरों में मौजूद गौशालाओं से जोड़ा गया। इसके बाद गाय का गोबर जुटा कर सामान तैयार किया गया। तैयार सामान जनसंपर्क के जरिए और लोकल मार्केट में बेचा रहा है।
(फाइल फोटो)
 

कैसे बनाए गए ये सामान
त्योहार के मौके पर इस्तेमाल के लिए  गाय के गोबर से सामान तैयार करने के लिए  सबसे महिला समूहों को इस अभियान से जोड़ा गया।  इसके बाद उन्हें सामान बनाने की ट्रेनिंग दी गई। फिर इन महिला समूहों को शहरों में मौजूद गौशालाओं से जोड़ा गया। इसके बाद गाय का गोबर जुटा कर सामान तैयार किया गया। तैयार सामान जनसंपर्क के जरिए और लोकल मार्केट में बेचा रहा है।
(फाइल फोटो)
 

12 सामान किए गए हैं तैयार
राष्ट्रीय कामधेनु आयोग (RKA) के अध्यक्ष डॉ. वल्लभभाई कथीरिया का कहना है कि 'कामधेनु दीपावली अभियान' से पहले पीएम नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर गौमाया गणेश अभियान चलाया गया था। इस अभियान के दौरान गाय का गोबर मिलाकर मूर्तियां तैयार की गईं थीं। इस अभियान के सफल होने के बाद अब दीपावाली के लिए तैयारी की गई है। दीवाली के लिए दीये, मोमबत्ती, धूपबत्ती, अगरबत्ती, शुभ-लाभ, स्वस्तिक, समरणी, हार्डबोर्ड, वॉल-पीस, पेपर-वेट, हवन सामग्री, भगवान लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां बनाई गई हैं। उनका कहना है कि इस अभियान से पंचगव्य उत्पादों को भी बढ़ावा मिलेगा।
(फाइल फोटो)
 

12 सामान किए गए हैं तैयार
राष्ट्रीय कामधेनु आयोग (RKA) के अध्यक्ष डॉ. वल्लभभाई कथीरिया का कहना है कि 'कामधेनु दीपावली अभियान' से पहले पीएम नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर गौमाया गणेश अभियान चलाया गया था। इस अभियान के दौरान गाय का गोबर मिलाकर मूर्तियां तैयार की गईं थीं। इस अभियान के सफल होने के बाद अब दीपावाली के लिए तैयारी की गई है। दीवाली के लिए दीये, मोमबत्ती, धूपबत्ती, अगरबत्ती, शुभ-लाभ, स्वस्तिक, समरणी, हार्डबोर्ड, वॉल-पीस, पेपर-वेट, हवन सामग्री, भगवान लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां बनाई गई हैं। उनका कहना है कि इस अभियान से पंचगव्य उत्पादों को भी बढ़ावा मिलेगा।
(फाइल फोटो)
 

11 करोड़ परिवारों तक पहुंचने का लक्ष्य
राष्ट्रीय कामधेनु आयोग (RKA) के अध्यक्ष डॉ. वल्लभभाई कथीरिया का कहना है कि मांग के हिसाब से जितना माल बन जाए उतना ही अच्छा है, लेकिन हमारा लक्ष्य देश के 11 करोड़ परिवारों तक 33 करोड़ गाय के गोबर से बने दीए पहुंचाने का है। इसमें से 3 लाख दीयों का ऑर्डर अयोध्या और 1 लाख दीयों का ऑर्डर वाराणसी से पहले ही मिल चुका है।
(फाइल फोटो)

11 करोड़ परिवारों तक पहुंचने का लक्ष्य
राष्ट्रीय कामधेनु आयोग (RKA) के अध्यक्ष डॉ. वल्लभभाई कथीरिया का कहना है कि मांग के हिसाब से जितना माल बन जाए उतना ही अच्छा है, लेकिन हमारा लक्ष्य देश के 11 करोड़ परिवारों तक 33 करोड़ गाय के गोबर से बने दीए पहुंचाने का है। इसमें से 3 लाख दीयों का ऑर्डर अयोध्या और 1 लाख दीयों का ऑर्डर वाराणसी से पहले ही मिल चुका है।
(फाइल फोटो)

चीन के सामानों का बहिष्कार
राष्ट्रीय कामधेनु आयोग (RKA) के अध्यक्ष डॉ. वल्लभभाई कथीरिया का कहना है कि इसके पीछे हमारा सबसे बड़ा मकसद चीन के बने दीयों का बहिष्कार कर देश के गरीब लोगों के लिए रोजगार का अवसर मुहैया कराना  हैं। उनका कहना है कि पहले के अभियान को देखते हुए उन्हें इसमें सफलता मिलने की काफी उम्मीद है।
(फाइल फोटो)

