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जंगल में मांस के टुकड़े लेकर बाघ पकड़ लाई ये अफसर, हिम्मत देख अधिकारियों के छूट गए थे पसीने
मुंबई. समाज में ये धारणा है कि महिलाएं कमजोर और डरपोक होती हैं। पर इस सोच को मुंह चिढ़ा दिया एक महिला अफसर ने जो शेर जैसे खतरनाक जानवरों को पकड़कर पिंजरे में डाल देती है। उनकी जाबांजी के किस्से हर किसी की जुबान पर हैं। महिला अफसर का नाम है सिदाम प्रमीला इस्तारी। वो फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की जूनियर फॉरेस्ट अधिकारी हैं। हाथ में मांस के टुकड़े लेकर शेर पकड़ने वाली इस प्रमिला की बहादुरी का वो किस्सा हम आज आपको सुना रहे हैं।
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2 नवंबर 2018 को महाराष्ट्र के यवतमाल ज़िले के बोराती गांव के पास देर रात एक शेरनी को जान से मारा दिया गया था। शेरनी का नाम था अवनी। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को शेरनी पर गोली चलाने की परमिशन दी थी। ये खूंखार शेरनी दो साल के अंदर 13 लोगों की जान ले चुकी थी। ज्यादा लोगों की जान न जाए इसलिए उसे खोजकर मार दिया गया था। पर शेरनी के दो बच्चे जंगल में ही रह गए थे।
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दोनों बच्चों को खोजने की बारी आई तो जूनियर फॉरेस्ट अधिकारी प्रमीला को ये जिम्मेदारी मिली। वो अपनी टीम के साथ घने जंगलों में निकल पड़ीं। 45 दिन की कड़ी खोजबीन के बाद एक छोटी शेरनी मिल गई, लेकिन अभी तक छोटा शेर गायब है। उसकी खोजबीन भी जारी है।
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प्रमीला बताती हैं कि उन्होंने और उनकी टीम ने 45 दिन तक लगातार सर्च ऑपरेशन किया। वो कहती हैं- मैं घने जंगल में घनघोर अंधेरे में दूर तक जाती थी। इस उम्मीद से कि अवनी के बच्चे मिल जाएं, मुझे पता था कि मेरी जान को खतरा था। कई बार रात के 3 बजे भी अवनी के बच्चे वैसे भी एक साल के हो चुके थे और कमज़ोर थे।
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वो गांववालों को नुकसान न पहुंचाएं इसके लिए मैं एक हाथ में लाठी और दूसरे में लालच देने के लिए मांस के टुकड़े लेकर चलती थी। फिर हमें छोटी शेरनी मिल गई जिसे पकड़ लिया गया। छोटी शेरनी को पेंच टाइगर रिजर्व भेज दिया गया, लेकिन शेर को खोजना अभी बाकी है। प्रमीला कहती हैं हमारी खोजबीन सफल रही।
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शेरनी के बच्चों को खोजने के लिए प्रमीला ने दिन-रात एक कर दिया था। आखिरकार डेढ़ साल बाद उनके इस काम बड़े अधिकारियों की नज़र पड़ी। फिर नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) ने प्रमीला को सम्मानित करने का फैसला लिया। देशभर से 6 जूनियर फॉरेस्ट अधिकारियों को चुना गया सबको उनके काम के लिए एक-एक लाख रुपए और प्रमाण पत्र दिया जाएगा। इन 6 अधिकारियों में इकलौती महिला अधिकारी प्रमीला भी हैं। पिछले साल सितंबर में NTCA ने राहत और बचाव कार्य में जुटे जूनियर फॉरेस्ट अधिकारियों को सम्मान देने की बात कही थी।
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खैर, इस वक्त NTCA से सम्मानित होने पर प्रमीला खुश हैं। उन्हें उम्मीद है कि अब और भी ज्यादा महिलाएं इस जॉब को करने के लिए आगे आएंगी। ऐसे ही जाबांजी और हिम्मत दिखाकर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में काम करेंगी।
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