चीन के सामानों का बहिष्कार
राष्ट्रीय कामधेनु आयोग (RKA) के अध्यक्ष डॉ. वल्लभभाई कथीरिया का कहना है कि इसके पीछे हमारा सबसे बड़ा मकसद चीन के बने दीयों का बहिष्कार कर देश के गरीब लोगों के लिए रोजगार का अवसर मुहैया कराना  हैं। उनका कहना है कि पहले के अभियान को देखते हुए उन्हें इसमें सफलता मिलने की काफी उम्मीद है।
(फाइल फोटो)

हर घर तक होगी पहुंच
राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष का कहना है कि शुरुआत में भले ही गाय के गोबर से बने सामानों की संख्या और उसे बनाने वालों की संख्या कम हो, लेकिन हमारा मकसद  हर भारतीय घर तक गाय के गोबर से बने ये 12 सामान पहुंचाने का है। इससे रोजगार बढ़ाने और इस अभियान से हर भारतीय को जोड़ने के लिए शुरुआती पहल में डेयरी किसानों, बेरोजगार युवाओं, महिलाओं, युवा उद्यमियों, गौशालाओं, गोपालकों, स्वयं सहायता समूहों और भी दूसरे लोगों को जोड़ने का अभियान जारी है। 
 

हर घर तक होगी पहुंच
राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष का कहना है कि शुरुआत में भले ही गाय के गोबर से बने सामानों की संख्या और उसे बनाने वालों की संख्या कम हो, लेकिन हमारा मकसद  हर भारतीय घर तक गाय के गोबर से बने ये 12 सामान पहुंचाने का है। इससे रोजगार बढ़ाने और इस अभियान से हर भारतीय को जोड़ने के लिए शुरुआती पहल में डेयरी किसानों, बेरोजगार युवाओं, महिलाओं, युवा उद्यमियों, गौशालाओं, गोपालकों, स्वयं सहायता समूहों और भी दूसरे लोगों को जोड़ने का अभियान जारी है। 
 

क्या है राष्ट्रीय कामधेनु आयोग
राष्ट्रीय कामधेनु आयोग केंद्र सरकार ने बनाया है। यह आयोग मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत आता है। केंद्र सरकार द्वारा 6 फरवरी, 2019 को इस आयोग को स्थापित किया गया था और इसका उद्देश्य 'गायों का संरक्षण और विकास' है। केंद्रीय बजट 2019-20 में इसकी घोषणा की गई थी। राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष डॉ. वल्लभभाई कथीरिया हैं।
(फाइल फोटो)

क्या है राष्ट्रीय कामधेनु आयोग
राष्ट्रीय कामधेनु आयोग केंद्र सरकार ने बनाया है। यह आयोग मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत आता है। केंद्र सरकार द्वारा 6 फरवरी, 2019 को इस आयोग को स्थापित किया गया था और इसका उद्देश्य 'गायों का संरक्षण और विकास' है। केंद्रीय बजट 2019-20 में इसकी घोषणा की गई थी। राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष डॉ. वल्लभभाई कथीरिया हैं।
(फाइल फोटो)

गोबर चिप का किया था अनावरण
बता दें 'कामधेनु दीपावली अभियान' के राष्ट्रव्यापी अभियान के दौरान डॉ. वल्लभभाई कथीरिया ने गाय के गोबर से बनी एक चिप का अनावरण किया था। उन्होंने दावा किया था कि यह मोबाइल हैंडसेट से निकलने वाले रेडिएशन को काफी कम कर देता है। एक चिप की कीमत 50 से 100 रुपए के बीच है। खबरों के मुताबिक, ये चिप अमेरिका में निर्यात किए जा रहे हैं, जहां इसे 10 डॉलर प्रति चिप की दर से बेचा जा रहा है। 
(फाइल फोटो)

गोबर चिप का किया था अनावरण
बता दें 'कामधेनु दीपावली अभियान' के राष्ट्रव्यापी अभियान के दौरान डॉ. वल्लभभाई कथीरिया ने गाय के गोबर से बनी एक चिप का अनावरण किया था। उन्होंने दावा किया था कि यह मोबाइल हैंडसेट से निकलने वाले रेडिएशन को काफी कम कर देता है। एक चिप की कीमत 50 से 100 रुपए के बीच है। खबरों के मुताबिक, ये चिप अमेरिका में निर्यात किए जा रहे हैं, जहां इसे 10 डॉलर प्रति चिप की दर से बेचा जा रहा है। 
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